ब्रिटेन की सरकार ने इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के लिए एक बड़ा बदलाव किया है। अब छात्रों को पढ़ाई पूरी करने के बाद ‘ग्रेजुएट रूट वीजा’ (Graduate Route Visa) के तहत यूके में पहले की तरह 2 साल नहीं, बल्कि सिर्फ 18 महीने रहने और काम करने की अनुमति मिलेगी। यह फैसला ब्रिटेन के इमिग्रेशन सिस्टम में सुधार की दिशा में उठाए गए कदमों का हिस्सा बताया जा रहा है।
क्या है ‘ग्रेजुएट रूट वीजा’?
‘ग्रेजुएट रूट वीजा’ ब्रिटेन में पढ़ाई पूरी करने वाले इंटरनेशनल छात्रों को डिग्री के बाद देश में रहकर काम करने या नौकरी तलाशने की अनुमति देता है।
पहले इस वीजा की अवधि 2 साल (24 महीने) थी, जबकि PhD छात्रों के लिए यह अवधि 3 साल (36 महीने) तक रहती थी।
अब क्या बदला है?
ब्रिटिश सरकार ने अब इस अवधि को घटाकर 18 महीने करने का प्रस्ताव रखा है। यानी अब छात्र अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद केवल डेढ़ साल तक ही ब्रिटेन में रहकर नौकरी तलाश पाएंगे।
यह बदलाव 2026 से लागू हो सकता है, हालांकि इसकी औपचारिक पुष्टि अभी बाकी है।
सरकार का तर्क
यूके सरकार का कहना है कि यह कदम इमिग्रेशन सिस्टम को संतुलित करने और लोकल रोजगार बाजार की प्राथमिकता बढ़ाने के लिए उठाया जा रहा है। हाल के वर्षों में ब्रिटेन में स्टूडेंट वीजा के ज़रिए आने वाले लोगों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है, जिससे सरकार अब इस पर नियंत्रण चाहती है।
छात्रों में चिंता
दूसरी ओर, इंटरनेशनल स्टूडेंट्स और विश्वविद्यालयों ने इस कदम पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि वीजा अवधि घटने से विदेशी छात्रों की नौकरी पाने की संभावनाएं कम हो जाएंगी, जिससे यूके की उच्च शिक्षा प्रणाली की आकर्षण शक्ति घट सकती है।
भारत पर असर
ब्रिटेन में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों में भारतीयों की संख्या सबसे ज्यादा है। ऐसे में यह बदलाव भारतीय छात्रों पर सीधा असर डाल सकता है, क्योंकि वे ग्रेजुएशन या पोस्ट-ग्रेजुएशन के बाद अब कम समय के लिए ही ब्रिटेन में नौकरी तलाश पाएंगे।


