बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में इस बार सबसे बड़ी भूमिका निभाने जा रही हैं महिलाएं। आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में कुल मतदाताओं में लगभग 40 फीसदी महिलाएं हैं — यानी करीब 10 हज़ार में से 4 हज़ार वोट सिर्फ महिलाओं के हैं। यही कारण है कि इस बार चुनावी समीकरणों की असली ‘10 हजारी चाबी’ इनके हाथ में बताई जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पिछले कुछ चुनावों की तरह इस बार भी महिला वोटर ‘किंगमेकर’ साबित हो सकती हैं। खास बात यह है कि महिला मतदाताओं की भागीदारी पुरुषों से तेज़ी से बढ़ी है। 2020 के विधानसभा चुनाव में महिला मतदान प्रतिशत पुरुषों से 2.5 फीसदी ज्यादा रहा था। यही रुझान अगर 2025 में भी बरकरार रहता है, तो परिणामों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।
NDA बनाम महागठबंधन की रणनीति:
NDA के घटक दलों ने महिला वोटरों को साधने के लिए कई वादे किए हैं— मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना, रोजगार प्रशिक्षण और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी जा रही है। वहीं महागठबंधन भी पीछे नहीं है। वह महिलाओं को महिलाओं के लिए 33% आरक्षण, महिलाओं के रोजगार अधिकार और महिला उद्यमिता जैसे वादों से लुभाने की कोशिश कर रहा है।
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ग्रामीण महिलाओं का झुकाव तय करेगा नतीजा:
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में ग्रामीण इलाकों की महिलाएं निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं। इन महिलाओं का झुकाव किसी एक गठबंधन की ओर हुआ तो सत्ता का समीकरण पूरी तरह बदल सकता है।


