Bilaspur Dussehra Controversy: बड़ा विवाद, 24 लाख के सरकारी आयोजन पर उठे सवाल; शहर में आज जलेगा रावण
Bilaspur Dussehra Controversy: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में विजयादशमी का उत्साह इस बार एक बड़े विवाद के बीच देखने को मिल रहा है। शहर के अलग-अलग मैदानों में रावण दहन, राम-रावण युद्ध के मंचन, धार्मिक झांकियों और आतिशबाजी की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। वहीं, साइंस कॉलेज मैदान में नगर निगम के 24 लाख रुपये के सरकारी आयोजन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अरपांचल लोकमंच ने आयोजन के सरकारीकरण का विरोध करते हुए उसी मैदान में अलग से रावण दहन करने की घोषणा की है। ऐसे में इस बार दशहरा केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन के इस्तेमाल और वर्षों से चली आ रही स्थानीय परंपराओं को लेकर बहस का विषय भी बन गया है।
Bilaspur News: दशहरा उत्सव के बीच बजट और परंपरा की बहस
साइंस कॉलेज मैदान का विवाद इस सवाल पर केंद्रित है कि पारंपरिक सार्वजनिक आयोजनों में प्रशासन की भूमिका कितनी होनी चाहिए। नगर निगम इस मैदान में आयोजन के लिए 24 लाख रुपये खर्च कर रहा है। दूसरी ओर, अरपांचल लोकमंच का दावा है कि वह पिछले पांच वर्षों से बिना सरकारी सहायता और चंदा लिए विजयादशमी उत्सव आयोजित करता रहा है।
मंच का आरोप है कि जिस उत्सव को संगठन अपने स्तर पर आयोजित करता रहा, उसका सरकारीकरण किया जा रहा है। संगठन ने निर्धारित बजट की जरूरत और राशि के उपयोग पर भी सवाल उठाए हैं।
हालांकि, केवल बजट तय होने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सरकारी खर्च अनुचित है। इसके लिए यह देखना जरूरी होगा कि राशि किन मदों में खर्च की जा रही है, आयोजन का दायरा क्या है और सुरक्षा, मंच व्यवस्था, सांस्कृतिक कार्यक्रमों तथा अन्य सुविधाओं पर कितना व्यय प्रस्तावित है।
सार्वजनिक धन से होने वाले आयोजनों में खर्च का स्पष्ट विवरण और जवाबदेही विवाद कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
पिछले साल अनुमति नहीं मिलने का भी विवाद से जुड़ा है मामला
अरपांचल लोकमंच का कहना है कि पिछले साल समय से पहले आवेदन देने के बावजूद उसे आयोजन की अनुमति नहीं मिली थी। इसके विरोध में संगठन ने कलेक्टोरेट का घेराव किया था।
इस बार मंच ने विरोध के बावजूद साइंस कॉलेज मैदान में रावण दहन करने की घोषणा की है। संगठन के अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा के मुताबिक, मंच अपनी पुरानी परंपरा जारी रखना चाहता है।
अब इस मामले में प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। एक तरफ धार्मिक आयोजन और स्थानीय परंपरा का सवाल है, तो दूसरी तरफ सार्वजनिक स्थल के उपयोग, अनुमति की शर्तों और कानून-व्यवस्था को बनाए रखने की जिम्मेदारी भी है।
मैदान में एक ही समय पर अलग-अलग आयोजनों की स्थिति बनती है, तो भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और कार्यक्रमों के संचालन को लेकर स्पष्ट समन्वय जरूरी होगा। विवाद का शांतिपूर्ण समाधान सभी पक्षों के हित में रहेगा।
24 लाख रुपये का खर्च क्यों बना चर्चा का विषय?
धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में सरकारी भागीदारी को लेकर अक्सर दो अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आते हैं। एक पक्ष मानता है कि बड़े सार्वजनिक उत्सवों में प्रशासन की मदद से बेहतर व्यवस्था, सुरक्षा और व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित की जा सकती है। दूसरा पक्ष स्थानीय समितियों की स्वायत्तता और पुरानी परंपराओं को बनाए रखने पर जोर देता है।
बिलासपुर का मामला भी इसी व्यापक बहस से जुड़ता है। यहां सबसे अहम सवाल केवल खर्च की राशि नहीं, बल्कि बजट का औचित्य और निर्णय लेने की प्रक्रिया है।
यदि आयोजन पर खर्च का विवरण सार्वजनिक हो, संबंधित समितियों से समय रहते संवाद किया जाए और मैदान के इस्तेमाल के नियम स्पष्ट हों, तो भविष्य में इस तरह के विवादों की आशंका कम हो सकती है। इससे सरकारी आयोजनों के प्रति लोगों का भरोसा भी मजबूत होगा।
Bilaspur Dussehra 2026: शहर में कहां-कहां होगा रावण दहन?
विवाद के बीच बिलासपुर के विभिन्न इलाकों में दशहरा उत्सव की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। आयोजनों में अलग-अलग आकार के रावण के पुतले, राम दरबार की झांकियां, राम-रावण युद्ध का मंचन और आतिशबाजी मुख्य आकर्षण रहेंगे।
1. रेलवे NEI ग्राउंड
हिंदुस्तानी सेवा समाज यहां 76वीं बार दशहरा उत्सव आयोजित कर रहा है। करीब 65 फीट के रावण का दहन शाम 6 बजे किया जाना निर्धारित है। रामलीला और राम-रावण युद्ध के मंचन के बाद लगभग एक घंटे तक आतिशबाजी होगी।
2. पुलिस मैदान
नगर निगम के आयोजन में करीब 60 फीट के रावण का दहन शाम 7 बजे किया जाना है। श्रीराम परिवार की झांकी के बाद रिमोट से दहन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
3. साइंस कॉलेज मैदान
यहां केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू के रावण दहन कार्यक्रम में शामिल होने की जानकारी दी गई है। कार्यक्रम को लेकर अरपांचल लोकमंच और नगर निगम के बीच विवाद बना हुआ है। मैदान में आयोजन की व्यवस्था और अलग-अलग कार्यक्रमों के संचालन को लेकर प्रशासनिक समन्वय महत्वपूर्ण रहेगा।
4. पुराना बस स्टैंड
हनुमान मंदिर चौक स्थित मैदान में दशहरा उत्सव समिति 51वें वर्ष का आयोजन कर रही है। यहां लगभग 65 फीट का रावण जलाया जाएगा। श्रीराम दरबार की झांकी, राम-रावण युद्ध और आतिशबाजी भी कार्यक्रम का हिस्सा होंगे। रावण दहन शाम 7 बजे निर्धारित है।
5. लालबहादुर शास्त्री स्कूल मैदान
यहां 47 वर्षों से दशहरा उत्सव मनाया जा रहा है। इस बार पुतले की विशेष सजावट आकर्षण का केंद्र रहेगी। भगवान राम, लक्ष्मण, हनुमान और वानर सेना की झांकी नगर भ्रमण के बाद मैदान पहुंचेगी। रावण दहन शाम 6 बजे निर्धारित है।
6. नूतन चौक, सरकंडा
युवा दशहरा उत्सव समिति यहां 51वें वर्ष उत्सव आयोजित कर रही है। करीब 71 फीट का रावण शहर के सबसे ऊंचे पुतलों में शामिल होगा। रिमोट से रावण दहन रात 8 बजे किया जाना है।
7. मिनोचा कॉलोनी
मिनोचा कॉलोनी वेलफेयर सोसायटी नौवें वर्ष दशहरा उत्सव आयोजित कर रही है। यहां करीब 55 फीट के रावण का दहन शाम 7 बजे निर्धारित है। आयोजकों ने सामाजिक एकता, सद्भाव और भाईचारे का संदेश देने पर जोर दिया है।
8. चांटीडीह मेला स्थल
दशहरा उत्सव समिति के 27वें आयोजन में करीब 40 फीट का रावण जलाया जाएगा। कार्यक्रम शाम 7 बजे निर्धारित है।
9. देवकीनंदन स्कूल मैदान
तिलक नगर विजयादशमी उत्सव समिति की ओर से यहां रावण दहन और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। लगभग एक घंटे की आतिशबाजी कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहेगी। रावण दहन शाम 7 बजे निर्धारित है।
नोट: कार्यक्रमों के समय और व्यवस्थाओं में बदलाव संभव है। आयोजन स्थल पर पहुंचने से पहले स्थानीय प्रशासन की ताजा सूचना देखना उचित रहेगा।
बाजारों में रावण के पुतलों की मांग, कारीगरों को मिला काम
विजयादशमी का असर शहर के बाजारों में भी दिखाई दे रहा है। गांधी चौक, पुराना बस स्टैंड, शनिचरी बाजार, बृहस्पति बाजार और बुधवारी बाजार में छोटे-बड़े रावण के पुतलों की बिक्री हुई।
पुतलों की कीमत लगभग 200 रुपये से शुरू होकर 10 हजार रुपये तक बताई गई है। बड़े आकार के कुछ पुतले 15 से 25 हजार रुपये तक की कीमत पर ऑर्डर के अनुसार तैयार किए गए हैं।
इस कारोबार से स्थानीय कारीगरों और छोटे व्यापारियों को मौसमी आमदनी का अवसर मिलता है। बांस, कागज, रंग और सजावटी सामग्री से तैयार होने वाले पुतलों के निर्माण में मेहनत और समय लगता है। बड़े आयोजनों के लिए समय पर पुतले तैयार करना कारीगरों के लिए महत्वपूर्ण होता है।
इस तरह दशहरा धार्मिक आस्था के साथ स्थानीय बाजार और पारंपरिक हस्तकला से भी जुड़ा हुआ है।
आतिशबाजी और झांकियों के बीच सुरक्षा भी जरूरी
बिलासपुर के बड़े आयोजनों में परिवारों और बच्चों की बड़ी संख्या में पहुंचने की संभावना है। ऐसे में भीड़ को नियंत्रित करना, प्रवेश और निकास के रास्ते खुले रखना, आतिशबाजी के लिए सुरक्षित दूरी बनाए रखना और आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना आवश्यक होगा।
रावण दहन के दौरान दर्शकों को निर्धारित सुरक्षा सीमा के भीतर ही रहना चाहिए। बच्चों को पटाखों और जलते पुतलों के पास जाने से रोकना चाहिए। आयोजकों के लिए भीड़ प्रबंधन और अग्निशमन की व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
सार्वजनिक उत्सव की सफलता केवल भव्य सजावट और ऊंचे पुतलों से नहीं, बल्कि इस बात से भी तय होती है कि लोग सुरक्षित तरीके से कार्यक्रम का आनंद ले सकें।




