SIR के बीच BLO App में जुड़ा ‘Mark VIP’ फीचर, जानिए क्यों चर्चा में आया चुनाव आयोग का नया अपडेट
नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के बीच चुनाव आयोग के अधिकारियों के लिए इस्तेमाल होने वाले BLO App में ‘Mark VIP’ नाम का नया फीचर जोड़े जाने की जानकारी सामने आई है। Hindustan Times की रिपोर्ट के मुताबिक ऐप को 30 जुलाई को अपडेट किया गया था और Apple App Store पर अगले दिन अपडेट का विवरण “mark VIP elector related changes” के रूप में दर्ज हुआ।
यह अपडेट ऐसे समय सामने आया है जब दिल्ली समेत कई राज्यों में SIR की प्रक्रिया चल रही है और मतदाता सूची में नाम, दस्तावेज तथा विसंगतियों की जांच को लेकर सार्वजनिक चर्चा तेज है। इसलिए इस फीचर का सामने आना महज तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया में डेटा प्रबंधन और अलग-अलग श्रेणी के मतदाताओं की पहचान कैसे की जाती है, इस सवाल से भी जुड़ गया है।
‘Mark VIP’ आखिर करता क्या है?
रिपोर्ट के अनुसार BLO यानी Booth Level Officer घर-घर सत्यापन के दौरान किसी मतदाता को इस मॉड्यूल के जरिए VIP के तौर पर चिन्हित कर सकता है। इसके बाद संबंधित रिकॉर्ड को वरिष्ठ चुनाव अधिकारियों के स्तर पर सत्यापन के लिए भेजे जाने की व्यवस्था बताई गई है। दिल्ली के एक वरिष्ठ जिला अधिकारी ने इसे एक तरह की consolidation exercise बताया है, जिसमें BLO की पहचान के बाद AERO और ERO स्तर पर जांच तथा आगे CEO कार्यालय की प्रक्रिया शामिल होती है।
हालांकि यहां ‘VIP’ शब्द को केवल राजनीतिक प्रभाव वाले लोगों तक सीमित समझना सही नहीं होगा। चुनाव आयोग के 2023 Manual on Electoral Rolls में “marked electors” की व्यवस्था का उल्लेख है। इसमें सांसद, विधायक और विधान परिषद सदस्य, घोषित पदों पर बैठे व्यक्ति तथा कला, संस्कृति, पत्रकारिता और खेल जैसे क्षेत्रों की कुछ प्रमुख हस्तियों के साथ न्यायपालिका और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े लोगों को भी शामिल किया गया है।
यह व्यवस्था नई है या पहले से मौजूद थी?
यही इस पूरे मामले का महत्वपूर्ण पहलू है।
रिपोर्ट के मुताबिक कुछ श्रेणी के मतदाताओं को चिन्हित करने की व्यवस्था चुनाव संबंधी नियमों और मैनुअल में पहले से मौजूद रही है। दिल्ली के अधिकारियों के अनुसार राजधानी में ऐसे मतदाताओं की सूची करीब 3,000 लोगों की है। लेकिन BLO App में ‘Mark VIP’ नाम से डिजिटल फीचर का इस्तेमाल हाल में शुरू होने की बात सामने आई है।
पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान काम कर चुके BLO से बात करने पर रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि वहां नवंबर 2025 में शुरू हुई SIR प्रक्रिया के समय यह मॉड्यूल मौजूद नहीं था और बाद में जोड़ा गया। दिल्ली और हरियाणा के कुछ BLO ने इसके ऐप में उपलब्ध होने की पुष्टि की।
इस अंतर को समझना जरूरी है—VIP/marked elector की प्रशासनिक अवधारणा पुरानी हो सकती है, लेकिन उसे BLO के डिजिटल ऐप में अलग से चिह्नित करने वाला फीचर नया बताया जा रहा है।
VIP मतदाता को क्या अलग सुविधा मिलती है?
उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार ऐसे मतदाताओं को प्रक्रिया में सुविधा देने के लिए उनकी पहचान की जाती है। अधिकारियों ने बताया कि BLO को पहले से भी अलग-अलग आयु वर्ग या VIP मतदाताओं की सूचियां दी जाती रही हैं, ताकि चुनावी प्रक्रिया के दौरान उन्हें सुविधा दी जा सके।
2023 के चुनावी रोल मैनुअल में marked electors के संबंध में यह व्यवस्था बताई गई है कि ऐसे मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट रोल में सुनिश्चित किए जाएं ताकि दावे और आपत्तियों की अवधि में जरूरी दस्तावेज हासिल किए जा सकें। इसका अर्थ यह नहीं है कि उन्हें चुनावी सत्यापन या आपत्ति प्रक्रिया से पूर्ण छूट मिल जाती है।
यही अंतर इस मामले में बेहद महत्वपूर्ण है—सुविधा और छूट एक ही चीज नहीं हैं।
फिर विवाद क्यों उठा?
‘Mark VIP’ फीचर ऐसे समय चर्चा में आया है जब दिल्ली में कुछ चर्चित लोगों को SIR के दौरान logical discrepancy से संबंधित नोटिस मिलने की खबरें सामने आई हैं। इनमें दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपप्रधानमंत्री एलके आडवाणी, विदेश मंत्री एस जयशंकर और चुनाव आयुक्त एसएस संधू जैसे नामों का उल्लेख हुआ है।
दूसरी ओर, रिपोर्ट में चुनाव अधिकारियों का पक्ष भी सामने आया है कि VIP या marked elector होने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति का नाम बिना जांच के मतदाता सूची में कायम रहेगा। नोटिस दिए जा सकते हैं और रिकॉर्ड का सत्यापन आवश्यक रहता है।
यानी असली सवाल यह नहीं है कि किसी व्यक्ति को VIP के रूप में चिह्नित किया गया या नहीं, बल्कि यह है कि उस फ्लैग के बाद प्रक्रिया क्या रहती है और क्या समान चुनावी मानकों के तहत अंतिम निर्णय होता है।
आम मतदाता के लिए इसका क्या मतलब है?
SIR की पूरी प्रक्रिया का मूल उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना, पात्र मतदाताओं को शामिल करना और गलत या संदिग्ध प्रविष्टियों की जांच करना है। चुनाव आयोग के नागरिक पोर्टल पर SIR-2026 के लिए नाम खोजने, मतदाता सूची डाउनलोड करने, आवेदन की स्थिति देखने और शिकायत दर्ज करने जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
इसलिए आम मतदाता के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वह अपनी मतदाता सूची में प्रविष्टि की स्थिति जांचे, जरूरत पड़ने पर संबंधित दस्तावेज उपलब्ध रखे और किसी नोटिस या आपत्ति की स्थिति में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करे।
दिल्ली में SIR को लेकर आम मतदाताओं की परेशानियों की रिपोर्टिंग भी सामने आई है। Hindustan Times ने ऐसे लोगों की स्थिति रिपोर्ट की है जिन्हें विसंगतियों के कारण कई बार BLO या संबंधित प्रक्रिया से गुजरना पड़ा।
आगे सबसे महत्वपूर्ण होगी पारदर्शिता
BLO App में किसी मतदाता को ‘VIP’ के रूप में चिन्हित करने की डिजिटल व्यवस्था अपने आप में चुनाव परिणाम तय नहीं करती। लेकिन डिजिटल रिकॉर्ड में किसी व्यक्ति को अलग श्रेणी में चिह्नित करने की प्रक्रिया जितनी स्पष्ट होगी, उतना ही जरूरी होगा कि उसके मानदंड, सत्यापन की श्रृंखला और अंतिम निर्णय की प्रक्रिया भी स्पष्ट रहे।
इस मामले में Hindustan Times ने ECI से फीचर की शुरुआत और इसके अधिकारिक आधार को लेकर प्रतिक्रिया मांगी थी, लेकिन रिपोर्ट प्रकाशित होने तक आयोग की ओर से जवाब नहीं मिला था। इसलिए फीचर के पीछे आयोग की विस्तृत आधिकारिक व्याख्या को अभी अंतिम रूप से स्थापित तथ्य के तौर पर पेश करना उचित नहीं होगा।



