शेयर बाजार में तेजी हो या गिरावट, निवेशकों के लिए स्थिरता बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में ‘कोर पोर्टफोलियो’ रणनीति लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मजबूत आधार साबित होती है। कोर पोर्टफोलियो में आमतौर पर बड़े और स्थिर कंपनियों के शेयर, इंडेक्स फंड या ब्लूचिप स्टॉक्स शामिल किए जाते हैं, जो बाजार की अस्थिरता के बावजूद अपेक्षाकृत संतुलित रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, कोर पोर्टफोलियो कुल निवेश का बड़ा हिस्सा होता है, जिसे लंबी अवधि के लिए रखा जाता है। इसके साथ निवेशक सैटेलाइट पोर्टफोलियो में हाई-ग्रोथ या थीमैटिक निवेश जोड़ सकते हैं। इस रणनीति से जोखिम का बेहतर प्रबंधन होता है और बाजार में गिरावट के समय नुकसान सीमित रखने में मदद मिलती है।
वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि अनुशासित एसेट एलोकेशन, समय-समय पर रीबैलेंसिंग और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाकर कोर पोर्टफोलियो को और प्रभावी बनाया जा सकता है। यही कारण है कि अनुभवी निवेशक बाजार की अनिश्चितता में भी इस रणनीति को प्राथमिकता देते हैं।


