जी20 सम्मेलन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवाल उठाते हुए कहा है कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वह आगामी जी20 सम्मेलन में दक्षिण अफ्रीका की भागीदारी सुनिश्चित करेगी। विपक्ष का दावा है कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों और कूटनीति को लेकर केंद्र सरकार की भूमिका स्पष्ट नहीं है।
कांग्रेस प्रवक्ताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि जी20 एक महत्वपूर्ण वैश्विक मंच है और इसमें दक्षिण अफ्रीका जैसे अहम साझेदार की उपस्थिति आवश्यक है। उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार को यह बताना चाहिए—क्या दक्षिण अफ्रीका को औपचारिक रूप से निमंत्रण भेजा गया है? यदि विवाद या अस्पष्टता है, तो भारत सरकार कूटनीतिक स्तर पर क्या प्रयास कर रही है? क्या प्रधानमंत्री व्यक्तिगत रूप से दक्षिण अफ्रीका की सहभागिता सुनिश्चित करने में भूमिका निभाएंगे?
कांग्रेस leaders का कहना है कि BRICS, G20 और अफ्रीका नीति के संदर्भ में दक्षिण अफ्रीका का जुड़ाव भारत के लिए महत्वपूर्ण है। विपक्ष का तर्क है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत–अफ्रीका संबंधों में सुसंगत रणनीति देखने को नहीं मिली, जिसके चलते जी20 जैसे मंच पर भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।अभी तक केंद्र सरकार की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, भारत जी20 के लिए “सहभागिता और समावेशन” के सिद्धांत पर काम कर रहा है, लेकिन दक्षिण अफ्रीका की सहभागिता पर औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जी20 को लेकर यह विवाद आने वाले दिनों में बड़ा मुद्दा बन सकता है। विपक्ष इसे सरकार की “कूटनीतिक अस्पष्टता” के रूप में पेश कर रहा है, जबकि सत्ता पक्ष इसे “अनावश्यक राजनीतिकरण” कह सकता है।


