गुवाहाटी में भारत का धमाकेदार रन चेज: शुभमन गिल ने रचा इतिहास, वेस्टइंडीज का 405 भी पड़ा छोटा
गुवाहाटी में बुधवार को भारत और वेस्टइंडीज के बीच दूसरा वनडे ऐसा मुकाबला बना, जिसमें रिकॉर्ड लगातार एक-दूसरे को पीछे छोड़ते रहे। पहले वेस्टइंडीज ने तीन शतकों की मदद से 405/7 का विशाल स्कोर खड़ा किया और फिर भारत ने इस लक्ष्य को केवल 43.3 ओवर में 8 विकेट से हासिल कर लिया। इस जीत के साथ भारत ने तीन मैचों की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली।
लेकिन इस मुकाबले की सबसे बड़ी कहानी सिर्फ स्कोरबोर्ड पर दर्ज जीत नहीं है। यह उस बल्लेबाजी दृष्टिकोण की कहानी है जिसमें 400 से ज्यादा के लक्ष्य को दबाव के बजाय अवसर की तरह लिया गया। कप्तान शुभमन गिल ने नाबाद 223 रन बनाकर भारत को लक्ष्य तक पहुंचाया और वनडे इतिहास में कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम किए।
वेस्टइंडीज ने भारत के सामने रखा था पहाड़ जैसा लक्ष्य
टॉस जीतकर भारत ने पहले गेंदबाजी चुनी थी। वेस्टइंडीज ने इस फैसले का फायदा उठाते हुए शुरुआत से ही भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बनाया।
जॉन कैंपबेल ने 68 गेंदों पर 101 रन बनाए, कप्तान शाई होप ने 104 रन जोड़े और आमिर जांगू ने 77 गेंदों में 114 रन की विस्फोटक पारी खेली। इन तीनों शतकों की मदद से वेस्टइंडीज ने 50 ओवर में 405/7 का स्कोर बनाया। यह वनडे में उसका पहला 400 से अधिक का स्कोर और भारत के खिलाफ उसका सर्वोच्च वनडे स्कोर रहा।
वेस्टइंडीज के लिए यह पारी इसलिए भी महत्वपूर्ण थी क्योंकि उसके शीर्ष चार में से तीन बल्लेबाजों ने शतक लगाया। इसके बावजूद भारतीय टीम के सामने चुनौती थी कि इतने बड़े लक्ष्य का पीछा किस तरह शुरू किया जाए।
गिल ने शुरुआत से ही बदल दिया मैच का मूड
भारत की पारी की शुरुआत रोहित शर्मा और शुभमन गिल ने की। दोनों ने पहले विकेट के लिए बड़ी साझेदारी बनाकर वेस्टइंडीज के गेंदबाजों को शुरुआती बढ़त लेने का मौका नहीं दिया।
गिल ने सिर्फ 62 गेंदों में अपना शतक पूरा किया। इसके बाद उन्होंने रन बनाने की गति कम करने के बजाय आक्रमण जारी रखा। वह 117 गेंदों में दोहरा शतक पूरा करने वाले वनडे इतिहास के सबसे तेज बल्लेबाज बने।
अंततः गिल 223 रन बनाकर नाबाद रहे। इस पारी के दौरान उन्होंने 24 चौके और 7 छक्के लगाए। वह रोहित शर्मा के बाद वनडे में दो दोहरे शतक लगाने वाले दूसरे बल्लेबाज भी बने।
400 से ज्यादा के लक्ष्य का पीछा सिर्फ ताकत से नहीं हुआ
इस चेज को केवल गिल की व्यक्तिगत उपलब्धि के नजरिए से देखना पूरी तस्वीर नहीं दिखाता।
406 रन के लक्ष्य में शुरुआत से ही जरूरी था कि रन रेट नियंत्रण से बाहर न जाए। भारत ने पावरप्ले में तेजी बनाए रखी और शुरुआती साझेदारी ने बाद के बल्लेबाजों के लिए दबाव काफी कम कर दिया।
यही सीमित ओवरों की बल्लेबाजी का अहम पहलू है—बड़े लक्ष्य में हर गेंद पर बड़ा शॉट लगाना जरूरी नहीं होता। असली चुनौती यह होती है कि विकेट बचाते हुए रन रेट को लगातार ऊंचा रखा जाए।
गिल ने इसी संतुलन को अपनी पारी का आधार बनाया। उनके शतक के बाद पारी किसी एक विस्फोटक ओवर पर निर्भर नहीं रही, बल्कि लगातार बाउंड्री और स्ट्राइक रोटेशन से लक्ष्य छोटा होता गया।
गिल के लिए कप्तानी की दृष्टि से भी बड़ा दिन
कप्तान के रूप में गिल की यह पारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि टीम ने पहले बल्लेबाजी नहीं की थी। उन्हें एक ऐसे लक्ष्य का पीछा करना था जिसमें एक छोटी सी बल्लेबाजी चूक मैच का रुख बदल सकती थी।
पहले वनडे में भी गिल ने शतक लगाया था और विराट कोहली ने 139* की पारी खेली थी। भारत ने वह मुकाबला 8 विकेट से जीता था।
दूसरे वनडे में गिल का दोहरा शतक इस निरंतरता को एक अलग स्तर तक ले गया। दो मैचों में भारत के शीर्ष क्रम ने बड़े लक्ष्य के सामने जिस तरह रन बनाए, उससे टीम की बल्लेबाजी की गहराई भी सामने आई।
वेस्टइंडीज के लिए 405 रन भी पर्याप्त क्यों नहीं रहे?
वेस्टइंडीज की बल्लेबाजी में लगभग हर जरूरी चीज दिखाई दी—शुरुआत, साझेदारियां और तेजी से रन बनाने की क्षमता। फिर भी उसकी गेंदबाजी भारत के रन चेज को रोक नहीं सकी।
मैच की परिस्थितियों ने बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का अवसर दिया और भारत ने इसका भरपूर फायदा उठाया। यही कारण है कि 405 जैसा विशाल स्कोर भी बचाव योग्य नहीं बन सका।
भारतीय गेंदबाजी के लिए यह मैच मिश्रित संकेत लेकर आया। वेस्टइंडीज के तीन बल्लेबाजों का शतक बनाना निश्चित रूप से चिंता का विषय है, लेकिन दूसरी पारी में बल्लेबाजों ने स्थिति को पूरी तरह अपने पक्ष में कर लिया। कुलदीप यादव ने 2 विकेट लिए और इसी मुकाबले में उनके 200 वनडे विकेट भी पूरे हुए।
इस जीत का सीरीज पर सीधा असर
भारत अब तीन मैचों की सीरीज में 2-0 से आगे है और सीरीज उसके नाम हो चुकी है। तीसरा वनडे 3 अक्टूबर को न्यू चंडीगढ़ में खेला जाना है।
अब तीसरे मुकाबले का महत्व अलग होगा। सीरीज का नतीजा तय होने के बाद टीम प्रबंधन को युवा खिलाड़ियों को अवसर देने और संयोजन को परखने का मौका मिल सकता है। भारत ने दूसरे मैच में ही ऑलराउंडर नितीश कुमार रेड्डी की जगह ऑकीब नबी को वनडे डेब्यू कराया था।
गुवाहाटी मैच से निकली सबसे बड़ी तस्वीर
इस मुकाबले ने वनडे क्रिकेट में बदलते स्कोरिंग पैटर्न की एक और झलक दिखाई। एक समय 350 रन का लक्ष्य भी बेहद बड़ा माना जाता था, लेकिन अब बल्लेबाजी की गति और पावरप्ले के इस्तेमाल ने 400 से अधिक के लक्ष्य को भी चुनौती के दायरे में ला दिया है।
भारत के लिए इस मैच का सबसे मजबूत संदेश यह रहा कि लक्ष्य चाहे कितना भी बड़ा हो, पीछा करने की रणनीति अगर शुरुआत से स्पष्ट हो तो दबाव को चरणों में बांटा जा सकता है।



