छत्तीसगढ़ में सरकारी दफ्तरों में स्मार्ट मीटर लगाने की योजना को लेकर नया प्रस्ताव सामने आया है। प्रस्ताव में कहा गया है कि जिन सरकारी कार्यालयों पर बिजली बिल बकाया है, वहां पहले बकाया राशि जमा कराई जाए, उसके बाद ही स्मार्ट मीटर लगाए जाएं।
बिजली वितरण कंपनी ने इस संबंध में राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा है। अधिकारियों के अनुसार कई विभागों पर लंबे समय से बिजली बिल बकाया है, जिससे राजस्व वसूली प्रभावित हो रही है। ऐसे में स्मार्ट मीटर लगाने से पहले बकाया भुगतान सुनिश्चित करना जरूरी माना जा रहा है।
स्मार्ट मीटर योजना का उद्देश्य बिजली खपत की सटीक निगरानी, बिलिंग में पारदर्शिता और राजस्व नुकसान को कम करना है। हालांकि, बकाया बिल वाले सरकारी दफ्तरों में मीटर लगाने से पहले भुगतान की शर्त लागू करने का प्रस्ताव योजना के क्रियान्वयन को प्रभावित कर सकता है।
सरकार द्वारा प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। स्वीकृति मिलने के बाद ही आगे की प्रक्रिया और नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा।


