Korba News: बाल संप्रेक्षण गृह से फरार हुआ नाबालिग, सुरक्षा में बड़ी चूक से मचा हड़कंप
कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में बाल संप्रेक्षण गृह की सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। कोड़िया स्थित संप्रेक्षण गृह से चोरी के मामले में रखे गए एक अपचारी बालक के फरार होने की घटना सामने आई है। बताया जा रहा है कि बालक को यहां आए अभी करीब 20 दिन ही हुए थे। सुबह नियमित गिनती के दौरान उसके गायब होने का पता चला, जिसके बाद पुलिस ने उसकी तलाश शुरू कर दी।
यह घटना केवल एक नाबालिग के फरार होने तक सीमित नहीं है। इससे संस्थान की निगरानी व्यवस्था, कर्मचारियों की जिम्मेदारी और पहले सामने आ चुकी ऐसी घटनाओं के बाद किए गए सुरक्षा उपायों पर भी सवाल खड़े होते हैं।
सुबह गिनती के दौरान खुला मामला, चैनल गेट से निकलने की जानकारी
मिली जानकारी के अनुसार, सिविल लाइन थाना क्षेत्र में चोरी की घटना के सिलसिले में पुलिस ने पोड़ीबहार इलाके में रहने वाले एक अपचारी बालक के खिलाफ कार्रवाई की थी। इसके बाद 27 सितंबर को उसे कोड़िया स्थित बाल संप्रेक्षण गृह में दाखिल कराया गया था।
बताया जा रहा है कि सुबह मुख्य द्वार खोले जाने के दौरान कर्मचारी और सुरक्षा में तैनात जवान अपने नियमित काम में व्यस्त थे। इसी बीच बालक चैनल गेट खोलकर वहां से निकल गया। कुछ समय बाद जब संस्थान में रह रहे बच्चों की गिनती की गई, तब उसकी अनुपस्थिति सामने आई।
कर्मचारियों ने पहले अपने स्तर पर बालक को तलाशने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद सीएसईबी पुलिस चौकी को सूचना दी गई। पुलिस अब उसके संभावित ठिकानों की जानकारी जुटाने में लगी है।
बार-बार ऐसी घटनाएं क्यों बढ़ाती हैं चिंता?
बाल संप्रेक्षण गृह में कानून के संपर्क में आए नाबालिगों को रखा जाता है। ऐसे संस्थानों का उद्देश्य केवल निगरानी करना नहीं, बल्कि बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना और उनके सुधार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना भी है।
ऐसे में किसी बालक का परिसर से बाहर निकल जाना सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठाता है। यदि किसी संस्थान में पहले भी इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं, तो प्रत्येक घटना के बाद सुरक्षा संबंधी कमियों की समीक्षा और सुधार की जरूरत और बढ़ जाती है।
सिर्फ मुख्य द्वार पर सुरक्षा कर्मियों की तैनाती पर्याप्त नहीं होती। प्रवेश और निकास की निगरानी, चैनल गेट की व्यवस्था, कर्मचारियों के बीच जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा, नियमित गिनती और आपात स्थिति में तत्काल सूचना देने की प्रक्रिया भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।
हालांकि, मौजूदा घटना में सुरक्षा की वास्तविक चूक कहां हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
पुलिस घर और रिश्तेदारों से जुटा रही जानकारी
कोरबा के सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी के अनुसार, बाल संप्रेक्षण गृह से अपचारी बालक के फरार होने की सूचना मिलने के बाद उसकी तलाश शुरू कर दी गई है। पुलिस उसके घर और रिश्तेदारों से पूछताछ कर रही है, ताकि उसके संभावित ठिकाने का पता लगाया जा सके।
फिलहाल बालक की बरामदगी को लेकर कोई अंतिम जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस की जांच के साथ-साथ संप्रेक्षण गृह की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा भी महत्वपूर्ण होगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि बालक किस परिस्थिति में परिसर से बाहर निकलने में सफल हुआ।
सुरक्षा के साथ बच्चों के सुधार पर भी ध्यान जरूरी
बाल संप्रेक्षण गृहों में सुरक्षा और सुधार, दोनों उद्देश्यों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। अत्यधिक कठोर माहौल बच्चों के पुनर्वास के उद्देश्य को प्रभावित कर सकता है, जबकि निगरानी में लापरवाही बच्चों की सुरक्षा और संस्थान की जिम्मेदारी दोनों के लिए जोखिम पैदा करती है।
इसलिए ऐसे मामलों में केवल फरार हुए बालक की तलाश तक कार्रवाई सीमित नहीं रहनी चाहिए। संस्थान में प्रवेश और निकास की प्रक्रिया, कर्मचारियों की उपलब्धता, निगरानी व्यवस्था और निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का आकलन भी किया जाना चाहिए।
इसके अलावा, बच्चों की व्यक्तिगत परिस्थितियों और व्यवहार संबंधी जरूरतों को समझना भी जरूरी है। समय पर काउंसलिंग, नियमित संवाद और प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता से तनावपूर्ण परिस्थितियों को पहचानने में मदद मिल सकती है। ये उपाय सुरक्षा का विकल्प नहीं, बल्कि प्रभावी निगरानी और पुनर्वास व्यवस्था के पूरक हैं।
आगे क्या होगा?
अब इस मामले में दो अहम पहलुओं पर नजर रहेगी। पहला, पुलिस फरार बालक को कब तक तलाश पाती है। दूसरा, संप्रेक्षण गृह की सुरक्षा व्यवस्था में सामने आने वाली कमियों को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
यदि जांच में सुरक्षा संबंधी लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदारी तय करने के साथ भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस उपाय करना जरूरी होगा। पहले हुई घटनाओं की भी समीक्षा की जानी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पुराने अनुभवों से क्या सबक लिया गया।




