Bhilai Food Safety: बड़ा खुलासा! एक्सपायरी दूध से पनीर और गंदगी में मिठाइयां, 2500 किलो खाद्य सामग्री नष्ट
भिलाई। त्योहारों और मिठाइयों की बढ़ती मांग के बीच खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। छत्तीसगढ़ के भिलाई और दुर्ग जिले में खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच के दौरान कुछ प्रतिष्ठानों में कथित तौर पर एक्सपायरी दूध से पनीर बनाने, अस्वच्छ परिस्थितियों में मिठाइयां तैयार करने और पैकेट पर भविष्य की तारीख डालकर बिस्किट पैक करने जैसी अनियमितताएं मिलीं। कार्रवाई के दौरान करीब 2,500 किलो मिठाई और 1,000 लीटर दूध नष्ट कराया गया, जबकि तीन प्रतिष्ठानों में खाद्य पदार्थ बनाने का काम बंद करा दिया गया।
यह कार्रवाई केवल कुछ दुकानों तक सीमित मामला नहीं है। इसका सीधा संबंध ग्राहकों के स्वास्थ्य, खाद्य कारोबार में पारदर्शिता और बाजार में बिकने वाले उत्पादों पर लोगों के भरोसे से है।
एक्सपायरी दूध से पनीर बनाने का मामला क्यों गंभीर?
नंदनी रोड स्थित मां दुर्गा डेयरी की जांच के दौरान पनीर और दही बनाने की जगह पर साफ-सफाई की कमी पाई गई। विभाग के अनुसार, पनीर बनाने में इस्तेमाल हो रहा पैक्ड दूध अपनी एक्सपायरी तारीख पार कर चुका था। अधिकारियों ने दूध, पनीर और दही के नमूने लेकर प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे। इसके बाद नगर निगम की सहायता से करीब 1,000 लीटर दूध और 80 किलो दही नष्ट कराया गया।
खाद्य पदार्थों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की गुणवत्ता बेहद महत्वपूर्ण है। दूध जैसे जल्दी खराब होने वाले उत्पाद को निर्धारित उपयोग अवधि के बाद इस्तेमाल करना खाद्य सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय है। हालांकि, किसी उत्पाद से वास्तविक स्वास्थ्य जोखिम कितना था, इसका निष्कर्ष प्रयोगशाला की रिपोर्ट और संबंधित जांच के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।
ग्राहकों के लिए भी यह समझना जरूरी है कि पनीर की ताजगी केवल उसके रंग या गंध से तय नहीं होती। उसकी सुरक्षित गुणवत्ता उत्पादन प्रक्रिया, कच्चे माल के भंडारण और स्वच्छता पर निर्भर करती है।
मिठाइयों की गुणवत्ता और निर्माण की स्वच्छता पर सवाल
कैंप-2 स्थित गुप्ताजी लड्डू हाउस में लगभग 250 किलो मैदे के लड्डू मिले। विभाग को इनमें इस्तेमाल किए गए खाद्य रंग और स्वीटनिंग एजेंट निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं होने का संदेह था। इस आधार पर लड्डुओं को नष्ट करने की कार्रवाई की गई।
वहीं, बैकुंठधाम क्षेत्र के मुस्कान फूड प्रोडक्ट्स में मिठाइयां तैयार करने और पैक करने की जगह पर गंदगी मिलने की जानकारी दी गई। यहां लड्डू, सोनपापड़ी, पेड़ा और बर्फी जैसी मिठाइयां बिना लेबल वाले प्लास्टिक के जार में पैक की जा रही थीं।
विभाग की कार्रवाई में लगभग 200 किलो पेड़ा, 1,020 किलो सोनपापड़ी, 70 किलो मसूर पाक और अन्य मिठाइयों को नष्ट करने की प्रक्रिया शामिल रही। विभाग के मुताबिक, कुल मिलाकर करीब 2,500 किलो मिठाई नष्ट कराई गई।
इन मामलों से एक अहम सवाल उठता है: खाद्य पदार्थ तैयार करने वाले प्रतिष्ठानों में स्वच्छता और गुणवत्ता की जांच नियमित रूप से कितनी प्रभावी है? मिठाइयों का स्वाद और आकर्षक पैकिंग ग्राहकों को लुभा सकती है, लेकिन सुरक्षित उत्पादन के लिए साफ कार्यस्थल, उचित भंडारण और मानकों के अनुरूप सामग्री का इस्तेमाल अनिवार्य है।
बिस्किट पर भविष्य की तारीख डालने का आरोप
वैशाली नगर स्थित जलाराम नमकीन एंड डेयरी में 23 अक्टूबर 2026 को हुई जांच के दौरान बिस्किट के पैकेट पर 1 नवंबर 2026 की तारीख डालकर पैकिंग किए जाने का मामला सामने आया। यानी पैकेट पर जांच की तारीख से नौ दिन आगे की तारीख दर्ज थी।
खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग पर तारीख संबंधी जानकारी उपभोक्ताओं को उत्पाद की अवधि और उपयोगिता समझने में मदद करती है। यदि तारीख जानबूझकर गलत दर्ज की जाती है, तो ग्राहक उत्पाद की वास्तविक स्थिति का सही आकलन नहीं कर पाते। इससे बाजार में भरोसा कमजोर होता है और खाद्य सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठते हैं।
विभाग ने दुकान संचालक के खिलाफ भ्रामक जानकारी से संबंधित मामला तैयार कर न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया शुरू की है। इस मामले में अंतिम कानूनी निष्कर्ष संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
तीन प्रतिष्ठानों में काम बंद, लाइसेंस पर भी कार्रवाई की तैयारी
जांच में गंभीर अनियमितताएं मिलने के बाद तीन प्रतिष्ठानों में खाद्य पदार्थ बनाने का काम बंद करा दिया गया। अधिकारियों के अनुसार, इनके खाद्य लाइसेंस एक सप्ताह के लिए निलंबित करने की सिफारिश भेजी जाएगी। आवश्यक सुधार नहीं होने पर निलंबन की अवधि बढ़ाने पर भी विचार किया जा सकता है।
खाद्य सुरक्षा आयुक्त दीपक अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि खाद्य पदार्थों के निर्माण में स्वच्छता और सुरक्षा मानकों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी।
ऐसी कार्रवाई का उद्देश्य केवल नियम तोड़ने वालों को दंडित करना नहीं, बल्कि कारोबारियों को सुरक्षित उत्पादन के लिए जवाबदेह बनाना भी है। प्रभावी निगरानी के लिए नियमित निरीक्षण, नमूनों की समयबद्ध जांच और सुधारात्मक कदमों का सत्यापन जरूरी है। केवल किसी दिन छापा पड़ना पर्याप्त नहीं होगा; यह भी सुनिश्चित करना होगा कि संबंधित प्रतिष्ठान दोबारा काम शुरू करने से पहले जरूरी मानकों का पालन करें।
ग्राहकों को खरीदारी करते समय क्या सावधानी रखनी चाहिए?
मिठाई, पनीर, दूध और पैक्ड खाद्य पदार्थ खरीदते समय ग्राहक कुछ सामान्य बातों पर ध्यान दे सकते हैं:
- पैक्ड उत्पादों पर निर्माण तिथि, उपयोग अवधि और अन्य जरूरी लेबल जानकारी देखें।
- खुली मिठाइयां खरीदते समय दुकान की साफ-सफाई और खाद्य पदार्थों को रखने की स्थिति पर ध्यान दें।
- दूध और पनीर जैसे जल्दी खराब होने वाले उत्पादों को उचित तापमान पर सुरक्षित रखने वाली दुकानों को प्राथमिकता दें।
- पैकेट पर तारीख मिटाई हुई, बदली हुई या संदिग्ध लगे, तो उत्पाद खरीदने से बचें और संबंधित खाद्य सुरक्षा अधिकारी को शिकायत करें।
- असामान्य गंध, खराब पैकिंग या उत्पाद की स्थिति को लेकर संदेह होने पर उसे खाने से बचें।
इन सावधानियों का मतलब यह नहीं है कि केवल देखकर किसी खाद्य पदार्थ की सुरक्षा की पूरी पुष्टि की जा सकती है। कई तरह के संदूषण का पता प्रयोगशाला जांच से ही चलता है। इसलिए कारोबारियों की जिम्मेदारी और विभागीय निगरानी सबसे महत्वपूर्ण बनी रहती है।
खाद्य कारोबार में भरोसा बचाना भी जरूरी
खाद्य सुरक्षा संबंधी अनियमितताओं का असर केवल ग्राहकों पर नहीं पड़ता। नियमों का पालन करने वाले दुकानदारों को भी नुकसान हो सकता है, क्योंकि कुछ प्रतिष्ठानों में गड़बड़ी सामने आने पर पूरे बाजार की छवि प्रभावित होती है। इसलिए जांच और कार्रवाई के साथ पारदर्शी प्रक्रिया, प्रमाण-आधारित निष्कर्ष और नियमों का समान रूप से पालन आवश्यक है।
भिलाई में हुई कार्रवाई से यह संदेश मिलता है कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को केवल बिक्री और मांग के आधार पर नहीं परखा जा सकता। सुरक्षित कच्चा माल, स्वच्छ निर्माण स्थल, सही लेबलिंग और नियमित निगरानी किसी भी खाद्य कारोबार की बुनियादी शर्तें हैं।
निष्कर्ष: भिलाई में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई ने दूध, पनीर और मिठाइयों की गुणवत्ता को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं। अब आगे की चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि जांच में मिली कमियों को दूर किया जाए, कानूनी कार्रवाई निष्पक्ष तरीके से पूरी हो और ग्राहकों को सुरक्षित खाद्य पदार्थ मिलें। त्योहारों के मौसम में मिठाइयां खरीदने वाले लोगों के लिए गुणवत्ता और स्वच्छता पर ध्यान देना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी कारोबारियों और निगरानी तंत्र की जवाबदेही भी है।




