धार्मिक कथावाचक बागेश्वर बाबा की कथित ‘सरकारी’ खातिरदारी को लेकर सियासी और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। आरोप है कि एक कार्यक्रम के दौरान मंत्री स्वयं ‘सारथी’ की भूमिका में नजर आए, विमान को ‘रथ’ की तरह इस्तेमाल किया गया और बाबा के चारों ओर पुलिस बल तैनात रहा। इस पूरे घटनाक्रम के सामने आते ही सोशल मीडिया पर तस्वीरें और वीडियो वायरल हो गए, जिसके बाद सवाल उठने लगे कि क्या किसी धार्मिक व्यक्ति के लिए इस स्तर की सरकारी व्यवस्था उचित है।
विरोध करने वालों का कहना है कि सरकारी संसाधनों का इस तरह उपयोग करना नियमों और मर्यादाओं के खिलाफ है। लोगों ने यह भी पूछा कि जब आम नागरिकों को बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा के लिए संघर्ष करना पड़ता है, तब एक निजी धार्मिक आयोजन में इतनी वीआईपी ट्रीटमेंट क्यों दी गई। विपक्षी दलों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए इसे सत्ता का दुरुपयोग करार दिया है।
वहीं, समर्थकों का तर्क है कि यह आयोजन जनभावनाओं से जुड़ा था और सुरक्षा कारणों से व्यवस्था की गई। हालांकि, बढ़ते विवाद के बीच प्रशासन और सरकार की ओर से सफाई का इंतजार किया जा रहा है। फिलहाल, बागेश्वर बाबा की ‘सरकारी’ खातिरदारी का यह मामला प्रदेश की राजनीति में नई बहस का मुद्दा बन गया है।


