बिहार में इस साल का छठ महापर्व, जो श्रद्धा, आस्था और उमंग का प्रतीक माना जाता है, एक भयावह हादसे से गमगीन हो गया। जहां एक ओर लाखों श्रद्धालु भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित कर पूजा में लीन थे, वहीं दूसरी ओर कई जगहों से मौत की दर्दनाक खबरों ने पूरे राज्य को झकझोर दिया। राजधानी पटना में 9 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि पूरे बिहार में कुल 83 लोगों ने अपनी जान गंवाई है। इन मौतों में डूबने, करंट लगने, और भीड़भाड़ में भगदड़ जैसी घटनाएं शामिल हैं।
पटना में दर्दनाक घटनाओं की श्रृंखला
पटना के विभिन्न घाटों — जैसे कंकड़बाग, दीघा, और गंगा घाट — पर छठ पूजा के दौरान अफरातफरी मच गई। कई जगह श्रद्धालुओं के नदी में फिसल जाने से डूबने की घटनाएं सामने आईं। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजामों का दावा किया गया था, लेकिन मौके पर स्थिति इसके उलट दिखाई दी l पटना जिला प्रशासन के अनुसार, 9 लोगों की मौत में से 6 लोगों की जान डूबने से गई, जबकि 3 अन्य की मौत करंट लगने और भगदड़ जैसी वजहों से हुई
राज्यभर में मौत का आंकड़ा 83 तक पहुंचा
बिहार के भागलपुर, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सारण, और समस्तीपुर जिलों में भी हादसों की खबरें आईं। भागलपुर में 7 लोग डूब गए जब वे अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दे रहे थे। वैशाली और सारण में बिजली के तारों के संपर्क में आने से 10 से अधिक लोगों की मौत हो गई। वहीं, मुजफ्फरपुर और दरभंगा में नदी किनारे हुए हादसों में कई बच्चे और महिलाएं असमय काल के गाल में समा गए। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने बताया कि अब तक 83 मौतों की पुष्टि हो चुकी है और मृतकों के परिजनों को सरकारी सहायता राशि ₹4 लाख देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
प्रशासन पर उठे सवाल
इन घटनाओं ने एक बार फिर बिहार प्रशासन की सुरक्षा तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि घाटों पर भीड़ का अनुमान पहले से था, फिर भी पर्याप्त सुरक्षा बल, रोशनी और चेतावनी संकेत नहीं लगाए गए। कई जगह पर फिसलन भरे घाट, खुले बिजली के तार, और भीड़ नियंत्रण की कमी ने हादसों को न्योता दिया।
पटना के दीघा निवासी एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा —
“हर साल छठ पर प्रशासन वादे करता है, लेकिन हालात नहीं बदलते। अगर घाटों पर सुरक्षा और व्यवस्था होती, तो इतने लोगों की जान नहीं जाती।”
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जताया शोक
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हादसों पर गहरा शोक व्यक्त किया है और मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई है। उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिया है कि सभी पीड़ित परिवारों को शीघ्र आर्थिक सहायता दी जाए और हादसों की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। सीएम ने यह भी कहा कि आने वाले वर्षों में इस तरह की त्रासदी से बचने के लिए छठ घाटों पर तकनीकी सुरक्षा मानक और निगरानी व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाएगा।
श्रद्धा और सुरक्षा का संतुलन जरूरी
छठ महापर्व बिहार की पहचान और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है। यह पर्व हर वर्ष लाखों लोगों को जोड़ता है, लेकिन लगातार होने वाले हादसे इस बात की चेतावनी हैं कि श्रद्धा के साथ सुरक्षा को भी समान प्राथमिकता दी जाए। यदि प्रशासन और श्रद्धालु मिलकर नियमों का पालन करें, तो इस तरह के दर्दनाक हादसों को टाला जा सकता है।


