5G की दौड़ को बड़ा झटका! भारत में 4G स्मार्टफोन्स की शानदार वापसी, 2027 तक बढ़ सकता है दबदबा
भारत में स्मार्टफोन खरीदने का फैसला हमेशा सिर्फ नई टेक्नोलॉजी के नाम पर नहीं होता। करोड़ों ग्राहकों के लिए सबसे अहम सवाल अब भी यही है—कम कीमत में ऐसा फोन मिले जो रोजमर्रा के काम आसानी से कर सके। यही वजह है कि 5G के तेजी से विस्तार के बीच भारतीय बाजार में 4G स्मार्टफोन्स फिर से अपनी जगह बनाते नजर आ रहे हैं।
काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुमान के मुताबिक 2026 में भारत में 4G स्मार्टफोन्स की शिपमेंट में करीब 3 फीसदी वृद्धि हो सकती है। इससे बाजार में इनकी हिस्सेदारी 2025 के करीब 11 फीसदी से बढ़कर 13 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है।
यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एक साल पहले तस्वीर बिल्कुल अलग थी। 2025 में 4G स्मार्टफोन्स की शिपमेंट में करीब 48 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई थी। ऐसे में 2026 में दोबारा मांग बढ़ना संकेत देता है कि भारतीय ग्राहक नई तकनीक को अपनाते हुए भी कीमत और उपयोगिता के बीच संतुलन तलाश रहे हैं।
5G के बजाय बेहतर 4G क्यों पसंद कर रहे ग्राहक?
5G स्मार्टफोन का सबसे बड़ा आकर्षण तेज नेटवर्क और भविष्य के लिए तैयार डिवाइस होना है। लेकिन हर ग्राहक के लिए सबसे तेज कनेक्टिविटी ही प्राथमिकता नहीं होती।
सोशल मीडिया, वीडियो स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन पढ़ाई, डिजिटल पेमेंट, वीडियो कॉल और सामान्य ब्राउजिंग जैसे ज्यादातर रोजमर्रा के काम 4G नेटवर्क पर भी आसानी से किए जा सकते हैं। ऐसे में अगर समान बजट में ग्राहक को 5G फोन के बजाय बेहतर स्क्रीन, ज्यादा क्षमता वाली बैटरी या बेहतर कैमरा वाला 4G डिवाइस मिलता है, तो खरीद का फैसला दूसरी दिशा में जाना स्वाभाविक है।
यानी बाजार में सवाल यह नहीं रह गया है कि 4G पुरानी तकनीक है या 5G नई, बल्कि सवाल यह है कि ग्राहक अपने पैसे के बदले सबसे उपयोगी डिवाइस कौन सा पा रहा है।
स्मार्टफोन के महंगे होते पुर्जों ने बदली तस्वीर
4G की वापसी के पीछे स्मार्टफोन कंपोनेंट्स की लागत भी अहम भूमिका निभा रही है। 5G डिवाइस को तैयार करने में अतिरिक्त हार्डवेयर और कनेक्टिविटी से जुड़े घटकों की जरूरत होती है। लागत बढ़ने पर इसका असर अंतिम कीमत पर भी पड़ता है।
बजट सेगमेंट में यह अंतर ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। कुछ हजार रुपये की कीमत का अंतर भी ऐसे ग्राहकों के लिए निर्णायक हो सकता है जिनका स्मार्टफोन खरीदने का बजट सीमित है।
यही वजह है कि कंपनियां ऐसे बाजार में 4G मॉडल पेश कर रही हैं जहां वे महंगे 5G हार्डवेयर पर खर्च किए बिना स्क्रीन, डिजाइन, कैमरा और बैटरी जैसे फीचर्स पर ज्यादा ध्यान दे सकती हैं।
₹10 हजार से ₹20 हजार का सेगमेंट बना नया मैदान
4G स्मार्टफोन्स की वापसी का सबसे दिलचस्प पहलू उनकी कीमत है। पहले 4G मॉडल मुख्य रूप से बेहद सस्ते या एंट्री-लेवल फोन के रूप में देखे जाते थे। अब तस्वीर कुछ बदलती नजर आ रही है।
काउंटरपॉइंट के अनुसार ₹10,000 से ₹20,000 के सेगमेंट में 4G फोन पेश करने वाले ब्रांड्स की संख्या 2025 में करीब दो थी, जो 2026 में बढ़कर 12 तक पहुंच गई है।
यह बदलाव बताता है कि कंपनियां 4G को केवल कम कीमत वाले ग्राहकों तक सीमित विकल्प नहीं मान रहीं। वे इस तकनीक का इस्तेमाल ऐसे फोन बनाने में भी कर रही हैं जिनमें बेहतर हार्डवेयर देकर ग्राहक को आकर्षित किया जा सके।
क्या यह 5G के खिलाफ वापसी है?
इसे 5G की हार कहना सही नहीं होगा। भारत में 5G का विस्तार अपनी जगह जारी है और लंबे समय में नई पीढ़ी की कनेक्टिविटी का महत्व बढ़ना तय है।
4G की मौजूदा वापसी को ज्यादा सही तरीके से बजट स्मार्टफोन बाजार की प्रतिक्रिया के रूप में समझा जा सकता है। जहां महंगे कंपोनेंट्स और सीमित बजट के बीच कंपनियों को उत्पाद रणनीति बदलनी पड़ रही है, वहीं ग्राहक भी अपनी वास्तविक जरूरतों के हिसाब से विकल्प चुन रहे हैं।
दूसरे शब्दों में, भारत का स्मार्टफोन बाजार एक साथ दो दिशाओं में आगे बढ़ सकता है—प्रीमियम और ऊंचे बजट में 5G का विस्तार और कीमत-संवेदनशील वर्ग में मजबूत 4G मांग।
2027 तक भी जारी रह सकता है ट्रेंड
काउंटरपॉइंट के अनुमान के मुताबिक 4G स्मार्टफोन्स की हिस्सेदारी 2027 में करीब 15 फीसदी तक पहुंच सकती है। अगर ऐसा होता है तो यह स्पष्ट संकेत होगा कि 4G केवल पुराने स्टॉक की बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि कंपनियां और ग्राहक दोनों इसे एक व्यावहारिक विकल्प के तौर पर स्वीकार कर रहे हैं।
हालांकि इस ट्रेंड का भविष्य कई चीजों पर निर्भर करेगा। स्मार्टफोन कंपोनेंट्स की कीमत, 5G डिवाइस की औसत बिक्री कीमत, बजट 5G चिपसेट की उपलब्धता और भारतीय ग्राहकों की आय क्षमता—ये सभी बाजार की दिशा बदल सकते हैं।
ग्राहकों के लिए इसका मतलब क्या है?
इस बदलाव का सबसे सीधा फायदा खरीदारों को मिल सकता है। अगर कंपनियां 4G मॉडल्स के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ाती हैं, तो ₹10,000 से ₹20,000 के सेगमेंट में ग्राहकों को बेहतर डिस्प्ले, कैमरा, बैटरी और डिजाइन वाले विकल्प मिल सकते हैं।
लेकिन खरीदारी करते समय केवल नेटवर्क टेक्नोलॉजी देखकर फैसला करना भी उचित नहीं होगा। फोन खरीदने से पहले यह देखना ज्यादा जरूरी है कि अगले तीन-चार साल में डिवाइस की उपयोगिता, सॉफ्टवेयर अपडेट, बैटरी और नेटवर्क जरूरतों के हिसाब से वह कितना टिकाऊ रहेगा।



