स्वरा भास्कर का चौंकाने वाला खुलासा: नशे में डायरेक्टर ने कमरे का दरवाजा खटखटाया, बोला- ‘क्या मैं हग कर सकता हूं?’
बॉलीवुड अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने अपने करियर के शुरुआती दौर से जुड़ा एक ऐसा अनुभव साझा किया है, जिसने फिल्म इंडस्ट्री में वर्कप्लेस बाउंड्री और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। रियलिटी शो Rise & Fall 2 में बातचीत के दौरान स्वरा ने बताया कि एक फिल्म की शूटिंग के दौरान एक डायरेक्टर उनसे निजी तौर पर रोमांटिक सीन की रिहर्सल करना चाहता था। बाद में वह कथित तौर पर नशे की हालत में रात में उनके कमरे के बाहर पहुंचा और उनसे गले मिलने के लिए पूछा।
स्वरा के मुताबिक, उस समय वह करियर के शुरुआती दौर में थीं और शूटिंग लोकेशन पर अकेली महिला थीं। उन्होंने बताया कि स्थिति इतनी असहज हो गई थी कि उन्हें डर महसूस होने लगा था।
शुरुआत में ही स्वरा ने खींच दी थी अपनी सीमा
स्वरा ने बताया कि यह घटना Tanu Weds Manu के बाद की है, जब वह एक बड़ी फीमेल-लीड फिल्म की शूटिंग कर रही थीं। उनके अनुसार, डायरेक्टर उन्हें मैसेज और कविताएं भेजने लगा था और वह इस तरह की बातचीत को लेकर असहज महसूस करने लगी थीं।
मामला तब और संवेदनशील हुआ जब एक रोमांटिक सीन की रिहर्सल के लिए डायरेक्टर ने कथित तौर पर अकेले मिलने का प्रस्ताव रखा।
स्वरा ने सवाल किया कि अगर यह वास्तव में फिल्म की रिहर्सल है, तो इसमें अभिनेता, कैमरा टीम और दूसरे संबंधित लोग क्यों शामिल नहीं हैं। उन्होंने अकेले रिहर्सल करने से इनकार किया।
यही बिंदु इस पूरे अनुभव को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। किसी भी पेशेवर सेट पर कलाकार को यह अधिकार होना चाहिए कि वह किसी ऐसे अभ्यास या बैठक से इनकार कर सके जिसमें उसे असहजता महसूस हो।
शराब और पेशेवर माहौल के बीच बढ़ी असहजता
स्वरा के बयान के मुताबिक, एक मौके पर वह उस जगह पहुंचीं जहां डायरेक्टर और सिनेमैटोग्राफर शराब पी रहे थे। उन्होंने बताया कि इसके बाद वह वहां से निकल गईं।
लेकिन मामला वहीं खत्म नहीं हुआ।
स्वरा के अनुसार, उसी रात डायरेक्टर नशे की हालत में उनके कमरे के पास आया और दरवाजा खटखटाया। दरवाजा खोलने पर उसने उनसे गले मिलने के लिए पूछा। स्वरा ने बताया कि उन्होंने साफ तौर पर मना किया और उससे वहां से चले जाने को कहा क्योंकि उन्हें डर लग रहा था।
स्वरा ने यह भी बताया कि उस समय वह करीब 20 साल की उम्र में थीं, जिससे उस परिस्थिति में उनकी असहजता और डर को समझा जा सकता है।
यह सिर्फ एक फिल्मी किस्सा नहीं, पावर डायनेमिक्स का सवाल है
फिल्म इंडस्ट्री में निर्देशक और अभिनेता के बीच पेशेवर संबंध अक्सर बराबरी के स्तर पर नहीं होते। खासकर करियर की शुरुआत कर रहे कलाकार के लिए काम मिलने, फिल्म में बने रहने और वरिष्ठ लोगों से संबंध खराब न करने का दबाव अलग होता है।
ऐसी स्थिति में व्यक्तिगत सीमा तय करना आसान नहीं होता।
यही वजह है कि किसी भी पेशेवर वातावरण में consent यानी सहमति और व्यक्तिगत सीमाओं का सम्मान बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति के साथ शारीरिक संपर्क के लिए तभी सहज हो सकता है जब वह स्वयं इसके लिए तैयार हो। सिर्फ वरिष्ठता, पेशेवर संबंध या दोस्ताना व्यवहार किसी को दूसरे की सहमति मान लेने का अधिकार नहीं देता।
स्वरा पहले भी साझा कर चुकी हैं ऐसा अनुभव
यह पहली बार नहीं है जब स्वरा भास्कर ने अपने करियर की शुरुआत से जुड़े असहज अनुभवों पर सार्वजनिक रूप से बात की है।
2017 में उन्होंने एक इंटरव्यू में एक फिल्म डायरेक्टर से जुड़े कथित उत्पीड़न का अनुभव साझा किया था। उस समय उन्होंने बताया था कि वह काफी नई थीं, शूटिंग के दौरान उन्हें लगातार कॉल किए जाते थे और एक निर्देशक ने रात में उनके कमरे में आकर गले मिलने के लिए कहा था। उन्होंने उस अनुभव को डरावना बताया था।
2019 में उन्होंने इस अनुभव पर दोबारा बात करते हुए कहा था कि उस समय उन्हें धीरे-धीरे समझ आया कि व्यवहार केवल ‘अजीब’ नहीं था, बल्कि इसमें सत्ता और पेशेवर प्रभाव का इस्तेमाल शामिल था।
इसलिए Rise & Fall 2 में सामने आया बयान उनके पुराने सार्वजनिक बयानों से भी जुड़ता है।
नाम सामने न आने का मतलब क्या है?
स्वरा ने अपने हालिया बयान में डायरेक्टर का नाम सार्वजनिक नहीं किया। इसलिए इस घटना से किसी विशिष्ट व्यक्ति की पहचान या उस पर कोई आरोप तय करना उचित नहीं होगा।
यह अंतर महत्वपूर्ण है—किसी सार्वजनिक व्यक्ति द्वारा अपने अनुभव का वर्णन करना और उस अनुभव के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी घोषित करना दो अलग बातें हैं।
इस मामले में उपलब्ध जानकारी स्वरा के बयान पर आधारित है। इसलिए खबर का केंद्र उनके अनुभव और उससे जुड़े व्यापक कार्यस्थल सुरक्षा के सवाल होने चाहिए, न कि किसी ऐसे व्यक्ति की पहचान जिसके बारे में उन्होंने नाम नहीं बताया।
फिल्म सेट पर बेहतर सुरक्षा के लिए क्या जरूरी है?
इस तरह के अनुभवों से फिल्म और मनोरंजन उद्योग के लिए कुछ व्यावहारिक सबक भी निकलते हैं।
- निजी रिहर्सल की जरूरत हो तो उसकी पेशेवर वजह स्पष्ट होनी चाहिए।
- संवेदनशील या अंतरंग दृश्यों के लिए स्पष्ट सहमति और निर्धारित प्रोटोकॉल जरूरी हैं।
- कलाकार को असहज स्थिति में ‘ना’ कहने पर काम खोने का डर नहीं होना चाहिए।
- शूटिंग लोकेशन पर शिकायत और सहायता की व्यवस्था स्पष्ट होनी चाहिए।
- देर रात अकेले कलाकारों के आसपास सुरक्षा और प्रोडक्शन सपोर्ट उपलब्ध होना चाहिए।
- शराब या किसी अन्य नशे की स्थिति को पेशेवर सीमाओं के उल्लंघन का आधार नहीं बनने देना चाहिए।
आज फिल्म उद्योग में intimacy coordinators और formal workplace policies जैसी व्यवस्थाओं पर ज्यादा चर्चा होती है। इनका उद्देश्य यही है कि अंतरंग या संवेदनशील दृश्यों को व्यक्तिगत इच्छा के बजाय स्पष्ट पेशेवर प्रक्रिया के तहत किया जाए।
आगे की चर्चा सिर्फ बॉलीवुड तक सीमित नहीं रहनी चाहिए
स्वरा भास्कर का अनुभव एक बड़े सवाल की ओर ध्यान दिलाता है—क्या युवा कलाकारों, कर्मचारियों और नए प्रोफेशनल्स को यह भरोसा है कि वे वरिष्ठ व्यक्ति के सामने बिना किसी डर के अपनी सीमा तय कर सकते हैं?
यह सवाल केवल फिल्म सेट का नहीं है। कॉर्पोरेट ऑफिस, मीडिया, विज्ञापन, थिएटर, खेल और दूसरे पेशेवर क्षेत्रों में भी जूनियर और वरिष्ठ के बीच शक्ति का अंतर मौजूद रहता है।
किसी भी सुरक्षित कार्यस्थल की पहचान केवल यह नहीं है कि वहां घटना होने के बाद शिकायत की व्यवस्था मौजूद है। असली कसौटी यह है कि लोग असहज स्थिति आने से पहले ही ‘नहीं’ कहने में सुरक्षित महसूस करें।



