नई दिल्ली, 30 नवंबर 2025 — देश के प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों में से एक All India Institute of Medical Sciences (एम्स) ने तंबाकू नियंत्रण (tobacco control) को मजबूत करने के लिए दो प्रतिष्ठित संगठनों के साथ हाथ मिलाया है। इन तीनों संस्थाओं के बीच एक समझौता ज्ञापन (Memorandum of Understanding – MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
इस साझेदारी का उद्देश्य तंबाकू उपयोग व उससे जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं पर शोध करना, नीति (policy) सुझाव तैयार करना और जागरूकता व रोकथाम (prevention & awareness) को बढ़ावा देना है।एम्स, साथ ही — जिन दो अन्य संस्थाओं के साथ यह समझौता हुआ है — वे तंबाकू नियंत्रण, सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामुदायिक जागरूकता के क्षेत्र में पहले से ही सक्रिय हैं।इस पहल से उम्मीद की जाती है कि तंबाकू सेवन से उत्पन्न होने वाले रोग — जैसे लिवर, फेफड़े, हृदय संबंधी — पर विस्तृत अध्ययन होगा, और सरकार व स्वास्थ्य विभागों को नीति-निर्माण में वैज्ञानिक, डेटा-आधारित सहायता मिलेगी।
भविष्य में तंबाकू सेवन के प्रवृत्ति (prevalence), युवाओं में तंबाकू स्वीकार्यता (acceptance), cessation — छोड़ने के तरीके, तथा तंबाकू विरोधी उपाय — रोकथाम, शिक्षा, नियामक पहल (regulation) आदि पर अध्ययन किया जाएगा।तंबाकू उपयोग से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले सामाजिक, आर्थिक और चिकित्सा प्रभावों का विश्लेषण होगा।इसके अलावा, सार्वजनिक जागरूकता अभियानों (awareness campaigns), स्कूलों व कॉलेजों में शिक्षा-प्रसार, और तंबाकू नियंत्रण कानूनों के पालन-परिणामों की समीक्षा की जाएगी।
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भारत में तंबाकू सेवन — सिगरेट, बीड़ी, चूरा-गुटखा आदि — एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है, जिससे लाखों लोगों की सेहत जोखिम में है।एम्स जैसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान द्वारा वैज्ञानिक शोध व शक्ति जुटाने से नीति-निर्माण, रोग निवारण और स्वास्थ्य जागरूकता में मजबूती आएगी।इस प्रकार के अध्ययन व जागरूकता प्रयास, तंबाकू उपयोग को धीरे-धीरे कम करने, नए उपयोगकर्ताओं को रोकने और व्यापक स्वास्थ्य सुधार की दिशा में सहायक होंगे।


