बांग्लादेश भेजे गए कथित निर्वासितों को लेकर केंद्र सरकार ने अदालत में महत्वपूर्ण पक्ष रखा है। केंद्र ने कहा कि जिन लोगों ने खुद को भारतीय नागरिक बताया है, उनके दावों की पूरी जांच की जाएगी। यदि दस्तावेजों और जांच में उनकी भारतीय नागरिकता साबित होती है, तो सरकार उन्हें वापस लाने की प्रक्रिया पर विचार करेगी।
अदालत में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से कहा गया कि नागरिकता से जुड़े मामलों में तय कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि बिना सत्यापन किसी को भारतीय नागरिक मानना संभव नहीं है। संबंधित एजेंसियों को दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच के निर्देश दिए गए हैं, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
इस मामले को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस भी तेज हो गई है। मानवाधिकार संगठनों ने निर्वासितों के अधिकारों को लेकर चिंता जताई है, वहीं सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिकता नियमों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। अब अदालत की अगली सुनवाई और जांच रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी हैं।


