पश्चिम एशिया में बढ़ते ईरान-इस्राइल तनाव के बीच भारत सरकार ने किसानों को संभावित आर्थिक असर से बचाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि कृषि क्षेत्र पर पड़ने वाले प्रभाव, खासकर उर्वरक, ईंधन और निर्यात लागत को ध्यान में रखते हुए एक विशेष रणनीति तैयार की जा रही है। इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा के लिए शिवराज सिंह चौहान जल्द ही एक उच्चस्तरीय बैठक करेंगे।
सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में कृषि आपूर्ति श्रृंखला, खाद की उपलब्धता और फसल लागत को नियंत्रित करने के उपायों पर विचार किया जाएगा। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों और परिवहन लागत में उछाल की आशंका है, जिसका सीधा असर किसानों पर पड़ सकता है। सरकार इस प्रभाव को कम करने के लिए सब्सिडी, भंडारण और वैकल्पिक सप्लाई जैसे विकल्पों पर भी काम कर रही है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का यह कदम समय पर उठाया गया है, जिससे किसानों को संभावित झटके से बचाया जा सकेगा। आने वाले दिनों में बैठक के बाद ठोस फैसले सामने आ सकते हैं, जो कृषि क्षेत्र को स्थिर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएंगे।


