रायपुर: पवित्र रमजान माह की शुरुआत 19 फरवरी से हो चुकी है। मुस्लिम समुदाय के लिए यह महीना इबादत, संयम और आत्म-अनुशासन का विशेष समय होता है। इस दौरान रोजेदार सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोजा रखते हैं और अल्लाह की इबादत में समय बिताते हैं। शाम को इफ्तार के साथ रोजा खोला जाता है, जबकि रात में विशेष नमाज ‘तरावीह’ अदा की जाती है, जिसमें पवित्र कुरान का पाठ किया जाता है।
रमजान के महत्व को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के सभी शासकीय मुस्लिम अधिकारियों और कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। सरकार ने आदेश जारी कर उन्हें कार्यालय समय समाप्त होने से एक घंटा पहले कार्यमुक्त होने की अनुमति प्रदान की है। इस निर्णय का उद्देश्य रोजा रख रहे कर्मचारियों को इबादत, इफ्तार की तैयारी और परिवार के साथ समय बिताने के लिए अतिरिक्त सुविधा उपलब्ध कराना है।
सरकार के इस फैसले का मुस्लिम समाज में स्वागत किया जा रहा है। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि रमजान के दौरान पूरे दिन रोजा रखने के कारण कर्मचारियों को शारीरिक और मानसिक रूप से अतिरिक्त अनुशासन का पालन करना पड़ता है। ऐसे में कार्य समय में एक घंटे की छूट मिलने से उन्हें धार्मिक कर्तव्यों को निभाने में आसानी होगी।
इस निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए समाजसेवी डॉ. सलीम राज ने इसे सराहनीय पहल बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में सभी धर्मों और समुदायों की भावनाओं का सम्मान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह कदम सामाजिक सद्भाव, धार्मिक सहिष्णुता और आपसी सम्मान का प्रतीक है।
डॉ. सलीम ने आगे कहा कि राज्य सरकार का यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के मूल मंत्र की भावना को भी दर्शाता है। उन्होंने प्रदेश सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस फैसले से रोजेदार कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी और वे अपने धार्मिक कर्तव्यों को बेहतर तरीके से निभा सकेंगे।
राज्य सरकार के इस फैसले को धार्मिक संवेदनशीलता और समावेशी प्रशासन की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। इससे न केवल कर्मचारियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि समाज में आपसी भाईचारे और सौहार्द को भी बढ़ावा मिलेगा।


