छत्तीसगढ़ के आरंग से मिली प्राचीन जैन तीर्थंकर की मूर्ति को हाल ही में डोंगरगढ़ ट्रस्ट को सौंप दिया गया है। इस कदम के बाद विवाद खड़ा हो गया है। आर्कियोलॉजिस्टों का कहना है कि मूर्ति खंडित स्थिति में है, और ऐसी प्रतिमा की पूजा करने का कोई धार्मिक विधान नहीं है।
वहीं स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने यह कदम चोरी-छिपे और बिना उचित सलाह के उठाया, जिससे सांस्कृतिक और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है। इस विवाद ने धार्मिक और पुरातात्विक दृष्टि दोनों से चर्चाओं को जन्म दे दिया है।


