भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ सरकार की कई योजनाओं में गंभीर खामियों और वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही, नियमों की अनदेखी और धन के उपयोग में पारदर्शिता की कमी सामने आई है, जिससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है।
CAG ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि कई विभागों में निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया और बिना उचित मंजूरी के खर्च किए गए। कुछ मामलों में लाभार्थियों के चयन में गड़बड़ियां पाई गईं, जबकि कई परियोजनाएं तय समय पर पूरी नहीं हो सकीं, जिससे उनकी लागत में भी वृद्धि हुई। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि प्रभावी निगरानी तंत्र के अभाव में योजनाओं का अपेक्षित लाभ आम जनता तक नहीं पहुंच पाया।
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इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। विपक्ष ने सरकार पर भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के आरोप लगाए हैं, वहीं सत्तापक्ष का कहना है कि रिपोर्ट में उठाए गए बिंदुओं की समीक्षा कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। CAG की इस रिपोर्ट को छत्तीसगढ़ में वित्तीय अनुशासन और प्रशासनिक सुधार के लिए अहम माना जा रहा है।



