भारत के मुख्य न्यायाधीश Surya Kant ने न्यायिक नेतृत्व और पारदर्शिता पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि जजों को ‘परफेक्ट’ मान लेना न्यायिक प्रणाली के लिए नुकसानदायक हो सकता है। सीजेई (Conference of Chief Justices) की बैठक में संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि न्यायपालिका में आत्ममंथन, जवाबदेही और सतत सुधार की भावना जरूरी है। उन्होंने जोर दिया कि न्यायाधीश भी इंसान हैं और संस्थागत मजबूती के लिए सुधार की प्रक्रिया लगातार चलती रहनी चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्यायिक नेतृत्व का अर्थ केवल निर्णय देना नहीं, बल्कि प्रशासनिक दक्षता, समयबद्ध सुनवाई और पारदर्शी कार्यप्रणाली सुनिश्चित करना भी है। उन्होंने न्यायालयों में लंबित मामलों को कम करने, तकनीक के बेहतर उपयोग और निचली अदालतों को सशक्त बनाने पर विशेष बल दिया।
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कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सीजेई बैठक में दिया गया यह संदेश न्यायिक सुधारों की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत है। न्यायपालिका की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए संस्थागत आत्मनिरीक्षण और जवाबदेही की संस्कृति को मजबूत करना समय की मांग है।


