नई दिल्ली — दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता (AQI) खतरनाक स्तर तक पहुंच गई है। कुछ इलाकों में AQI 500 के पार देखा गया है, लेकिन इस के बीच GRAP-3 (स्टेज III) के पाबंदियों को प्रभावी रूप से लागू करने में चुनौतियाँ सामने आ रही हैं।
प्रदूषण की गंभीरता और स्थिति
- केंद्रीय वायु गुणवत्ता निगरानी एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में कोहरे जैसी धुंध छाई हुई है और दृश्यता काफी कम हो गई है।
- कुछ मॉनिटरिंग स्टेशन बताते हैं कि AQI “सिर्फ गंभीर” श्रेणी (401–450) में न रहकर इसके ऊपर तक पहुंच गया है।
- साथ ही, मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियाँ — जैसे कम हवा की गति — प्रदूषकों को जमने का अवसर दे रही हैं, जिससे स्थिति और बिगड़ रही है।
GRAP-3 पाबंदियाँ — क्यों बेअसर हो रही हैं?
- GRAP-3, या ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान का तीसरा चरण, तब लागू होता है जब AQI “गंभीर” श्रेणी (401–450) में हो। इसे लागू करने पर निर्माण गतिविधियों, खनन और कुछ वाहनों पर पाबंदियाँ लगती हैं।
- बावजूद इसके, प्रदूषण नियंत्रण में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है। कई रिपोर्ट्स में बताया गया है कि GRAP-3 लागू होने के बाद भी कुछ इलाकों में धूल-उत्सर्जन और वाहन प्रदूषण का असर बना हुआ है।
- वहीं CAQM की रिपोर्ट में यह कहा गया है कि मौसम पूर्वानुमान और हवा के हालात में सुधार को देखते हुए, उन्होंने GRAP-3 की कुछ पाबंदियों को वापस ले लिया है।
- कुछ विश्लेषकों का कहना है कि GRAP-3 के प्रतिबंध बहुत बड़े पैमाने पर लागू करना चुनौतीपूर्ण है — ना सिर्फ प्रशासनिक रूप से बल्कि उनके असर को नियमित रूप से मापना भी मुश्किल हो रहा है।
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जनता और स्वास्थ्य पर असर
- लोगों ने आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ और गले में खराश जैसी शिकायतें शुरू कर दी हैं।
- एयर पॉल्यूशन की गंभीरता को देखते हुए, कुछ पब्लिक स्कूली क्षेत्रों में वर्किंग मॉडल बदलकर हाइब्रिड पढ़ाई (ऑनलाइन + ऑफलाइन) की व्यवस्था की गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्तर का प्रदूषण बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारी वाले लोगों के लिए बहुत ख़तरनाक हो सकता है।


