Chhattisgarh UCC: बड़ा फैसला लेने की तैयारी, जगदलपुर में विवाह से विरासत तक नियमों पर मंथन
रायपुर, 17 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) का प्रारूप तैयार करने की दिशा में सरकार की पहल तेज होती दिखाई दे रही है। इसी कड़ी में जगदलपुर में उच्च स्तरीय समिति की बैठक आयोजित की गई, जहां विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और लिव-इन संबंधों जैसे संवेदनशील विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। बस्तर संभाग में हुई इस परिचर्चा का उद्देश्य अलग-अलग सामाजिक वर्गों की राय समझना और प्रस्तावित कानूनी व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक बनाना है।
यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि समान नागरिक संहिता का प्रभाव केवल कानूनी दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहेगा। इससे परिवार, विवाह संबंधी अधिकार, संपत्ति में हिस्सेदारी और महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा जैसे रोजमर्रा के जीवन से जुड़े विषय प्रभावित हो सकते हैं।
जगदलपुर की बैठक में किन मुद्दों पर हुआ मंथन?
जगदलपुर जिला कलेक्टोरेट के प्रेरणा हॉल में आयोजित बैठक में समान नागरिक संहिता समिति के सदस्य एमके राऊत, मोहन सिंह पवार, ज्योति रानी सिंह, समिति के सचिव श्याम धावड़े और संभागायुक्त डोमन सिंह मौजूद रहे।
चर्चा में जगदलपुर और कोंडागांव जिलों के प्रतिनिधियों के साथ राजनीतिक दलों, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों, शिक्षाविदों और विभिन्न आयोगों तथा निगमों के पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया।
बैठक में चार प्रमुख विषयों पर विचार-विमर्श किया गया:
1. विवाह और तलाक: विवाह से जुड़े नियमों, वैवाहिक अधिकारों और अलगाव की स्थिति में दोनों पक्षों के हितों की सुरक्षा जैसे सवाल इस विषय के महत्वपूर्ण पहलू हैं।
2. उत्तराधिकार और विरासत: संपत्ति के बंटवारे, उत्तराधिकार के अधिकारों और परिवार के विभिन्न सदस्यों के हितों से जुड़े प्रावधानों पर चर्चा का विशेष महत्व है।
3. भरण-पोषण और सहायता: विवाह टूटने या पारिवारिक संबंधों में बदलाव के बाद आर्थिक रूप से निर्भर व्यक्ति की सहायता कैसे सुनिश्चित हो, यह एक अहम कानूनी और सामाजिक प्रश्न है।
4. लिव-इन संबंध: ऐसे संबंधों में रहने वाले लोगों के अधिकारों, जिम्मेदारियों और कानूनी सुरक्षा का निर्धारण प्रस्तावित व्यवस्था के लिए एक संवेदनशील विषय हो सकता है।
हालांकि, बैठक में इन मुद्दों पर चर्चा होने का अर्थ यह नहीं है कि इनके संबंध में अंतिम नियम तय कर दिए गए हैं। फिलहाल प्रक्रिया का उद्देश्य सुझावों के आधार पर प्रारूप तैयार करना है।
UCC का प्रारूप तैयार करने में जनता की राय क्यों अहम?
समान नागरिक संहिता पर किसी भी राज्य में कानून बनाने की प्रक्रिया केवल कानूनी प्रावधानों को एक दस्तावेज में समेटने तक सीमित नहीं हो सकती। इसकी सफलता इस बात पर भी निर्भर करती है कि प्रस्तावित नियम समाज की वास्तविक परिस्थितियों, पारिवारिक परंपराओं और नागरिकों की जरूरतों को किस हद तक समझते हैं।
छत्तीसगढ़ के संदर्भ में यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बस्तर क्षेत्र में अलग-अलग सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराएं मौजूद हैं। ऐसे में स्थानीय समुदायों की बात सुने बिना तैयार किया गया प्रारूप व्यावहारिक चुनौतियों का सामना कर सकता है।
समिति के सामने सबसे बड़ी चुनौती समानता और सामाजिक विविधता के बीच संतुलन बनाने की होगी। एक ओर नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा और कानून के समान अनुप्रयोग का प्रश्न है, तो दूसरी ओर मौजूदा कानूनी व्यवस्थाओं, संवैधानिक संरक्षण और विभिन्न समुदायों की विशिष्ट परिस्थितियों को समझना भी आवश्यक है।
विशेष रूप से अनुसूचित जनजातियों से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों और प्रथागत व्यवस्थाओं पर विचार करना महत्वपूर्ण होगा। किसी भी प्रस्तावित व्यवस्था के प्रभाव का आकलन करते समय संबंधित संवैधानिक प्रावधानों तथा लागू कानूनों की सावधानीपूर्वक जांच जरूरी होगी।
महिलाओं के अधिकार और संपत्ति में हिस्सेदारी पर रहेगा ध्यान
समान नागरिक संहिता से जुड़ी बहस में महिलाओं के अधिकार एक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। विवाह, तलाक, भरण-पोषण और विरासत जैसे विषय सीधे तौर पर महिलाओं की कानूनी स्थिति और आर्थिक स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकते हैं।
यदि प्रस्तावित नियम अधिकारों की स्पष्टता, निष्पक्ष प्रक्रिया और प्रभावी कानूनी सहायता सुनिश्चित करते हैं, तो इससे पारिवारिक विवादों में न्याय पाने की प्रक्रिया बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि अंतिम प्रावधान क्या होंगे और उन्हें जमीन पर किस तरह लागू किया जाएगा।
इसी तरह, पुरुषों, बच्चों, बुजुर्गों और आर्थिक रूप से निर्भर परिवार के सदस्यों के अधिकारों को भी स्पष्ट रूप से परिभाषित करना आवश्यक होगा। एक प्रभावी कानूनी ढांचे में अधिकारों के साथ-साथ जिम्मेदारियों और विवादों के समाधान की प्रक्रिया भी स्पष्ट होनी चाहिए।
30 अक्टूबर तक दे सकते हैं अपने सुझाव
समिति ने प्रस्तावित समान नागरिक संहिता के प्रारूप के लिए आम नागरिकों और संगठनों से सुझाव आमंत्रित किए हैं। इच्छुक व्यक्ति और संस्थाएं 30 अक्टूबर 2026 तक अपने विचार प्रस्तुत कर सकते हैं।
बैठक की कार्यवाही का दस्तावेजीकरण किया गया और वीडियोग्राफी तथा फोटोग्राफी की व्यवस्था भी की गई, ताकि प्राप्त विचारों और सुझावों को राज्य स्तर पर तैयार होने वाले प्रारूप में शामिल करने की प्रक्रिया में इस्तेमाल किया जा सके।
सुझाव देने के लिए समिति कार्यालय का पता नवीन सर्किट हाउस, सिविल लाइन्स, रायपुर निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त, समिति ने डिजिटल माध्यम से सुझाव प्राप्त करने के लिए वेब पोर्टल और ईमेल की व्यवस्था भी जारी की है। नागरिकों को संबंधित माध्यमों के आधिकारिक विवरण के जरिए अपने सुझाव भेजने चाहिए।
आगे क्या होगा?
जगदलपुर में हुई बैठक को छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता तैयार करने की प्रक्रिया के एक महत्वपूर्ण चरण के रूप में देखा जा सकता है। अब यह देखना अहम होगा कि अलग-अलग क्षेत्रों और सामाजिक समूहों से मिले सुझावों का मूल्यांकन किस तरह किया जाता है और अंतिम प्रारूप में उन्हें कितनी जगह मिलती है।
प्रारूप तैयार करते समय कानूनी स्पष्टता, संवैधानिक वैधता, सामाजिक स्वीकार्यता और लागू करने की व्यावहारिक क्षमता पर विशेष ध्यान देना होगा। इसके साथ ही यह भी जरूरी होगा कि नागरिकों को प्रस्तावित नियमों के संभावित प्रभावों की स्पष्ट जानकारी मिले।
फिलहाल छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता को लेकर चर्चा और सुझाव जुटाने की प्रक्रिया जारी है। अंतिम प्रावधानों, उनके दायरे और लागू होने की समयसीमा को लेकर अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। आने वाले समय में समिति की सिफारिशें इस पहल की दिशा और प्रभाव को स्पष्ट करेंगी।




