बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के शिक्षकों पर अब पढ़ाई के साथ एक नई जिम्मेदारी और बढ़ गई है। पहले स्कूल परिसर में आवारा कुत्तों और मवेशियों को रोकने का आदेश जारी हुआ था, अब शिक्षकों को सांप-बिच्छू जैसे जहरीले जीव-जंतुओं पर भी नजर रखनी होगी। यह आदेश बिलासपुर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) द्वारा जारी किया गया है, जिसके बाद शिक्षकों और प्राचार्यों में नाराजगी देखने को मिल रही है।
जिला शिक्षा अधिकारी का नया आदेश
8 दिसंबर को जारी आदेश में लिखा गया है कि सरकारी और निजी स्कूलों के प्राचार्य यह सुनिश्चित करें कि स्कूल परिसर में कोई भी आवारा जीव-जंतु या सांप-बिच्छू जैसे जहरीले जीव प्रवेश न कर सकें। आदेश के अनुसार, स्कूल स्टाफ को इस दिशा में आवश्यक कार्रवाई करनी होगी। लेटर में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का भी हवाला दिया गया है।
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शिक्षकों में नाराजगी, विरोध भी शुरू
टीचर्स एसोसिएशन ने इस आदेश को अव्यावहारिक और शिक्षकों की सुरक्षा के लिए जोखिमपूर्ण बताया है। उनका कहना है कि सांप-बिच्छू जैसे खतरनाक जीवों से न सिर्फ बच्चों को, बल्कि शिक्षकों को भी खतरा है। ऐसे में उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा—इसको लेकर चिंता जताई जा रही है। प्राचार्यों और हेडमास्टर्स ने आदेश को “बेतुका” बताते हुए कहा कि शिक्षकों को पढ़ाई, प्रशासनिक कामों और अब ऐसी निगरानी में उलझाया जा रहा है, जो उनकी भूमिका से बाहर है।
पहले भी आया था विवादित आदेश
कुछ समय पहले स्कूलों में आवारा कुत्तों की गिनती और रोकथाम करने का आदेश जारी किया गया था, जिसके बाद यह नया निर्देश सामने आया है। अब शिक्षकों को स्कूल परिसर में कुत्ते, मवेशी और जहरीले जीव-जंतुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की जिम्मेदारी उठानी होगी। शिक्षकों का कहना है कि स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्थाओं को मजबूत करना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है, जबकि इसका बोझ लगातार शिक्षकों पर डाला जा रहा है।


