खंडवा के कोविद की शानदार जीत: चीन में 70 देशों को पीछे छोड़कर जीता सिल्वर मेडल, अब PM से मुलाकात की उम्मीद
ग्रामीण अंचल में शुरुआती पढ़ाई से लेकर अंतरराष्ट्रीय कौशल प्रतियोगिता के मंच तक पहुंचना आसान नहीं होता। खंडवा के कोविद अजय गंगराड़े ने अपनी मेहनत और रचनात्मक प्रतिभा के दम पर इसी सफर को एक बड़ी उपलब्धि में बदल दिया है। चीन में आयोजित वर्ल्ड स्किल प्रतियोगिता में उन्होंने डिजिटल इंटरएक्टिव मीडिया डिजाइन श्रेणी में रजत पदक जीतकर भारत का गौरव बढ़ाया।
इस प्रतियोगिता में 70 देशों के करीब 1,400 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। ऐसे प्रतिस्पर्धी माहौल में पदक जीतना केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि भारत में डिजाइन, डिजिटल क्रिएटिविटी और तकनीकी कौशल की बढ़ती क्षमता का भी संकेत है। कोविद की इस उपलब्धि से मध्य प्रदेश के खंडवा और पंधाना क्षेत्र में उत्साह का माहौल है।
डिजिटल डिजाइन में अंतरराष्ट्रीय पहचान
कोविद फिलहाल मुंबई स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) से बैचलर ऑफ डिजाइन की पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने डिजिटल इंटरएक्टिव मीडिया डिजाइन श्रेणी में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए रजत पदक हासिल किया।
डिजिटल इंटरएक्टिव मीडिया डिजाइन ऐसा क्षेत्र है, जिसमें तकनीक और रचनात्मकता का मेल होता है। इसमें डिजिटल अनुभव, इंटरएक्टिव कंटेंट, यूजर इंटरफेस और ऐसे डिजाइन समाधान विकसित करने की क्षमता अहम होती है, जिनसे लोग तकनीक के साथ सहज तरीके से जुड़ सकें।
आज कंपनियों से लेकर शिक्षा, मनोरंजन और सार्वजनिक सेवाओं तक डिजिटल अनुभवों की मांग बढ़ रही है। ऐसे में इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली सफलता भविष्य में उच्च स्तरीय प्रोजेक्ट, शोध और पेशेवर अवसरों के रास्ते खोल सकती है।
प्रतियोगिता में भारत ने कुल छह रजत पदक हासिल किए। कोविद की उपलब्धि इसलिए भी खास है कि उन्होंने इस वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी विशेषज्ञता साबित की।
गांवों में हुई शुरुआती पढ़ाई, फिर वैश्विक मंच तक सफर
कोविद का परिवार मूल रूप से खंडवा जिले के पंधाना क्षेत्र के गांधवा गांव से जुड़ा है। उनकी शुरुआती शिक्षा कालमुखी और मातपुर जैसे ग्रामीण इलाकों में हुई। इसके बाद पढ़ाई और कौशल विकास के जरिए उन्होंने अपने लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने का रास्ता तैयार किया।
उनके पिता डॉ. अजय गंगराड़े और माता सुनीता गंगराड़े मुंबई की सोमैया विद्याविहार यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं। परिवार की शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने सीखने के माहौल में योगदान दिया होगा, लेकिन अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रदर्शन के लिए प्रतिभागी को अपने कौशल, अभ्यास और दबाव में सही निर्णय लेने की क्षमता का प्रदर्शन करना पड़ता है।
कोविद की कहानी ग्रामीण शिक्षा और बड़े अवसरों के बीच संबंध को भी सामने लाती है। किसी छात्र की शुरुआती पढ़ाई छोटे कस्बे या गांव में हुई हो, तो इसका अर्थ यह नहीं कि उसकी संभावनाएं भी स्थानीय सीमाओं तक सिमट जाएंगी। सही मार्गदर्शन, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और प्रतिस्पर्धा तक पहुंच मिले तो ऐसे विद्यार्थी भी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ प्रतिभागियों के साथ मुकाबला कर सकते हैं।
बहन कोपल भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बना चुकी हैं पहचान
कोविद की बहन कोपल गंगराड़े भी डिजाइन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल कर चुकी हैं। उन्होंने 2022 में इंडिया स्किल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता था। वर्तमान में वह अमेरिका की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से ह्यूमन-सेंटर्ड डिजाइन में पीएचडी कर रही हैं।
ह्यूमन-सेंटर्ड डिजाइन में किसी उत्पाद या सेवा को विकसित करते समय उपयोगकर्ता की जरूरतों, अनुभवों और समस्याओं को केंद्र में रखा जाता है। डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के दौर में यह विशेषज्ञता महत्वपूर्ण होती जा रही है।
भाई-बहन की उपलब्धियां यह दिखाती हैं कि डिजाइन अब केवल सुंदर चीजें बनाने तक सीमित नहीं है। यह तकनीकी समाधान, उपयोगकर्ता अनुभव और वास्तविक समस्याओं को हल करने से जुड़ा एक व्यापक पेशेवर क्षेत्र बन चुका है।
खंडवा पहुंचने पर हुआ स्वागत
रजत पदक जीतने के बाद कोविद जब खंडवा पहुंचे, तो रेलवे स्टेशन पर परिजनों और गंगराड़े समाज के लोगों ने उनका स्वागत किया। समाज के पदाधिकारियों और स्थानीय लोगों ने उनकी उपलब्धि पर खुशी जताई।
स्थानीय स्तर पर ऐसे सम्मान का महत्व केवल समारोह तक सीमित नहीं रहता। इससे आसपास के विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिलता है कि पढ़ाई के साथ किसी विशिष्ट कौशल में महारत हासिल करना भी बड़े अवसरों तक पहुंचने का रास्ता बन सकता है।
हालांकि, ऐसी उपलब्धियों को स्थायी प्रेरणा में बदलने के लिए स्कूलों और संस्थानों में डिजाइन, डिजिटल मीडिया, तकनीकी प्रशिक्षण तथा कौशल प्रतियोगिताओं के बारे में जानकारी उपलब्ध कराना भी जरूरी है। प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को केवल बधाई ही नहीं, बल्कि आगे बढ़ने के लिए संसाधन और मार्गदर्शन भी मिलना चाहिए।
प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से मुलाकात की संभावना
परिवार की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, कोविद की प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से मुलाकात का कार्यक्रम प्रस्तावित है। बताया गया है कि मुलाकात के लिए उन्हें दिल्ली जाना पड़ सकता है। हालांकि, मुलाकात की निश्चित तारीख और आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं है।
यदि यह मुलाकात होती है, तो यह युवा कौशल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान देने का एक महत्वपूर्ण अवसर होगा। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में जीतने वाले विद्यार्थियों की उपलब्धियों को सामने लाना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि इससे कौशल आधारित शिक्षा और रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण को बढ़ावा मिल सकता है।
भारत के लिए क्यों अहम है ऐसी उपलब्धि?
भारत में युवा आबादी बड़ी है, लेकिन रोजगार के अवसरों का लाभ उठाने के लिए केवल डिग्री पर्याप्त नहीं होती। डिजाइन, डिजिटल मीडिया, तकनीकी सेवाओं और रचनात्मक उद्योगों में व्यावहारिक दक्षता की मांग लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है।
कोविद की सफलता तीन अहम संदेश देती है। पहला, विद्यार्थियों को अपनी रुचि के क्षेत्र में गहराई से कौशल विकसित करने का अवसर मिलना चाहिए। दूसरा, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएं प्रतिभाओं को अपने स्तर का आकलन करने और वैश्विक मानकों को समझने का मौका देती हैं। तीसरा, छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों तक ऐसे अवसरों की जानकारी पहुंचाना आवश्यक है।
कोविद अजय गंगराड़े का रजत पदक उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन इसका व्यापक महत्व उन विद्यार्थियों के लिए भी है जो अपने भविष्य को पारंपरिक करियर विकल्पों से आगे तलाशना चाहते हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि प्रतिभा को पहचान, प्रशिक्षण और सही मंच मिले तो स्थानीय पृष्ठभूमि वैश्विक सफलता की राह में बाधा नहीं बनती।



