BSP में बड़ी सेंध की कोशिश नाकाम: 100 किलो कॉपर केबल के साथ 4 गिरफ्तार, नाबालिग भी पकड़ा गया
भिलाई, 1 अक्टूबर 2026। भिलाई स्टील प्लांट जैसे बड़े औद्योगिक परिसर में स्क्रैप सामग्री की चोरी सिर्फ आर्थिक नुकसान का मामला नहीं है। यहां सुरक्षा व्यवस्था में छोटी चूक भी औद्योगिक संपत्ति, उत्पादन व्यवस्था और संवेदनशील बुनियादी ढांचे के लिए जोखिम पैदा कर सकती है। इसी बीच प्लांट परिसर से स्क्रैप कॉपर केबल बाहर ले जाने की कोशिश का मामला सामने आया है।
CISF की निगरानी के दौरान पकड़े गए लोगों के खिलाफ भिलाई भट्ठी पुलिस ने दो अलग-अलग मामलों में कार्रवाई की है। पुलिस के अनुसार कुल करीब 100 किलो स्क्रैप कॉपर केबल बरामद हुई है। मामले में चार वयस्क आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ एक नाबालिग को भी पकड़ा गया है।
प्लांट से बाहर निकलने से पहले खुल गया मामला
पुलिस के मुताबिक 29 सितंबर को CISF की ओर से चोरी से जुड़े दो मामले भिलाई भट्ठी थाने में दर्ज कराए गए। एक मामले में करीब 60 किलो और दूसरे में लगभग 40 किलो स्क्रैप कॉपर केबल बाहर ले जाने का प्रयास किए जाने की जानकारी सामने आई।
बताया गया कि केबल को अलग-अलग हिस्सों से इकट्ठा करने के बाद एक स्थान पर उसकी गठरी तैयार की गई थी। इसके बाद बाइक की मदद से इसे प्लांट से बाहर ले जाने की कोशिश की जा रही थी।
CISF की नजर पड़ने के बाद आरोपियों को पकड़ा गया और आगे की कार्रवाई के लिए पुलिस को सौंपा गया।
96 हजार रुपये से ज्यादा की केबल बरामद
पुलिस ने पूछताछ और जांच के आधार पर कुल लगभग 100 किलो कॉपर केबल बरामद करने की जानकारी दी है। पुलिस के अनुसार इसकी अनुमानित कीमत करीब 96,100 रुपये है।
इसके अलावा कथित तौर पर चोरी में इस्तेमाल की जा रही एचएफ डीलक्स बाइक भी जब्त की गई है, जिसकी कीमत लगभग 10 हजार रुपये बताई गई है।
यह बरामदगी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कॉपर जैसी धातुओं का स्क्रैप बाजार में आसानी से बिकने वाला माल माना जाता है। यही कारण है कि औद्योगिक इकाइयों में स्क्रैप प्रबंधन और उसकी निगरानी सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाती है।
चार गिरफ्तार, नाबालिग भी जांच के दायरे में
पुलिस ने मामले में दुर्गेश जोशी, अजय सोनवाने, जोसेफ बाघ और हितेष कुमार देशमुख को गिरफ्तार किया है। इनके साथ एक अपचारी बालक को भी पकड़ा गया है।
पुलिस के अनुसार आरोपियों में स्टेशन मरोदा, उतई के जोरातराई और बालोद जिले के खप्पड़वाड़ा क्षेत्र के निवासी शामिल हैं।
नाबालिग की मौजूदगी मामले को अलग संवेदनशीलता देती है। उसके खिलाफ कार्रवाई संबंधित किशोर न्याय कानून के प्रावधानों के अनुसार की जाएगी।
असली सवाल: प्लांट के अंदर स्क्रैप इकट्ठा कैसे हुआ?
इस घटना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू केवल यह नहीं है कि चोरी का प्रयास पकड़ा गया। जांच के लिहाज से यह भी महत्वपूर्ण है कि प्लांट परिसर के अंदर अलग-अलग जगहों से स्क्रैप केबल कथित तौर पर एकत्र करने और उसे एक स्थान पर लाने की प्रक्रिया कैसे संभव हुई।
बड़े औद्योगिक परिसर में स्क्रैप की आवाजाही सामान्य गतिविधि का हिस्सा होती है। इसलिए सुरक्षा व्यवस्था के सामने चुनौती यह होती है कि वैध और अवैध आवाजाही के बीच अंतर समय रहते पहचाना जाए।
इस मामले में आगे की जांच से यह पता चलना महत्वपूर्ण होगा कि आरोपियों ने परिसर में प्रवेश कैसे किया, उन्हें स्क्रैप के स्थानों की जानकारी कैसे मिली और बाहर निकलने की योजना किस तरह बनाई गई थी।
सिर्फ CISF की सतर्कता नहीं, पूरी चेन की निगरानी जरूरी
औद्योगिक सुरक्षा में केवल गेट पर जांच पर्याप्त नहीं होती। अंदर की गतिविधियों, स्क्रैप के रिकॉर्ड, CCTV निगरानी, संवेदनशील क्षेत्रों की पहुंच और बाहर निकलने वाले वाहनों की जांच—इन सभी स्तरों को जोड़कर सुरक्षा व्यवस्था काम करती है।
अगर कोई व्यक्ति प्लांट के अंदर से सामग्री इकट्ठा करके उसे बाहर ले जाने की कोशिश करता है, तो जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह भी होता है कि सुरक्षा के किस चरण पर उसे रोका गया और उससे पहले कौन-कौन से सुरक्षा नियंत्रण लागू थे।
इस तरह की घटनाओं के बाद सुरक्षा ऑडिट से संभावित कमजोरियों की पहचान की जा सकती है।
कॉपर केबल चोरी को हल्के में क्यों नहीं लिया जा सकता?
कॉपर केबल केवल स्क्रैप की कीमत के कारण महत्वपूर्ण नहीं है। औद्योगिक संयंत्रों में केबल विद्युत और नियंत्रण प्रणालियों से भी जुड़ी हो सकती है। इसलिए किसी भी केबल की अनधिकृत निकासी या छेड़छाड़ का असर उसके उपयोग और स्थान पर निर्भर कर सकता है।
हालांकि इस मामले में पुलिस ने बरामद सामग्री को स्क्रैप कॉपर केबल बताया है। इसलिए इससे उत्पादन व्यवस्था पर किसी प्रभाव का दावा करना अभी उचित नहीं होगा।
फिर भी औद्योगिक सुरक्षा के लिहाज से हर अनधिकृत सामग्री निकासी की जांच जरूरी है, क्योंकि इससे सुरक्षा व्यवस्था की संभावित कमजोरियां सामने आ सकती हैं।
आगे जांच में इन बिंदुओं पर रह सकती है नजर
पुलिस की जांच आगे बढ़ने पर यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इस कथित चोरी के पीछे केवल पकड़े गए लोगों की भूमिका थी या कोई अन्य व्यक्ति भी इसमें शामिल था।
इसके साथ यह भी देखा जा सकता है कि प्लांट में प्रवेश, स्क्रैप के स्थान की जानकारी, सामग्री इकट्ठा करने और उसे बाहर निकालने के दौरान किस तरह की योजना बनाई गई थी।
यदि जांच में किसी संगठित नेटवर्क या अंदरूनी मदद के संकेत मिलते हैं तो मामला केवल चोरी के प्रयास से आगे बढ़ सकता है।



