उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम के कपाट मंगलवार को शीतकाल के लिए विधि-विधान के साथ बंद कर दिए गए। कपाट बंद होने के इस पावन अवसर पर हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे और भगवान बदरीविशाल के दर्शन कर स्वयं को सौभाग्यशाली महसूस किया।
सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ उमड़ने लगी थी। पूजा-अर्चना के बाद ‘जय बदरीविशाल’ के जयकारों के बीच ठीक निर्धारित मुहूर्त में कपाट बंद किए गए। परंपरा के अनुसार, धाम को फूलों से सजाया गया और सेना के बैंड ने भी विशेष प्रस्तुति दी।
कपाट बंद होने के साथ ही छह महीने तक बदरीनाथ में पूजा-अर्चना स्थगित रहेगी। इस अवधि में भगवान की पूजा जोशीमठ स्थित नरसिंह मंदिर में शीतकालीन गद्दी स्थल पर की जाएगी। बदरीनाथ के मुख्य पुजारी (रावल) और ढाई पंडा समुदाय ने पारंपरिक विधियों के साथ पूजा संपन्न कर कपाट बंद किए।
श्रद्धालुओं का कहना है कि कपाट बंद होने से पहले दर्शन करना बेहद शुभ माना जाता है। इसी भावना के साथ देशभर से लोग यहां पहुंचे। बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने बताया कि इस बार रिकॉर्ड संख्या में भक्तों ने शीतकालीन बंदी के अवसर पर दर्शन किए।
मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिनों में बदरीनाथ धाम क्षेत्र में बर्फबारी की संभावना है। इसी को देखते हुए हर साल की तरह कपाट समय से पूर्व बंद कर दिए गए हैं।
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बदरीनाथ धाम के कपाट अब अगले वर्ष अप्रैल-मई में अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर दोबारा खोले जाएंगे।


