भारत में 2025 की शुरुआत में एक गंभीर स्वास्थ्य संकट उभर कर सामने आया, जब कई राज्यों में खांसी सिरप से बच्चों की तबीयत बिगड़ने और मौतों के मामले सामने आए। शुरुआती जांच में पता चला कि कुछ सिरप में हानिकारक रसायन जैसे डायथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) और इथिलीन ग्लाइकॉल (EG) मौजूद थे, जो शरीर के लिए ज़हरीले हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने तत्काल कार्रवाई करते हुए कई दवा कंपनियों के उत्पादन लाइसेंस निलंबित कर दिए और देशभर में सिरप सैंपल की जांच अभियान शुरू किया।
कौन-कौन से राज्य प्रभावित हुए?
रिपोर्ट्स के अनुसार, खांसी सिरप से संबंधित मामले सबसे अधिक उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ से सामने आए हैं। इन राज्यों में दर्जनों बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है। स्थानीय स्वास्थ्य विभागों ने संदिग्ध सिरप की बिक्री पर रोक लगाई है और दुकानों से इनकी खेप जब्त की जा रही है।
स्वास्थ्य मंत्रालय की जांच और कार्रवाई
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस मामले की जांच के लिए विशेष समिति गठित की है। इसमें ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI), आईसीएमआर, और केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला (CDL) के अधिकारी शामिल हैं।
जांच में ये प्रमुख कदम उठाए गए हैं:
- देशभर में दवा सैंपल कलेक्शन और टेस्टिंग।
- संदिग्ध कंपनियों के उत्पादन यूनिट्स का निरीक्षण।
- उत्पादन में उपयोग होने वाले केमिकल की सोर्स ट्रेसिंग।
- यदि गलती साबित होती है, तो FIR और लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया।
मंत्रालय ने कहा है कि “जनता के स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।”
दवा कंपनियों की सफाई
जिन कंपनियों के खिलाफ जांच चल रही है, उन्होंने खुद को निर्दोष बताया है। उनका कहना है कि उन्होंने सभी मानक गुणवत्ता परीक्षणों का पालन किया और यदि किसी तीसरे पक्ष द्वारा आपूर्ति में गड़बड़ी हुई है, तो उसकी जिम्मेदारी वे नहीं ले सकते। हालांकि, फार्मा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में कई छोटी दवा कंपनियाँ गुणवत्ता नियंत्रण में लापरवाही करती हैं और यही समस्या की जड़ है।
भारत की फार्मा इंडस्ट्री पर असर
भारत दुनिया का “फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड” कहलाता है, लेकिन खांसी सिरप विवाद ने इस प्रतिष्ठा को झटका दिया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देशों ने भारतीय दवाओं की जांच प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। कुछ अफ्रीकी और एशियाई देशों ने भारतीय खांसी सिरप की इंपोर्ट पर अस्थायी रोक भी लगा दी है। इससे देश के फार्मा एक्सपोर्ट सेक्टर को करोड़ों रुपये का नुकसान हो सकता है।


