अमित शाह ने कहा है कि DGP/IGP Conference 2025 में अपनी बात रखते हुए, आने वाले सम्मेलन से पहले पूरे देश को नक्सलवाद (Left-Wing Extremism) से पूरी तरह मुक्त कर दिया जाएगा।
गृह मंत्री ने दावा किया कि पिछले सालों में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 2014 में 126 से घटकर अब सिर्फ 11 रह गई है। यह गिरावट, सरकार की सक्रिय सुरक्षा और नीतिगत पहल का नतीजा है। उन्होंने कहा कि पिछली 7 सालों में 586 सुदृढ़ (fortified) पुलिस थानों का निर्माण किया गया है, जिससे पुलिस-प्रशासन की मज़बूती बढ़ी है। अमित शाह ने एक “360-डिग्री” रणनीति की बात कही, जिसमें न केवल नक्सलवाद से निपटना शामिल है, बल्कि नशीले पदार्थों, संगठित अपराध और आतंकवाद के खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
गृह मंत्री ने यह भी कहा कि National Investigation Agency (NIA), अन्य केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर — इंटेलिजेंस, कानून-व्यवस्था, और सुरक्षा नींव — को मज़बूत किया गया है। सरकार के अनुसार, नक्सलवाद, पूर्वोत्तर उग्रवाद, एवं जम्मू और कश्मीर में आतंकी चुनौतियों को स्थायी हल के रूप में देखा जा रहा है और शीघ्र ही पूरे देश में स्थिरता स्थापित होगी।
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हालाँकि सुरक्षा बलों की सक्रियता और प्रशासनिक सुधारों के कारण स्थिति में निश्चित सुधार हुआ है, तथापि नक्सलवाद का जड़ गहरी है — सामाजिक-आर्थिक असमानताएं, उपेक्षित जनजातीय क्षेत्र, विकास की कमी आदि। ऐसे मामलों में सिर्फ सुरक्षा उपाय पर्याप्त नहीं होंगे; लोगों का विश्वास, विकास, शिक्षा व रोज़गार जरूरी हैं। कई सुरक्षा विशेषज्ञ इस बात पर भी ज़ोर देते हैं कि नक्सलवाद का पूरी तरह उन्मूलन — समय, सतत विकास, और प्रशासनिक समन्वय की मांग करता है।


