Korba में महिलाओं का बड़ा विद्रोह! शराबखोरी के खिलाफ डंडे लेकर सड़कों पर उतरीं सैकड़ों महिलाएं
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के कोलगा गांव में अब शराबखोरी के खिलाफ महिलाओं ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। वर्षों से नशे की वजह से घरेलू परेशानियां झेल रहे परिवारों की महिलाओं ने एकजुट होकर गांव में शराबबंदी लागू करने का सामूहिक संकल्प लिया। हाथों में डंडे लेकर सड़कों पर उतरी महिलाओं ने साफ संदेश दिया कि अब गांव में नशे के कारोबार और शराबखोरी को सामान्य रूप से स्वीकार नहीं किया जाएगा।
घरों की परेशानी बनी सामूहिक आंदोलन की वजह
शराब की लत को अक्सर किसी एक व्यक्ति की निजी आदत मान लिया जाता है, लेकिन इसका असर पूरे परिवार पर पड़ता है। कोलगा गांव की महिलाओं का विरोध इसी सामाजिक और पारिवारिक समस्या के खिलाफ सामने आया है।
जब घर की कमाई का बड़ा हिस्सा नशे में खर्च होने लगता है, तो बच्चों की पढ़ाई, भोजन, स्वास्थ्य और दूसरी जरूरी जरूरतें प्रभावित होती हैं। कई परिवारों में नशे के बाद होने वाले विवाद महिलाओं और बच्चों के लिए मानसिक तनाव का कारण बनते हैं। ऐसे हालात में परिवार की आर्थिक स्थिति के साथ-साथ घर का सामाजिक वातावरण भी कमजोर पड़ता है।
महिलाओं का मानना है कि शराबखोरी पर नियंत्रण के बिना परिवारों की स्थिति में स्थायी सुधार मुश्किल है। इसलिए उन्होंने इस समस्या को केवल व्यक्तिगत मामला मानने के बजाय पूरे गांव के भविष्य से जोड़कर देखा है।
ग्रामसभा की पहल से लिया गया बड़ा फैसला
गांव के सरपंच संतराम राठिया की पहल पर आयोजित सामूहिक बैठक में ग्रामीणों ने गांव की सीमा के भीतर शराब बनाने, बेचने और पीने पर रोक लगाने का निर्णय लिया। इस फैसले को प्रभावी बनाने के लिए ग्रामीणों ने सामूहिक जिम्मेदारी निभाने की बात कही।
बैठक के बाद बड़ी संख्या में महिलाएं हाथों में डंडे लेकर गांव की सड़कों पर निकलीं। उनके प्रदर्शन में नाराजगी के साथ एक बेहतर सामाजिक माहौल बनाने की इच्छा भी दिखाई दी। महिलाओं ने स्पष्ट किया कि गांव में शराब बनाते, बेचते या पीते हुए कोई व्यक्ति मिलता है, तो उसे पकड़कर पुलिस के हवाले किया जाएगा।
इस पहल की जानकारी मिलने पर करतला थाना प्रभारी भी गांव पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत की।
शराबबंदी का संकल्प, लेकिन असली चुनौती इसे बनाए रखना
कोलगा गांव का फैसला सामाजिक स्तर पर महत्वपूर्ण है, लेकिन किसी भी गांव में शराबबंदी की घोषणा करना और उसे लंबे समय तक प्रभावी बनाए रखना दो अलग-अलग चुनौतियां हैं।
यदि गांव में शराब की उपलब्धता पर रोक लगती है, तो इसका सकारात्मक असर घरेलू खर्च, बच्चों की शिक्षा और पारिवारिक संबंधों पर पड़ सकता है। हालांकि इसके लिए केवल विरोध प्रदर्शन पर्याप्त नहीं होगा। लगातार जनजागरूकता, परिवारों की भागीदारी, नशे की लत से जूझ रहे लोगों के लिए परामर्श और जरूरत पड़ने पर उपचार की व्यवस्था भी जरूरी है।
एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह है कि गांव के लोग कानून अपने हाथ में न लें। शराब बनाने या बेचने की शिकायतों पर कार्रवाई संबंधित कानून और पुलिस प्रशासन के माध्यम से ही होनी चाहिए। महिलाओं की सुरक्षा और शिकायत करने वालों का भरोसा बनाए रखना भी प्रशासन की जिम्मेदारी होगी।
बच्चों के भविष्य से जुड़ी है महिलाओं की यह लड़ाई
कोलगा की महिलाओं की एकजुटता का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उनकी मांग केवल शराब बंद कराने तक सीमित नहीं है। वे अपने परिवारों में आर्थिक स्थिरता, बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण और घरेलू शांति चाहती हैं।
अगर ग्रामीणों का यह सामूहिक संकल्प लगातार बना रहता है और प्रशासन भी सहयोग करता है, तो कोलगा गांव दूसरे गांवों के लिए सामाजिक जागरूकता की मिसाल बन सकता है।
Korba में महिलाओं का शराबबंदी अभियान अब एक स्थानीय विरोध से आगे बढ़कर परिवारों की सुरक्षा और सामाजिक बदलाव की पहल बन गया है। आने वाले दिनों में इसकी वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि गांव इस फैसले को कितनी जिम्मेदारी, एकजुटता और कानूनी तरीके से लागू कर पाता है।




