चंपारण्य में बनेगा श्री वल्लभाचार्य स्टैच्यू कॉम्प्लेक्स, केंद्र से ₹73.42 करोड़ की मंजूरी
रायपुर, 22 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ के धार्मिक पर्यटन को नई दिशा देने वाली एक बड़ी परियोजना को केंद्र सरकार की मंजूरी मिल गई है। रायपुर जिले के चंपारण्य में ₹73.42 करोड़ की लागत से श्री वल्लभाचार्य स्टैच्यू कॉम्प्लेक्स विकसित किया जाएगा। पर्यटन मंत्रालय की केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति (CSMC) ने परियोजना को मंजूरी दी है। इसका क्रियान्वयन छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड करेगा और प्रस्तावित कार्य अवधि 18 महीने रखी गई है।
यह परियोजना केवल एक प्रतिमा या परिसर के निर्माण तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य चंपारण्य को ऐसे समग्र पर्यटन गंतव्य में विकसित करना है, जहां श्रद्धालुओं के साथ-साथ सांस्कृतिक पर्यटक, विद्यार्थी, शोधार्थी और वेलनेस पर्यटन में रुचि रखने वाले लोग भी अधिक समय बिता सकें।
तीर्थ स्थल से आगे बढ़ेगा चंपारण्य का पर्यटन मॉडल
चंपारण्य को श्री वल्लभाचार्य जी की जन्मस्थली के रूप में विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व प्राप्त है। वर्ष 2025 में भी स्वदेश दर्शन 2.0 के तहत यहां परिसर के विकास, प्रतिमा, संग्रहालय, कन्वेंशन सेंटर, पार्किंग और अन्य सुविधाओं का प्रस्ताव केंद्र के समक्ष रखा गया था।
अब ₹73.42 करोड़ की स्वीकृति के साथ परियोजना के क्रियान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण औपचारिक कदम आगे बढ़ा है।
पर्यटन की दृष्टि से इसकी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि चंपारण्य को केवल दर्शन करके लौटने वाले तीर्थ स्थल के बजाय आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, विरासत, शिक्षा और अनुभव-आधारित पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है।
15 एकड़ में विकसित होगा आधुनिक पर्यटन परिसर
प्रस्तावित कॉम्प्लेक्स करीब 15 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। यहां धार्मिक विरासत को आधुनिक पर्यटक सुविधाओं के साथ जोड़ा जाएगा।
परियोजना में प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- श्री वल्लभाचार्य जी की प्रतिमा और स्टैच्यू कॉम्प्लेक्स
- म्यूजियम एवं इंटरप्रिटेशन सेंटर
- कथा ग्राउंड
- ओपन एयर थिएटर
- वेलनेस एवं मेडिटेशन सुविधाएं
- श्रद्धालुओं के लिए आवास और डॉरमेटरी
- मल्टीपर्पज हॉल
- रेस्टोरेंट
- स्थानीय वेंडर शॉप्स
- यज्ञ कुंड एवं जल कुंड का उन्नयन
- तालाब विकास
- दिव्य एवं कवर्ड पाथवे
- पार्किंग
- साइनेज और लैंडस्केपिंग
इस तरह की सुविधाओं का उद्देश्य पर्यटक के लिए केवल धार्मिक दर्शन को केंद्र में रखने के बजाय पूरे परिसर में एक व्यवस्थित और लंबे अनुभव का निर्माण करना है।
पर्यटकों का ठहराव बढ़ाना होगा परियोजना का अहम लक्ष्य
किसी धार्मिक स्थल को बड़े पर्यटन केंद्र में बदलने के लिए केवल सुंदरता बढ़ाना पर्याप्त नहीं होता। वहां पहुंच, जानकारी, ठहरने, भोजन, स्वच्छता, मनोरंजन और स्थानीय गतिविधियों जैसी सुविधाओं का एक साथ विकसित होना जरूरी है।
चंपारण्य परियोजना की योजना भी इसी दृष्टिकोण पर आधारित दिखाई देती है। सामान्य पर्यटकों के लिए आधे दिन से पूरे दिन तक के प्रवास की संभावनाओं को ध्यान में रखा गया है, जबकि धार्मिक आयोजनों और वेलनेस गतिविधियों के दौरान अधिक समय तक रुकने की सुविधा विकसित करने की योजना है।
इसका सीधा असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। पर्यटकों की संख्या और ठहराव बढ़ने पर परिवहन, भोजन, आवास, स्थानीय उत्पादों, धार्मिक सामग्री, हस्तशिल्प और छोटी दुकानों से जुड़े कारोबारों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
स्थानीय रोजगार और कारोबार को मिल सकता है नया आधार
परियोजना में वेंडर शॉप्स, रेस्टोरेंट और अन्य सुविधाओं का प्रावधान स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों के विस्तार की संभावना को बढ़ाता है। इससे स्थानीय लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बन सकते हैं।
हालांकि इसका वास्तविक आर्थिक प्रभाव परियोजना पूरी होने के बाद पर्यटकों की संख्या, उनके ठहराव और स्थानीय कारोबारों की भागीदारी पर निर्भर करेगा। केवल निर्माण पूरा होना पर्याप्त नहीं होगा; परिसर के संचालन, रखरखाव और स्थानीय व्यवसायों को व्यवस्थित तरीके से जोड़ना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा।
श्री वल्लभाचार्य के जीवन और दर्शन को समझने का मिलेगा अवसर
प्रस्तावित म्यूजियम और इंटरप्रिटेशन सेंटर परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। इसके माध्यम से चंपारण्य आने वाले लोगों को श्री वल्लभाचार्य जी के जीवन, दर्शन और विरासत से परिचित कराने की योजना है।
यह सुविधा विशेष रूप से उन पर्यटकों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है जो धार्मिक यात्रा के साथ उस स्थान के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संदर्भ को भी समझना चाहते हैं।
इसी वजह से परियोजना को केवल धार्मिक पर्यटन की बजाय विरासत और ज्ञान-आधारित पर्यटन से जोड़ने की कोशिश के रूप में भी देखा जा सकता है।
डीपीआर तैयार, अब निविदा प्रक्रिया की तैयारी
परियोजना की डीपीआर और कार्य-सीमा तैयार होने की जानकारी दी गई है। स्वीकृति के बाद निविदा प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है। परियोजना के लिए 18 महीने की प्रस्तावित कार्यान्वयन अवधि निर्धारित की गई है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि चंपारण्य की धार्मिक गरिमा और स्वरूप को बनाए रखते हुए श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए उच्च गुणवत्ता की सुविधाएं विकसित करना प्राथमिकता होगी। छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष नीलू शर्मा ने भी इसे राज्य के आध्यात्मिक पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।
चंपारण्य के लिए आगे की चुनौती केवल निर्माण नहीं
₹73.42 करोड़ की परियोजना स्वीकृति के बाद अब असली चुनौती इसके प्रभावी क्रियान्वयन की होगी। धार्मिक स्थलों के विकास में आधुनिक सुविधाओं और मूल आध्यात्मिक वातावरण के बीच संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण रहता है।



