Kanker Cattle Theft: गौशाला के नाम पर 40 गौवंश की बड़ी चोरी का खुलासा, 12.42 लाख की संपत्ति जब्त
कांकेर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में गौशाला भेजने का भरोसा दिलाकर करीब 40 गौवंश ले जाने और बाद में उन्हें बेचने के मामले में पुलिस ने दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान धमतरी निवासी हेमंत यादव और खरतूली निवासी प्रियेश साहू के रूप में हुई है। इस मामले में अब तक कुल 10 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 32 हजार रुपये, एक मोबाइल फोन और मारुति ब्रेजा कार जब्त की है। जब्त संपत्ति का कुल मूल्य 12 लाख 42 हजार रुपये बताया गया है।
Kanker Cattle Theft: भरोसे के बहाने कैसे गायब हुए गौवंश?
इस मामले का सबसे अहम पहलू यह है कि मवेशियों को ले जाने के लिए गौशाला पहुंचाने की बात कही गई थी। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने ग्रामीणों को बताया था कि आवारा और लावारिस मवेशियों को धमतरी जिले के सिहावा क्षेत्र के पंडरीपानी स्थित गौशाला भेजा जाएगा। इसी भरोसे के बीच नरहरपुर हाईस्कूल खेल मैदान से लगभग 40 गौवंश को पिकअप वाहनों में ले जाया गया।
जब ग्रामीणों ने संबंधित गौशाला में संपर्क कर मवेशियों के पहुंचने की जानकारी ली, तो पता चला कि वहां नरहरपुर से कोई गौवंश नहीं आया था। इसके बाद मामले पर संदेह गहराया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
नरहरपुर थाना क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 8 निवासी रविकांत ठाकुर की शिकायत के अनुसार, 30 सितंबर की रात से ग्रामीणों की गाय और बछड़े लापता थे। पुलिस ने जांच शुरू की तो कथित तौर पर गौशाला भेजने के नाम पर मवेशियों को ले जाने की पूरी घटना सामने आई।
Odisha तक पहुंचा मामला, 85 हजार रुपये में बिक्री का आरोप
पुलिस की पूछताछ के अनुसार, हेमंत यादव और प्रियेश साहू ने पहले गिरफ्तार किए गए हिमांशु तिवारी और गौरव सोरी के साथ मिलकर मवेशियों को ओडिशा के पापड़ाहांडी ले जाकर 85 हजार रुपये में बेचने की बात स्वीकार की है।
जांच में यह भी आरोप सामने आया कि पुलिस को गुमराह करने के लिए दूसरी जगह से मवेशी लाकर उन्हें नरहरपुर से लाए गए गौवंश के रूप में पेश करने की कोशिश की गई। इन दावों और मवेशियों की वास्तविक स्थिति से जुड़े तथ्यों का परीक्षण जांच के दौरान किया जाना जरूरी है।
पुलिस ने बिक्री की रकम में से 32 हजार रुपये, एक मोबाइल फोन और मारुति ब्रेजा कार जब्त की है। जब्त सामान का कुल मूल्य 12.42 लाख रुपये बताया गया है। यह राशि जब्त संपत्ति का मूल्य है, इसे मवेशियों की बिक्री से प्राप्त रकम नहीं समझना चाहिए।
अब तक 10 गिरफ्तार, जांच में इन पहलुओं पर रहेगा जोर
पुलिस इस मामले में पहले आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज चुकी है। इसके बाद फरार चल रहे हेमंत यादव और प्रियेश साहू को धमतरी में घेराबंदी कर पकड़ा गया।
मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि इसमें कई लोगों की कथित भूमिका, मवेशियों को एक जिले से दूसरे राज्य तक ले जाना और बिक्री से जुड़े पहलू शामिल हैं। जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि गौवंश को किन परिस्थितियों में ले जाया गया, परिवहन की व्यवस्था किसने की और बिक्री की प्रक्रिया में कौन-कौन शामिल था।
पुलिस के अनुसार, मामले में छत्तीसगढ़ कृषि पशु परिरक्षण अधिनियम, 2004 की धारा 4, 6 और 10 तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की धारा 11(घ) भी जोड़ी गई हैं। आरोप है कि मवेशियों को वाहनों में ठूंसकर ले जाया गया और उन्हें ओडिशा के पापड़ाहांडी स्थित कत्लखाने पहुंचाया गया। इन आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।
ग्रामीणों के लिए बड़ा सबक: मवेशी सौंपने से पहले करें सत्यापन
इस घटना से ग्रामीण क्षेत्रों में पशु सुरक्षा और सामुदायिक सतर्कता का महत्वपूर्ण सवाल उठता है। गौशाला या पशु संरक्षण के नाम पर कोई व्यक्ति मवेशियों को ले जाने की बात कहे, तो केवल मौखिक आश्वासन पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है।
ऐसी स्थिति में संबंधित गौशाला से सीधे पुष्टि करना, मवेशियों की संख्या और पहचान का रिकॉर्ड रखना, वाहन का नंबर नोट करना और मवेशियों को सौंपने वाले व्यक्ति का विवरण सुरक्षित रखना उपयोगी सावधानियां हैं। यदि सामूहिक रूप से कई पशु ले जाए जा रहे हों, तो ग्राम पंचायत और संबंधित पशुपालन अधिकारियों को जानकारी देना भी पारदर्शिता बढ़ा सकता है।
गौवंश की सुरक्षा केवल धार्मिक या भावनात्मक विषय नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों की संपत्ति, आजीविका और भरोसे से भी जुड़ी है। गाय और बछड़े कई परिवारों के लिए दूध, कृषि कार्य और आर्थिक सहारे का हिस्सा होते हैं। ऐसे में पशुओं के गायब होने से ग्रामीणों को आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक परेशानी भी झेलनी पड़ सकती है।
आगे की जांच क्यों महत्वपूर्ण है?
दो और गिरफ्तारियों के बाद पुलिस के सामने अब पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने की चुनौती है। मवेशियों की पहचान, उनके परिवहन का रास्ता, बिक्री से संबंधित साक्ष्य और प्रत्येक आरोपी की कथित भूमिका की जांच से मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकती है।
ग्रामीणों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि लापता गौवंश का पता चल पाया है या नहीं और उन्हें सुरक्षित वापस लाने की क्या स्थिति है। मामले की आगे की कार्रवाई में पशुओं की बरामदगी, यदि संभव हो, और कथित अपराध में शामिल सभी लोगों की भूमिका का कानूनी परीक्षण महत्वपूर्ण रहेगा।
फिलहाल पुलिस के मुताबिक, इस प्रकरण में कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है।




