replace India with Bharat: देश के कई काले और यूनिवर्सिटीज ने अब डिग्री, मार्कशीट और अन्य शैक्षणिक दस्तावेजों में India की जगह Bharat शब्द का इस्तेमाल शुरू कर दिया है. इस पहल को लेकर शिक्षा जगत में नई बहस छिड़ गई है. ऐसा बताया जा रहा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े संगठन शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास लंबे समय से सरकारी और शैक्षणिक दस्तावेजों में भारत नाम को प्राथमिकता देने की वकालत कर रहा है.
न्यास का तर्क है कि भारत देश की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत पहचान को बेहतर तरीके से दर्शाता है. इसी सोच के तहत कई उच्च शिक्षण संस्थानों ने अपने प्रमाणपत्रों और आधिकारिक दस्तावेजों में बदलाव करना शुरू किया है.
समर्थकों का कहना है कि यह कदम भारतीय परंपरा और राष्ट्रीय पहचान को मजबूत करेगा, जबकि आलोचकों का मानना है कि संविधान में “India, that is Bharat” दोनों नाम मान्य हैं, इसलिए किसी एक नाम को बढ़ावा देने की जरूरत नहीं है.
कुछ सालों के भीतर देखने को मिला बदलाव
हाल के वर्षों में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास शिक्षा व्यवस्था में भारतीयता, भारतीय भाषाओं और सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देने से जुड़े कई अभियानों को आगे बढ़ाता रहा है. संगठन का मानना है कि शिक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था में भारत शब्द का अधिक उपयोग देश की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करेगा.
इस बीच, विश्वविद्यालयों द्वारा किए जा रहे इन बदलावों ने शिक्षा जगत और राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है कि आने वाले समय में सरकारी और शैक्षणिक दस्तावेजों में भारत का इस्तेमाल और बढ़ सकता है.
एमपी और छत्तीसगढ़ में हो रहा भारत शब्द का यूज
G-20 समिट के दौरान इस शब्द का इस्तेमाल किया गया था. हम भारत के लोग हैं और हमारे देश का असली नाम भारत ही है. मध्य प्रदेश के इंदौर में स्थित देवी अहिल्याबाई होल्कर का कहना है ऐसी पहली यूनिवर्सिटी है जिसने इन शब्दों के इस्तेमाल की सबसे पहले शुरुआत की है. इसके अलावा छत्तीसगढ़ की यूनिवर्सिटी भी इंडिया की जगह भारत शब्द का यूज कर रही हैं.





