Mining Crackdown: महासमुंद में अवैध खनन पर बड़ा एक्शन, मुरूम निकालती चेन माउंटेन मशीन जब्त
महासमुंद। सड़क निर्माण जैसे सार्वजनिक कार्यों में इस्तेमाल होने वाले खनिज की निकासी भी नियमों के दायरे में आती है। महासमुंद जिले में इसी सवाल को लेकर खनिज विभाग ने कार्रवाई करते हुए मुरूम के कथित अवैध उत्खनन में लगी एक चेन माउंटेन मशीन जब्त कर सील कर दी। मामला झगरेनडीह से कुशभांठा सड़क निर्माण से जुड़ा है, जहां रामपुर की शासकीय और निजी भूमि से मुरूम निकाला जा रहा था।
21 अक्टूबर 2026 को की गई इस कार्रवाई के बाद अब आगे की प्रक्रिया छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम, 2015 के तहत की जाएगी। यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि सड़क निर्माण के लिए मिट्टी और मुरूम की जरूरत के बावजूद उनके उत्खनन के लिए निर्धारित अनुमति और नियमों का पालन करना जरूरी है।
सड़क निर्माण के लिए मुरूम की निकासी पर कार्रवाई क्यों?
सड़क निर्माण में मुरूम का इस्तेमाल आम तौर पर मिट्टी की परत तैयार करने और सड़क के आधार को मजबूत बनाने जैसे कामों में होता है। लेकिन निर्माण सामग्री की जरूरत अपने आप में खनन की अनुमति नहीं बन जाती। उत्खनन कहां हो रहा है, भूमि का स्वामित्व किसका है और आवश्यक अनुमति ली गई है या नहीं—ये सभी पहलू महत्वपूर्ण होते हैं।
महासमुंद में खनिज विभाग की कार्रवाई इसी व्यापक नियामकीय जिम्मेदारी को रेखांकित करती है। यदि किसी निर्माण परियोजना के लिए खनिज निर्धारित प्रक्रिया के बिना निकाला जाता है, तो इससे सरकारी राजस्व, भूमि के उपयोग और पर्यावरणीय प्रबंधन से जुड़े सवाल पैदा हो सकते हैं।
हालांकि, उपलब्ध सूचना में अनुमति संबंधी उल्लंघन का विस्तृत ब्यौरा नहीं दिया गया है। इसलिए अंतिम जिम्मेदारी और नियमों के उल्लंघन की प्रकृति का निर्धारण आगे की विभागीय कार्रवाई के आधार पर ही किया जाना चाहिए।
झगरेनडीह-कुशभांठा सड़क परियोजना से जुड़ा मामला
जानकारी के अनुसार, लोक निर्माण विभाग (PWD) के अंतर्गत झगरेनडीह से कुशभांठा सड़क का निर्माण दीपक अग्रवाल कंपनी, शिवरीनारायण द्वारा किया जा रहा है। इसी परियोजना के संदर्भ में रामपुर की शासकीय और निजी भूमि से मुरूम उत्खनन किए जाने के दौरान खनिज टीम ने मशीन जब्त की।
यह तथ्य अपने आप में यह साबित नहीं करता कि सड़क निर्माण कंपनी या परियोजना से जुड़े किसी व्यक्ति को दोषी ठहराया जा चुका है। जांच में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि उत्खनन किसके निर्देश पर किया जा रहा था, संबंधित भूमि से खनिज निकालने की अनुमति थी या नहीं और निकाले गए मुरूम का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था।
सार्वजनिक निर्माण परियोजनाओं में जिम्मेदारी तय करने के लिए ये सवाल अहम हैं, क्योंकि ठेकेदार, भूमि मालिक और खनिज उत्खनन करने वाले पक्ष की भूमिकाएं अलग-अलग हो सकती हैं।
मशीन जब्त होने के बाद क्या होगा?
चेन माउंटेन मशीन को जब्त कर सील कर दिया गया है। अब विभाग छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम, 2015 के तहत आगे की कार्रवाई करेगा। कार्रवाई का अंतिम परिणाम संबंधित तथ्यों, दस्तावेजों और लागू नियमों की जांच पर निर्भर करेगा।
इस तरह के मामलों में केवल मशीन जब्त करना ही पर्याप्त नहीं होता। प्रभावी कार्रवाई के लिए उत्खनन की मात्रा, भूमि की स्थिति, अनुमति दस्तावेजों और खनिज के इस्तेमाल से जुड़े रिकॉर्ड की जांच भी महत्वपूर्ण हो सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलती है कि नियमों का उल्लंघन किस स्तर पर हुआ और आगे किस प्रकार की कार्रवाई आवश्यक है।
अवैध खनन रोकना राजस्व के साथ पर्यावरण के लिए भी जरूरी
मुरूम जैसे गौण खनिजों का अनियंत्रित उत्खनन जमीन की प्राकृतिक बनावट को प्रभावित कर सकता है। स्थान और उत्खनन की मात्रा के आधार पर इससे जल निकासी, भूमि के कटाव और आसपास की जमीन के उपयोग पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है। इसके अतिरिक्त, नियमों के विपरीत खनिज निकालने से सरकार को मिलने वाले राजस्व पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
इसीलिए खनन संबंधी निगरानी को केवल दंडात्मक कार्रवाई तक सीमित नहीं रखा जा सकता। निर्माण परियोजनाओं में सामग्री की जरूरत का आकलन, वैध स्रोतों से आपूर्ति और अनुमति संबंधी दस्तावेजों की जांच भी उतनी ही जरूरी है।
यदि जिले में ऐसी निगरानी लगातार और पारदर्शी ढंग से होती है, तो इससे वैध खनन करने वालों के लिए समान प्रतिस्पर्धा का माहौल बनाने और सार्वजनिक निर्माण कार्यों में नियमों के पालन को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
आगे की जांच पर रहेगी नजर
इस कार्रवाई के दौरान खनिज अधिकारी फागुलाल नागेश, सहायक खनिज अधिकारी देवेन्द्र कुमार साहू तथा सिपाही प्रशांत कालू और मनीष ढीढी मौजूद रहे।
अब महत्वपूर्ण यह होगा कि विभाग जांच के आधार पर अनुमति, भूमि और उत्खनन से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट करे। सड़क निर्माण की गति जरूरी है, लेकिन विकास कार्यों के लिए इस्तेमाल होने वाली सामग्री का स्रोत भी वैध होना चाहिए। महासमुंद का यह मामला इसी संतुलन की याद दिलाता है—सार्वजनिक निर्माण और खनिज नियमों का पालन एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि जिम्मेदार विकास के दो जरूरी हिस्से हैं।




