बिहार की राजनीति में एक बार फिर से हलचल मच गई है। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की नेत्री श्वेता यादव और राष्ट्रीय लोक जनता पार्टी (RLJP) के नेता राकेश सिंह ने पटना हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है। दोनों नेताओं ने चुनाव आयोग और राज्य सरकार के कुछ निर्णयों को चुनौती देते हुए वोटिंग से पहले याचिका दायर की है। इस कदम ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है, क्योंकि चुनावी माहौल पहले से ही गर्म है।
क्या है पूरी याचिका का मामला?
सूत्रों के अनुसार, श्वेता यादव और राकेश सिंह ने अपनी याचिका में यह आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग द्वारा जारी कुछ दिशा-निर्देश और बूथ पुनर्संरचना में पारदर्शिता की कमी है। उनका कहना है कि कुछ विधानसभा क्षेत्रों में बूथों की सीमांकन प्रक्रिया और मतदाता सूची में अनियमितताएँ देखी जा रही हैं, जो निष्पक्ष चुनाव की भावना के खिलाफ हैं।
याचिका में यह भी दावा किया गया है कि प्रशासनिक स्तर पर कुछ अधिकारियों द्वारा पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है, जिससे मतदाताओं के अधिकारों पर असर पड़ सकता है। दोनों नेताओं ने अदालत से मांग की है कि चुनाव आयोग को निर्देश दिया जाए कि वह सभी मतदान केंद्रों और बूथों की पुनः जांच और सत्यापन कराए।
श्वेता यादव ने क्या कहा?
RJD की युवा नेत्री श्वेता यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा, “हम लोकतंत्र में विश्वास करते हैं, लेकिन अगर चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठने लगें तो जनता का भरोसा डगमगा सकता है। हमने सिर्फ न्याय और पारदर्शिता की मांग की है। हमारा उद्देश्य किसी पार्टी या उम्मीदवार को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है।” श्वेता ने यह भी जोड़ा कि अगर हाई कोर्ट इस मुद्दे पर जल्द सुनवाई करता है, तो राज्य में साफ-सुथरा मतदान माहौल बनेगा।
RLJP नेता राकेश सिंह का बयान
दूसरी ओर, RLJP के नेता राकेश सिंह ने भी कहा कि यह याचिका किसी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा नहीं है, बल्कि जनहित की याचिका (PIL) है। उन्होंने कहा, “हमने कई जगहों पर मतदाता सूची में गड़बड़ी पाई है। कई ऐसे नाम हटाए गए हैं जो वास्तविक मतदाता हैं। ऐसे में हमारा कर्तव्य है कि हम लोकतंत्र की रक्षा के लिए कानूनी कदम उठाएं।”
हाई कोर्ट में क्या हुआ?
पटना हाई कोर्ट ने दोनों याचिकाओं को स्वीकार कर लिया है और चुनाव आयोग से जवाब तलब किया है। अदालत ने अगले सप्ताह तक रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा है कि अगर याचिकाओं में लगाए गए आरोपों में सच्चाई पाई गई, तो आयोग को तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने होंगे।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस घटनाक्रम के बाद बिहार की राजनीति में बयानों का दौर शुरू हो गया है। RJD नेताओं ने कहा कि यह कदम लोकतंत्र की रक्षा के लिए जरूरी था। वहीं JDU और BJP नेताओं ने इसे “चुनावी स्टंट” बताया और कहा कि विपक्ष को हार का डर सता रहा है, इसलिए अदालत का सहारा लिया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला अब सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि चुनावी रणनीति का हिस्सा बन गया है। अगर हाई कोर्ट इस मामले में कोई बड़ा आदेश देता है, तो इसका असर वोटिंग पैटर्न पर भी पड़ सकता है।


