आरजेडी के कद्दावर नेता तेज प्रताप यादव के लिए यह चुनावी मौसम कुछ खास नहीं दिख रहा, क्योंकि उनके ही निर्वाचन क्षेत्र से जुड़े जेजेडी (JJD) प्रत्याशी ने अचानक वीआईपी पार्टी के सुप्रीमो मुकेश सहनी से मुलाकात कर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।
यह मुलाकात न केवल राजनीतिक समीकरण बदल सकती है, बल्कि तेज प्रताप यादव की चुनावी रणनीति पर भी गहरा असर डाल सकती है।
तेज प्रताप यादव को क्यों बढ़ी चिंता?
जानकारी के मुताबिक, जेजेडी प्रत्याशी की यह बैठक मुकेश सहनी के पटना स्थित आवास पर हुई, जहां दोनों के बीच करीब आधे घंटे तक बंद कमरे में बातचीत चली। सूत्रों का कहना है कि इस मीटिंग में सीट शेयरिंग, स्थानीय वोट बैंक, और गठबंधन के भविष्य को लेकर चर्चा हुई। तेज प्रताप यादव के समर्थकों का मानना है कि यह कदम उनके वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश हो सकती है। वहीं, राजनीतिक विश्लेषक इसे बिहार चुनाव से पहले एक “रणनीतिक गठजोड़” के रूप में देख रहे हैं।
वीआईपी पार्टी की रणनीति क्या है?
वीआईपी (विकासशील इंसान पार्टी) सुप्रीमो मुकेश सहनी लगातार बिहार के सियासी परिदृश्य में सक्रिय हैं।
उन्होंने हाल ही में बयान दिया था कि,
“इस बार बिहार में वही नेता टिकेगा जो जनता के मुद्दों की बात करेगा, जाति और धर्म की नहीं।” सहनी की यह नीति अब कई छोटे दलों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। ऐसे में जेजेडी प्रत्याशी का उनसे मिलना एक बड़े राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है — खासकर उस वक्त जब बिहार में वोटिंग से पहले गठबंधन की तस्वीरें तेजी से बदल रही हैं।
RJD के अंदर बढ़ी बेचैनी
तेज प्रताप यादव, जो पहले से ही अपने बयान और बगावती तेवरों के लिए चर्चा में रहते हैं, अब इस घटनाक्रम के बाद दबाव में हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, आरजेडी नेतृत्व इस बात को लेकर चिंतित है कि जेजेडी-वीआईपी गठजोड़ से उनके उम्मीदवारों को नुकसान हो सकता है, खासकर उन इलाकों में जहां पिछड़ी जातियों और मछुआरा समुदाय का वोट निर्णायक होता है — जो परंपरागत रूप से वीआईपी पार्टी का प्रभाव क्षेत्र है।
राजनीतिक समीकरणों में बदलाव के संकेत
बिहार चुनाव 2025 में कई नए गठबंधन बनते और टूटते नज़र आ रहे हैं। जहां एक ओर एनडीए, महागठबंधन और जन सुराज जैसे मोर्चे मैदान में हैं, वहीं छोटे दलों की भूमिका “किंगमेकर” बनने की दिशा में बढ़ रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार,
“तेज प्रताप यादव के क्षेत्र में जेजेडी प्रत्याशी का वीआईपी के करीब जाना, आरजेडी के लिए सीधा खतरा हो सकता है। अगर वीआईपी ने वहां अपना उम्मीदवार खड़ा किया या समर्थन दिया, तो वोटों का बंटवारा तय है।”
तेज प्रताप का पलटवार
तेज प्रताप यादव ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा,
“बिहार की जनता समझदार है। कुछ लोग सत्ता के लालच में इधर-उधर जा रहे हैं, लेकिन जनता सच जानती है। हमारा संघर्ष सच्चाई और जनता के अधिकारों के लिए है।” उन्होंने आगे कहा कि आरजेडी का जनाधार अटूट है और ऐसी चालों से पार्टी की स्थिति पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
बिहार की राजनीति में ‘खेला’ का नया अध्याय
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह पूरा मामला बिहार में चुनाव से पहले नई डील और सीट समझौते की दिशा में बढ़ता संकेत है। बड़े दलों के साथ-साथ छोटे दल भी अब अपने वोट बैंक के सहारे बड़ी राजनीतिक कीमत वसूलना चाहते हैं। इस बीच, तेज प्रताप यादव के लिए यह चुनौती दोहरी है — एक ओर गठबंधन की राजनीति, और दूसरी ओर अपने व्यक्तिगत वोट बैंक को संभालने की जद्दोजहद।


