NEET ऑनलाइन परीक्षा: बड़ा बदलाव, लेकिन असली चुनौती गांवों तक डिजिटल बराबरी की
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा को लेकर एक बड़ा बदलाव सामने आ रहा है। शिक्षा मंत्रालय राष्ट्रीय स्तर पर ऐसी Computer-Based Testing (CBT) व्यवस्था तैयार करने पर काम कर रहा है, जिसके जरिए भविष्य में NEET-UG को OMR शीट से कंप्यूटर स्क्रीन पर ले जाया जा सके।
लेकिन फिलहाल एक बात साफ समझना जरूरी है—2027 से NEET ऑनलाइन होने का अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है। मंत्रालय की तैयारी चल रही है और अंतिम रूप नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली हाई-पावर्ड टास्क फोर्स की सिफारिशों के बाद दिया जाएगा।
इसलिए इस बदलाव को केवल “ऑफलाइन से ऑनलाइन परीक्षा” के तौर पर देखना सही नहीं होगा। असली सवाल यह है कि करीब 25 लाख अभ्यर्थियों वाली परीक्षा को ऐसी डिजिटल व्यवस्था में कैसे बदला जाए, जहां तकनीक परीक्षा को ज्यादा सुरक्षित बनाए, लेकिन गांव, छोटे शहर या कमजोर इंटरनेट वाले इलाकों का छात्र पीछे न छूटे।
NEET में बदलाव की जरूरत आखिर क्यों महसूस हुई?
NEET जैसी परीक्षा में प्रश्नपत्र की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण कड़ियों में से एक है। 2024 के NEET-UG विवाद के बाद परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा, डेटा प्रोटेक्शन और NTA की कार्यप्रणाली को लेकर व्यापक सुधारों की जरूरत सामने आई थी। 2024 में करीब 24 लाख उम्मीदवारों ने परीक्षा दी थी और परीक्षा देश-विदेश के हजारों केंद्रों पर आयोजित हुई थी।
अब केंद्र सरकार परीक्षा प्रणाली को व्यापक स्तर पर पुनर्गठित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। अगस्त 2026 में गठित हाई-पावर्ड टास्क फोर्स को परीक्षा के संचालन, सुरक्षा, डिजाइन, तकनीक, इंफ्रास्ट्रक्चर, पहुंच और समावेशिता से जुड़े सुधारों पर सुझाव देने की जिम्मेदारी दी गई है।
यानी CBT का मुद्दा किसी एक परीक्षा के कंप्यूटर पर कराने से कहीं बड़ा है। सरकार एक ऐसा राष्ट्रीय ढांचा तैयार करना चाहती है जिसका इस्तेमाल भविष्य में कई बड़े एंट्रेंस एग्जाम में किया जा सके।
सबसे बड़ी चुनौती कंप्यूटर नहीं, बराबर अवसर है
शहरी छात्रों के लिए कंप्यूटर आधारित परीक्षा सामान्य बात हो सकती है। लेकिन NEET की सामाजिक पहुंच इससे कहीं व्यापक है।
देश के छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों से हर साल बड़ी संख्या में छात्र मेडिकल प्रवेश परीक्षा देते हैं। ऐसे में यदि परीक्षा ऑनलाइन होती है तो सिर्फ यह देखना पर्याप्त नहीं होगा कि किसी जिले में परीक्षा केंद्र मौजूद है या नहीं।
केंद्र तक पहुंच, पर्याप्त कंप्यूटर, बिजली की विश्वसनीयता, बैकअप सिस्टम, सर्वर कनेक्टिविटी, परीक्षा केंद्र की सुरक्षा और तकनीकी सहायता—इन सभी की गुणवत्ता समान होनी चाहिए।
शिक्षा मंत्रालय की प्रस्तावित रणनीति में भी देशभर में परीक्षा केंद्रों की उपलब्धता के भौगोलिक अंतर को कम करने और केंद्रों के लिए समान परीक्षा-स्तरीय मानक तय करने पर जोर दिया जा रहा है।
यही बदलाव की सबसे कठिन परीक्षा होगी।
CBT से क्या फायदे मिल सकते हैं?
कंप्यूटर आधारित परीक्षा का सबसे बड़ा लाभ यह है कि पूरी प्रक्रिया का बड़ा हिस्सा डिजिटल हो जाता है।
OMR शीट की स्कैनिंग, उत्तरों के मैनुअल हैंडलिंग और कुछ प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर निर्भरता कम की जा सकती है। प्रश्नों को अलग-अलग शिफ्ट में आयोजित करने की संभावना भी बढ़ती है, जिससे इतने बड़े उम्मीदवार समूह को संभालने में लॉजिस्टिक दबाव कम किया जा सकता है।
NTA पहले से JEE Main, CUET और UGC-NET जैसे कई प्रमुख परीक्षाओं को CBT मोड में आयोजित करता है। इसलिए तकनीक देश की परीक्षा प्रणाली के लिए नई नहीं है। असली चुनौती NEET के विशाल पैमाने पर इसे लागू करना होगी।
लेकिन ऑनलाइन परीक्षा अपने साथ नए जोखिम भी लाएगी
यह मान लेना गलत होगा कि कंप्यूटर पर परीक्षा कराने से परीक्षा संबंधी हर समस्या खत्म हो जाएगी।
ऑफलाइन परीक्षा में प्रश्नपत्र की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती होती है, जबकि CBT में साइबर सुरक्षा, सर्वर, सॉफ्टवेयर, डिवाइस और नेटवर्क की विश्वसनीयता महत्वपूर्ण हो जाती है।
यदि किसी केंद्र पर अचानक बिजली चली जाए, सिस्टम खराब हो जाए या नेटवर्क में व्यवधान आए तो उम्मीदवार के परीक्षा अनुभव पर सीधा असर पड़ सकता है।
इसलिए भविष्य की व्यवस्था में केवल इंटरनेट कनेक्शन पर्याप्त नहीं होगा। पावर बैकअप, ऑफलाइन फेल-सेफ सिस्टम, सर्वर redundancy, डेटा एन्क्रिप्शन, निगरानी और तत्काल तकनीकी सहायता जैसी व्यवस्थाएं भी जरूरी होंगी।
यही वजह है कि सरकार फिलहाल सिर्फ परीक्षा का मोड बदलने के बजाय राष्ट्रीय स्तर के “examination-grade” CBT infrastructure की रणनीति तैयार कर रही है।
क्या NEET कई दिनों में कराया जा सकता है?
अगर इतने बड़े उम्मीदवार समूह को कंप्यूटर पर परीक्षा देनी है, तो एक ही दिन और एक ही समय में पूरे देश में परीक्षा कराने के बजाय कई शिफ्ट या कई दिनों का मॉडल अपनाने की संभावना पर चर्चा स्वाभाविक है।
लेकिन यहां एक और तकनीकी सवाल पैदा होगा—अगर अलग-अलग शिफ्ट में अलग प्रश्नपत्र आते हैं तो कठिनाई के स्तर में अंतर को कैसे संतुलित किया जाएगा?
यहीं नॉर्मलाइजेशन और प्रश्नपत्र की समान कठिनाई महत्वपूर्ण हो जाएगी।
इसलिए ऑनलाइन परीक्षा सिर्फ कंप्यूटर लगाने का प्रोजेक्ट नहीं है। प्रश्न बैंक की डिजाइन, शिफ्ट की समानता, मूल्यांकन प्रणाली और परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया भी नए सिरे से मजबूत करनी होगी।
नंदन नीलेकणि की टास्क फोर्स क्यों महत्वपूर्ण है?
केंद्र ने जुलाई 2026 में परीक्षा सुधारों के लिए हाई-पावर्ड टास्क फोर्स बनाई थी, जिसकी अध्यक्षता नंदन नीलेकणि कर रहे हैं। इसका उद्देश्य केवल तकनीक जोड़ना नहीं बल्कि सार्वजनिक परीक्षाओं के संचालन, सुरक्षा और प्रशासनिक ढांचे में व्यापक सुधार सुझाना है।
इस पैनल ने परीक्षा सुधारों पर पहले काम कर चुके पूर्व ISRO चेयरमैन के. राधाकृष्णन से भी परामर्श किया है। राधाकृष्णन ने 2024 के NEET विवाद के बाद गठित विशेषज्ञ समिति का नेतृत्व किया था।
इससे संकेत मिलता है कि सरकार पुराने अनुभवों और नई तकनीक को जोड़कर परीक्षा प्रणाली के लिए लंबी अवधि का ढांचा तैयार करने की कोशिश कर रही है।
छात्रों के लिए अभी क्या मायने रखता है?
NEET 2027 की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए फिलहाल सबसे जरूरी बात यह है कि आधिकारिक अधिसूचना आने से पहले परीक्षा के मोड को लेकर किसी अफवाह पर निर्भर न रहें।
NEET-UG 2026 आधिकारिक तौर पर पेन-पेपर मोड में आयोजित किया गया था।
अगर 2027 के लिए CBT लागू होता है तो छात्रों को पढ़ाई के साथ कंप्यूटर स्क्रीन पर लंबे समय तक प्रश्न हल करने की आदत भी विकसित करनी पड़ सकती है। हालांकि परीक्षा का आधिकारिक पैटर्न, समय, प्रश्नों की संख्या और अन्य नियम NTA की अधिसूचना से ही स्पष्ट होंगे।
असली सुधार तब माना जाएगा जब भरोसा लौटेगा
NEET जैसी परीक्षा में तकनीक अपने आप में लक्ष्य नहीं हो सकती। उसका उद्देश्य परीक्षा को ज्यादा सुरक्षित, पारदर्शी, समान और भरोसेमंद बनाना होना चाहिए।
अगर CBT लागू होता है और इसके साथ मजबूत केंद्र नेटवर्क, बेहतर साइबर सुरक्षा, ग्रामीण छात्रों के लिए पर्याप्त परीक्षा केंद्र और तकनीकी विफलताओं से निपटने की व्यवस्था तैयार की जाती है, तो यह भारत की परीक्षा प्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव हो सकता है।
लेकिन यदि डिजिटल व्यवस्था केवल कागज की जगह कंप्यूटर तक सीमित रही और इंफ्रास्ट्रक्चर में क्षेत्रीय असमानता बनी रही, तो नई तकनीक पुरानी समस्याओं का समाधान करने के बजाय नई समस्याएं पैदा कर सकती है।
इसलिए NEET 2027 को लेकर फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि परीक्षा कंप्यूटर पर होगी या OMR पर। असली सवाल यह है कि देश क्या ऐसी परीक्षा व्यवस्था तैयार कर सकता है जिसमें दिल्ली से लेकर दूरदराज के जिले तक हर छात्र को समान परिस्थितियां मिलें।
आने वाले महीनों में नंदन नीलेकणि टास्क फोर्स की सिफारिशें, शिक्षा मंत्रालय की रणनीति और NTA की आधिकारिक अधिसूचना इस दिशा को स्पष्ट करेंगी।



