Durg Cyber Crime: शादी के सपनों से बड़ा धोखा! AI लड़कियों की तस्वीरों से चल रहा था फर्जी मैरिज ब्यूरो, QR कोड से लाखों की ठगी
दुर्ग। शादी के लिए जीवनसाथी की तलाश कर रहे लोगों को अब सोशल मीडिया पर दिखने वाली खूबसूरत तस्वीरों और आकर्षक मैरिज ब्यूरो के विज्ञापनों से सावधान रहने की जरूरत है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में साइबर ठगों ने धोखाधड़ी का तरीका भी बदल दिया है। अब नकली पहचान और काल्पनिक चेहरों के जरिए लोगों का भरोसा जीतकर शादी के नाम पर पैसे ऐंठे जा रहे हैं।
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में सुपेला पुलिस ने ऐसे ही एक कथित फर्जी मैरिज ब्यूरो का पर्दाफाश किया है। यहां AI से तैयार काल्पनिक युवतियों की तस्वीरों का इस्तेमाल कर विवाह के इच्छुक लोगों को जाल में फंसाया जाता था। शादी कराने का भरोसा देकर QR कोड के माध्यम से पैसे जमा कराए जाते और रकम मिलते ही संबंधित व्यक्ति से संपर्क बंद कर दिया जाता था।
पुलिस ने इस मामले में कथित संचालक परमानंद यादव (24) को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह गतिविधि करीब तीन महीने से संचालित हो रही थी।
तीन अलग-अलग नामों से बनाया गया था शादी का नेटवर्क
जांच के अनुसार, आरोपी सोशल मीडिया पर कल्याण मैट्रिमोनी, एलिट मैच मैट्रिमोनी और फ्यूचर पार्टनर जैसे नामों से लोगों तक पहुंच बना रहा था। इन प्लेटफॉर्म के प्रचार में AI से तैयार काल्पनिक युवतियों की तस्वीरों का इस्तेमाल किया जाता था।
दूसरे राज्यों में रहने वाले ऐसे लोगों को निशाना बनाया जाता था, जो शादी के लिए उपयुक्त जीवनसाथी तलाश रहे थे। विज्ञापन देखकर संपर्क करने वालों से फोन पर बातचीत की जाती और उनका बायोडाटा भी लिया जाता था।
इस प्रक्रिया से सामने वाले व्यक्ति को यह विश्वास दिलाने की कोशिश होती थी कि वह किसी वास्तविक और व्यवस्थित विवाह सेवा से जुड़ा है।
यही इस ठगी का सबसे गंभीर पहलू है। यहां धोखाधड़ी केवल पैसे के लेन-देन से नहीं, बल्कि शादी जैसे निजी और भावनात्मक विषय पर भरोसा पैदा करके की जा रही थी।
QR कोड से शुरू होती थी ठगी की असली कहानी
पुलिस के मुताबिक, लोगों को उनकी पसंद की युवती से शादी कराने का भरोसा दिया जाता था। इसके बाद मैरिज काउंसलर के नाम पर बनाए गए बैंक खातों के QR कोड भेजे जाते थे।
शुरुआत में 2,000 रुपये जमा कराने को कहा जाता था। इसके बाद अलग-अलग बहानों से अतिरिक्त भुगतान कराया जाता था। जैसे ही रकम खाते में पहुंचती, संबंधित व्यक्ति का मोबाइल नंबर ब्लैकलिस्ट कर दिया जाता और बातचीत बंद हो जाती थी।
डिजिटल भुगतान की इस व्यवस्था में QR कोड ने ठगों के लिए पैसे लेना आसान बना दिया था। पीड़ित को लगता था कि वह किसी वैध सेवा के लिए भुगतान कर रहा है, जबकि वास्तविकता में उसके साथ धोखाधड़ी की जा रही थी।
तीन महीने तक चलता रहा कथित फर्जी कॉल सेंटर
29 अक्टूबर को मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर सुपेला पुलिस ने उत्तर गंगोत्री भवन में यूनियन बैंक के पास स्थित एक परिसर में छापा मारा। वहां एलिट मैच मैट्रिमोनी के नाम से गतिविधियां संचालित होती मिलीं।
पुलिस को मौके पर संचालक के साथ चार युवतियां भी काम करती मिलीं। पूछताछ में युवतियों ने बताया कि उन्हें एक अच्छी कंपनी में नौकरी देने का आश्वासन देकर बुलाया गया था। उन्हें प्रतिमाह 7,000 रुपये वेतन देने की बात कही गई थी।
आरोप है कि दो दिन के प्रशिक्षण के बाद उन्हें मैरिज काउंसलर बनाकर ग्राहकों से बातचीत करने और QR कोड के माध्यम से भुगतान लेने का काम दिया गया।
यह पहलू भी जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण है। पुलिस के अनुसार, युवतियों को नौकरी की वास्तविक गतिविधियों की पूरी जानकारी नहीं थी। ऐसे में उनकी भूमिका, जानकारी और संभावित संलिप्तता की अलग-अलग जांच जरूरी है।
रोजाना 20 से 50 कॉल, कई बैंक खातों की जांच
पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में पता चला कि इस कथित नेटवर्क में रोजाना लगभग 20 से 50 कॉल किए और प्राप्त किए जाते थे। अलग-अलग मोबाइल नंबरों और बैंक खातों के माध्यम से ग्राहकों से संपर्क तथा भुगतान की प्रक्रिया चलाई जाती थी।
जांच में कुछ बैंक खातों के खिलाफ भारत सरकार के समन्वय पोर्टल पर शिकायतें दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई है।
पुलिस अब जब्त दस्तावेजों, बैंक खातों, मोबाइल फोन और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि कितने लोग इस नेटवर्क के शिकार हुए और कुल कितनी रकम की धोखाधड़ी हुई।
मोबाइल, कंप्यूटर और 1.64 लाख रुपये नकद जब्त
छापेमारी के दौरान पुलिस ने बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दस्तावेज बरामद किए। इनमें शामिल हैं:
- 22 कीपैड मोबाइल फोन
- 4 एंड्रॉयड मोबाइल फोन
- 16 एयरटेल और वीआई सिम कार्ड
- कंप्यूटर सेट और इंटरनेट वाई-फाई उपकरण
- विभिन्न बैंकों की चेकबुक और पासबुक
- भुगतान के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले QR कोड
- ग्राहकों के मोबाइल नंबर और भुगतान संबंधी जानकारी वाले रजिस्टर
- 1 लाख 64 हजार रुपये नकद
पुलिस के मुताबिक, जब्त सामग्री की कुल अनुमानित कीमत 2,83,600 रुपये है।
गिरफ्तार आरोपी न्यायिक रिमांड पर
पुलिस ने आरोपी परमानंद यादव को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। उसके खिलाफ सुपेला थाने में अपराध क्रमांक 1630/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 317(2) और 319(2) में मामला दर्ज किया गया है।
फिलहाल पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े बैंक खातों, डिजिटल लेन-देन और अन्य संभावित संपर्कों की जांच कर रही है।
शादी के नाम पर ऑनलाइन ठगी से कैसे बचें?
यह मामला बताता है कि सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति या संस्था की मौजूदगी अपने आप में उसकी विश्वसनीयता का प्रमाण नहीं है। खासकर विवाह संबंधी सेवाओं में भावनात्मक भरोसे का फायदा उठाकर आर्थिक ठगी की जा सकती है।
शादी के लिए ऑनलाइन संपर्क करने वाले लोगों को कुछ सावधानियां जरूर रखनी चाहिए:
- मैरिज ब्यूरो की वास्तविक पहचान, कार्यालय और पंजीकरण संबंधी जानकारी की जांच करें।
- केवल सोशल मीडिया पर दिखाई गई तस्वीरों के आधार पर किसी व्यक्ति को वास्तविक न मानें।
- वीडियो कॉल और स्वतंत्र तरीके से पहचान सत्यापित किए बिना आगे न बढ़ें।
- शादी कराने या रिश्ता पक्का करने के नाम पर जल्दबाजी में पैसे जमा न करें।
- किसी अनजान व्यक्ति के भेजे QR कोड पर भुगतान करने से पहले संस्था और बैंक खाते की पुष्टि करें।
- ठगी होने पर भुगतान का प्रमाण, चैट और मोबाइल नंबर सुरक्षित रखें तथा तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन या आधिकारिक साइबर अपराध शिकायत व्यवस्था के माध्यम से शिकायत करें।
AI के दौर में डिजिटल पहचान की जांच सबसे बड़ी चुनौती
AI तकनीक ने फोटो और वीडियो बनाने की क्षमता को आसान बनाया है। इसका सकारात्मक इस्तेमाल शिक्षा, चिकित्सा और रचनात्मक कार्यों में हो रहा है, लेकिन इसी तकनीक का दुरुपयोग नकली पहचान और भ्रामक विज्ञापन तैयार करने में भी किया जा सकता है।
दुर्ग का यह मामला बताता है कि भविष्य में साइबर ठगी की पहचान केवल मोबाइल नंबर या वेबसाइट देखकर करना पर्याप्त नहीं होगा। डिजिटल पहचान, भुगतान प्राप्त करने वाले खाते और संस्था की वास्तविकता की पुष्टि भी उतनी ही जरूरी होगी।
शादी जैसे महत्वपूर्ण फैसले को ऑनलाइन विज्ञापन और आकर्षक तस्वीरों के भरोसे नहीं छोड़ना चाहिए। दुर्ग पुलिस की कार्रवाई ने एक कथित फर्जी मैरिज ब्यूरो का खुलासा जरूर किया है, लेकिन इस मामले की असली तस्वीर बैंक खातों की जांच और संभावित पीड़ितों की पहचान सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।




