होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर साफ दिखाई देने लगा है। संकट की खबरों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में करीब 2.2 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। मध्य पूर्व से तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता देखने को मिल रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अहम मार्ग है और यहां किसी भी प्रकार का सैन्य या सुरक्षा संकट सीधे तौर पर कीमतों को प्रभावित करता है। ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई (WTI) दोनों बेंचमार्क में उछाल देखा गया, जबकि एशियाई और यूरोपीय शेयर बाजारों में दबाव की स्थिति बनी रही। ऊर्जा कंपनियों के शेयरों में तेजी आई, लेकिन आयातक देशों की मुद्राओं पर दबाव बढ़ा है।
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विश्लेषकों के अनुसार यदि क्षेत्र में तनाव लंबा खिंचता है तो तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी संभव है, जिसका असर महंगाई और वैश्विक आर्थिक वृद्धि पर पड़ सकता है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए यह स्थिति व्यापार संतुलन और ईंधन कीमतों के लिहाज से चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है।


