Raipur Food Safety: बड़ी कार्रवाई! गंदगी मिलने पर 4 दुकानों के लाइसेंस सस्पेंड, 160 किलो खाद्य सामग्री नष्ट
मिठाई दुकानों पर सख्त कार्रवाई, रायपुर में गंदगी मिलने पर 4 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित
रायपुर। त्योहार हो या सामान्य दिन, मिठाई और पनीर खरीदते समय ग्राहक अक्सर स्वाद, कीमत और ताजगी पर ध्यान देते हैं। लेकिन खाद्य पदार्थ किस वातावरण में तैयार किए गए हैं और उन्हें किस तरह सुरक्षित रखा गया है, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसी पहलू को लेकर रायपुर में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने चार प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई की है।
निरीक्षण के दौरान साफ-सफाई की कमी और खाद्य पदार्थों के रखरखाव में लापरवाही सामने आने के बाद विभाग ने करीब 150 किलो मिठाई और 10 किलो पनीर नष्ट करवाया। इसके साथ ही संबंधित चारों प्रतिष्ठानों के खाद्य लाइसेंस निलंबित कर कम से कम तीन दिन तक दुकानें बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं।
यह कार्रवाई केवल दुकानों की स्वच्छता तक सीमित नहीं है। इसका सीधा संबंध ग्राहकों की सेहत, खाद्य कारोबारियों की जवाबदेही और बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की सुरक्षा से है।
तेलीबांधा से पचपेड़ी नाका तक हुई जांच
खाद्य एवं औषधि प्रशासन के नियंत्रक दीपक अग्रवाल के नेतृत्व में टीम ने तेलीबांधा क्षेत्र की न्यू जनता स्वीट्स, मां अंबे स्वीट्स और स्वीट हट एंड बेकरी का निरीक्षण किया। इसके अलावा पचपेड़ी नाका स्थित रायपुर ढाबा की भी जांच की गई।
विभाग के अनुसार, निरीक्षण में प्रतिष्ठानों की स्वच्छता व्यवस्था संतोषजनक नहीं मिली। खाद्य पदार्थों को रखने के तरीके में भी लापरवाही पाई गई। इसके बाद मौके पर रखी करीब 160 किलो खाद्य सामग्री को नष्ट करवाने की कार्रवाई की गई।
विभाग ने चारों प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित करते हुए साफ-सफाई और रखरखाव की व्यवस्था में सुधार होने तक कम से कम तीन दिन दुकानें बंद रखने के निर्देश दिए हैं।
खोवा से कलाकंद तक, कई खाद्य पदार्थों के नमूने लिए
कार्रवाई के दौरान विभागीय टीम ने केवल दिखाई देने वाली गंदगी पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच के लिए नमूने भी एकत्र किए।
इनमें खोवा, कुंदा, पनीर, बूंदी, बेसन के लड्डू, कलाकंद और छेने से बनी मिठाइयां शामिल हैं। नमूनों को प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया है।
इन जांच रिपोर्टों का महत्व इसलिए भी है, क्योंकि किसी खाद्य पदार्थ का दिखने में ठीक होना उसकी गुणवत्ता या सुरक्षित होने का निर्णायक प्रमाण नहीं है। कुछ समस्याओं की पुष्टि के लिए प्रयोगशाला परीक्षण आवश्यक होता है।
यदि जांच में खाद्य पदार्थ निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए जाते हैं, तो संबंधित कारोबारियों के खिलाफ नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल नमूनों की रिपोर्ट आने से पहले किसी विशिष्ट खाद्य पदार्थ को अमानक घोषित करना उचित नहीं होगा।
गंदगी का जोखिम सिर्फ दुकान की छवि तक सीमित नहीं
खाद्य पदार्थों की तैयारी, भंडारण और बिक्री के दौरान स्वच्छता की अनदेखी होने पर दूषित भोजन का जोखिम बढ़ सकता है। मिठाइयों और पनीर जैसे उत्पादों को विशेष सावधानी के साथ संभालना पड़ता है। तापमान, नमी, साफ बर्तनों और सुरक्षित भंडारण की उचित व्यवस्था न होने पर उनकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
ऐसी परिस्थितियों में उपभोक्ताओं को खाद्य जनित बीमारियों का खतरा हो सकता है। हालांकि, इस कार्रवाई के संबंध में किसी उपभोक्ता के बीमार पड़ने की जानकारी सामने नहीं आई है।
खाद्य सुरक्षा का अर्थ केवल खराब दिखने वाले उत्पादों को हटाना नहीं है। कारोबारियों को नियमित सफाई, सुरक्षित भंडारण, स्वच्छ उपकरणों और खाद्य पदार्थों की उचित देखरेख की व्यवस्था बनाए रखनी होती है।
कारोबारियों के लिए क्या है इस कार्रवाई का संदेश?
चार प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित किए जाने से खाद्य कारोबारियों के लिए स्पष्ट संदेश जाता है कि स्वच्छता संबंधी नियमों की अनदेखी पर प्रशासन कार्रवाई कर सकता है।
खाद्य कारोबार चलाने वालों को कुछ बुनियादी बातों पर लगातार ध्यान देना चाहिए:
- खाद्य पदार्थों को साफ और सुरक्षित स्थान पर रखना।
- मिठाइयों और दुग्ध उत्पादों के लिए उपयुक्त भंडारण व्यवस्था बनाए रखना।
- तैयारी और बिक्री में इस्तेमाल होने वाले बर्तनों तथा उपकरणों की नियमित सफाई करना।
- खाद्य पदार्थों को दूषित होने से बचाने के लिए उचित प्रबंधन अपनाना।
- खाद्य सुरक्षा से जुड़े निर्धारित मानकों और लाइसेंस संबंधी शर्तों का पालन करना।
इन उपायों से न केवल उपभोक्ताओं की सुरक्षा बेहतर होती है, बल्कि कारोबार की विश्वसनीयता भी बनी रहती है।
प्रशासन की अगली चुनौती: नियमित निगरानी और नियमों का पालन
खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए छापेमारी और निरीक्षण महत्वपूर्ण हैं, लेकिन दीर्घकालिक सुधार के लिए नियमित निगरानी भी जरूरी है। दुकानों को स्वच्छता के मानकों के बारे में स्पष्ट जानकारी देना, कमियां मिलने पर सुधार सुनिश्चित करना और नियमों का उल्लंघन होने पर उचित कार्रवाई करना इस व्यवस्था के अहम हिस्से हैं।
कार्रवाई के दौरान उपायुक्त आशीष यादव, अभिहित अधिकारी विनोद गुप्ता, वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी कंचन वर्मा तथा खाद्य सुरक्षा अधिकारी सतीश राज, संतोष ध्रुव और डोमेन्द्र ध्रुव भी मौजूद रहे।
विभाग ने बताया कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए निरीक्षण अभियान आगे भी जारी रहेगा। अब प्रयोगशाला की रिपोर्ट और संबंधित प्रतिष्ठानों में स्वच्छता संबंधी सुधारों की स्थिति इस मामले में आगे की कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण होगी।
ग्राहकों को मिठाई खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
उपभोक्ता भी कुछ सावधानियां अपनाकर जोखिम कम कर सकते हैं। मिठाई खरीदते समय दुकान और बिक्री काउंटर की साफ-सफाई देखें। खुले खाद्य पदार्थों को धूल, मक्खियों और अन्य दूषित तत्वों से बचाकर रखा गया है या नहीं, इस पर ध्यान दें। दुग्ध उत्पादों के भंडारण की स्थिति भी देखें।
यदि किसी उत्पाद की गंध, रंग या बनावट असामान्य लगे, तो उसे खरीदने से बचें। हालांकि, केवल देखकर खाद्य पदार्थ की सुरक्षा की पूरी पुष्टि नहीं की जा सकती।
खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर शिकायत होने पर उपभोक्ता संबंधित खाद्य सुरक्षा अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं।




