Korba News: अवैध शराब का खतरनाक असर! डगनियाखार में घरेलू हिंसा से परेशान महिलाएं पहुंचीं थाने, कार्रवाई की मांग
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के बांकीमोंगरा थाना क्षेत्र के ग्राम डगनियाखार में अवैध शराब की बिक्री को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश सामने आया है। गांव की महिलाएं और पुरुष एक साथ थाने पहुंचे और पुलिस से शराब की कथित अवैध बिक्री पर रोक लगाने की मांग की। ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय से चल रही इस समस्या का असर अब केवल गांव के माहौल तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवारों की शांति, महिलाओं की सुरक्षा और बच्चों के भविष्य पर भी पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने थाना प्रभारी को लिखित आवेदन सौंपकर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। उनका कहना है कि गांव के कुछ घरों में कई वर्षों से शराब बेची जा रही है। आरोप है कि शराब पीने के बाद कुछ लोग घरों में गाली-गलौज और मारपीट करते हैं, जिससे परिवार के सदस्यों को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ता है।
महिलाओं ने बताई घरों के भीतर की परेशानी
थाने पहुंचीं महिलाओं ने बताया कि शराब पीकर घर लौटने वाले पति और बेटे कई बार उनके साथ मारपीट करते हैं। ऐसे माहौल में बच्चों के मन पर भी असर पड़ता है। घर में होने वाले झगड़े और डर का वातावरण उनकी पढ़ाई, व्यवहार और मानसिक सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।
महिलाओं के मुताबिक, गांव में बातचीत और समझाइश के जरिए शराब की बिक्री रोकने के प्रयास किए गए, लेकिन उन्हें अपेक्षित परिणाम नहीं मिला। इसी वजह से ग्रामीणों ने पुलिस के सामने अपनी समस्या रखने का फैसला किया।
इन शिकायतों की गंभीरता इस बात में है कि घरेलू हिंसा को अक्सर परिवार का निजी मामला मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। जबकि मारपीट और धमकी जैसी घटनाएं सुरक्षा और कानून से जुड़ा विषय हैं। पीड़ितों के लिए सुरक्षित तरीके से शिकायत दर्ज कराने और जरूरत पड़ने पर सहायता पाने की व्यवस्था प्रभावी होना जरूरी है।
बच्चों और युवाओं पर पड़ सकता है दीर्घकालिक असर
ग्रामीणों ने चिंता जताई है कि गांव में शराब की उपलब्धता से युवाओं के नशे की ओर बढ़ने का खतरा है। बच्चों के सामने बार-बार गाली-गलौज और हिंसा होने से उनके घरेलू वातावरण पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
हालांकि, किसी गांव में शराब की बिक्री और युवाओं में नशे की लत के बीच वास्तविक संबंध समझने के लिए स्थानीय परिस्थितियों का आकलन जरूरी है। फिर भी, परिवारों में हिंसा और असुरक्षा की शिकायतों को समय रहते गंभीरता से लेना आवश्यक है।
समस्या के समाधान के लिए केवल बिक्री रोकने की कार्रवाई ही नहीं, बल्कि नशे से प्रभावित परिवारों को परामर्श, महिलाओं को सहायता और जरूरतमंद लोगों को उपचार उपलब्ध कराने जैसे कदम भी उपयोगी हो सकते हैं। ग्राम पंचायत, पुलिस और संबंधित सामाजिक संस्थाओं के बीच समन्वय इस दिशा में मदद कर सकता है।
पुलिस कार्रवाई पर टिकी ग्रामीणों की उम्मीद
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत करेंगे। जरूरत पड़ने पर आंदोलन करने की बात भी कही गई है।
अब पुलिस के सामने ग्रामीणों की शिकायत की जांच कर कथित अवैध बिक्री से जुड़े तथ्यों की पुष्टि करने और कानून के अनुसार कार्रवाई करने की जिम्मेदारी है। जांच के दौरान संबंधित स्थानों, उपलब्ध साक्ष्यों और शिकायतों की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।
डगनियाखार की यह शिकायत एक व्यापक सवाल भी उठाती है—यदि किसी इलाके में नशे से जुड़ी गतिविधियों के कारण परिवार लंबे समय से परेशान हैं, तो शिकायतों का स्थायी समाधान कैसे सुनिश्चित किया जाए? प्रभावी कार्रवाई, पीड़ितों की सुरक्षा और समुदाय की भागीदारी साथ-साथ चलें, तभी गांव में भरोसे और सुरक्षित माहौल को मजबूत किया जा सकता है।




