नीला ड्रम हत्याकांड में फैसला करीब, 22 गवाहों ने जोड़ीं अहम कड़ियां; चाकू, ड्रम और मोबाइल डेटा तक पहुंची जांच
मेरठ। सौरभ राजपूत हत्याकांड की सुनवाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। मेरठ जिला अदालत में अभियोजन और बचाव पक्ष की अंतिम बहस पूरी हो चुकी है और अदालत ने 30 सितंबर 2026 को फैसला सुनाने की तारीख तय की है। इस मुकदमे में अभियोजन ने 22 गवाहों के बयान और अलग-अलग भौतिक व वैज्ञानिक साक्ष्यों के जरिए घटनाक्रम की कड़ियां अदालत के सामने रखीं।
मामले की खास बात यह है कि जांच का आधार केवल किसी एक प्रत्यक्षदर्शी की गवाही नहीं रहा। अदालत में पेश सामग्री में खरीदारी से जुड़े गवाह, चिकित्सकीय साक्ष्य, घटनास्थल से जुड़ी बरामदगी और मोबाइल कॉल डिटेल व टावर लोकेशन जैसे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड शामिल रहे। दूसरी ओर बचाव पक्ष ने चश्मदीद गवाह नहीं होने और मामले में लगाए गए आरोपों पर सवाल उठाते हुए अपना पक्ष रखा है।
खरीदारी की छोटी-छोटी कड़ियां कैसे बनीं जांच का हिस्सा?
अभियोजन के गवाहों में ऐसे दुकानदार भी शामिल रहे, जिन्होंने कथित तौर पर घटना से पहले चाकू, उस्तरा, बड़ा प्लास्टिक ड्रम और सीमेंट खरीदे जाने की जानकारी दी। इनमें 1200 लीटर के नीले ड्रम की खरीद का उल्लेख भी अदालत में आया।
जांच के लिहाज से ऐसे साक्ष्य इसलिए महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि किसी अपराध की पूरी तस्वीर कई अलग-अलग घटनाओं को जोड़कर तैयार होती है। किसी दुकान से सामान खरीदना अपने आप में अपराध का प्रमाण नहीं है, लेकिन यदि वही वस्तु बाद में घटनास्थल या बरामदगी से जुड़ती है, तो जांच एजेंसी उसके समय, स्थान, पहचान और अन्य साक्ष्यों के साथ संबंध को अदालत के सामने रख सकती है।
नीला ड्रम क्यों बना मामले का सबसे अहम प्रतीक?
मामले में पुलिस जांच के दौरान एक नीले ड्रम से शव के अवशेष बरामद होने की बात सामने आई। ड्रम को काटकर उसके भीतर से सीमेंट में जमे शव के हिस्से और अन्य वस्तुएं निकाले जाने की गवाही भी अदालत में दर्ज हुई।
यहां वैज्ञानिक और भौतिक साक्ष्य की भूमिका अहम हो जाती है। किसी बरामद वस्तु को केवल कहानी का हिस्सा नहीं माना जाता, बल्कि उसकी बरामदगी, सीलिंग, सुरक्षित रखे जाने और अदालत में पेश किए जाने की प्रक्रिया भी जांच का हिस्सा होती है। इसी वजह से इस मुकदमे में ड्रम काटने वाले कारीगर और विवेचना से जुड़े पुलिस अधिकारियों के बयान भी महत्वपूर्ण रहे।
मेडिकल रिपोर्ट ने क्या कड़ी जोड़ी?
पोस्टमार्टम से जुड़े चिकित्सकीय साक्ष्य में शरीर पर धारदार हथियार से चोटों और अन्य चोटों का उल्लेख किया गया। अभियोजन ने यह भी दावा किया कि मृतक को घटना से पहले नशीला पदार्थ दिया गया था। इस पहलू पर डॉक्टर और दवा विक्रेता के बयानों में अलग-अलग बातें सामने आने की बात रिकॉर्ड में आई है।
ऐसे मामलों में अदालत को केवल यह नहीं देखना होता कि किसी गवाह ने क्या कहा, बल्कि मेडिकल रिपोर्ट और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के साथ उस बयान की संगति भी देखी जाती है।
मोबाइल डेटा से लेकर यात्रा तक, जांच का दायरा बढ़ा
मुकदमे में मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और टावर लोकेशन से जुड़े डेटा को भी साक्ष्य के रूप में पेश किया गया। दूरसंचार कंपनी के नोडल अधिकारी की गवाही के जरिए इन रिकॉर्ड्स को अदालत के सामने रखने की बात सामने आई है।
इसके अलावा कैब चालक ने भी कथित तौर पर हत्या के बाद दोनों आरोपियों को यात्रा कराने की जानकारी दी। यह गवाही घटनाक्रम के उस हिस्से से जुड़ी है जिसमें आरोपियों की घटना के बाद की गतिविधियों की जांच की गई।
अभियोजन की कहानी बनाम बचाव पक्ष की दलील
अभियोजन ने अलग-अलग गवाहियों और वैज्ञानिक साक्ष्यों को एक-दूसरे से जोड़कर घटनाक्रम की कड़ी अदालत के सामने रखी है। अभियोजन पक्ष के अनुसार इन साक्ष्यों से आरोपों को समर्थन मिलता है।
वहीं बचाव पक्ष का प्रमुख तर्क यह रहा है कि मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं है। बचाव की ओर से साक्ष्यों की विश्वसनीयता और आरोपों के आधार पर सवाल उठाए गए हैं।
यही वह बिंदु है जहां अदालत की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो जाती है। किसी आपराधिक मुकदमे में अंतिम निष्कर्ष गवाहों की संख्या से नहीं, बल्कि साक्ष्यों की स्वीकार्यता, विश्वसनीयता और उनके आपसी संबंधों के कानूनी परीक्षण से निकलता है।
अब अदालत के फैसले पर टिकी नजर
मामले में अंतिम बहस पूरी होने के बाद अब न्यायालय को दोनों पक्षों की दलीलों और रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों के आधार पर फैसला करना है। 30 सितंबर 2026 को निर्णय सुनाए जाने की तारीख तय की गई है।



