छत्तीसगढ़ के दक्षिण बस्तर क्षेत्र में माओवादियों की ओर से एक और पत्र सामने आया है, जिसमें उन्होंने हाल ही में हुई हत्या को “मुखबिर की सूचना पर की गई कार्रवाई” बताया है। इस पत्र में माओवादी संगठन ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनके इरादों और काम करने की पद्धति पर सवाल खड़े किए हैं।
माओवादी संगठन द्वारा जारी कथित पर्चे में लिखा है कि मृतक व्यक्ति पुलिस का मुखबिर था और संगठन ने “जन अदालत” के फैसले के बाद उसे दंडित किया। पत्र में पुलिस पर यह भी आरोप लगाया गया है कि वे ग्रामीणों को डराने, मनमानी गिरफ्तारी करने और निर्दोषों को मुखबिर बताकर फंसाने की कोशिश करते हैं।इस घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। लोगों का कहना है कि बार-बार आने वाले माओवादी पत्र और चेतावनियों से गांवों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
उधर, पुलिस अधिकारियों ने माओवादी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। उनका कहना है कि माओवादी संगठन ग्रामीणों में डर फैलाने और अपने खोते जनसमर्थन को बनाए रखने के लिए ऐसे पत्र जारी करता है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि हिंसा और हत्या को किसी भी प्रकार की वैचारिक ढाल से जायज़ नहीं ठहराया जा सकता।
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अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र में सुरक्षा बलों की गतिविधियां और सर्च ऑपरेशन तेज किए गए हैं, ताकि आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।


