मध्य प्रदेश में दिवाली से पहले बिजली संकट की आहट! 45 हजार आउटसोर्स कर्मचारी 7-8 नवंबर को करेंगे कामबंद आंदोलन
भोपाल। मध्य प्रदेश में दीपावली के दौरान बिजली व्यवस्था को लेकर चुनौती बढ़ सकती है। प्रदेश की छह बिजली कंपनियों में काम कर रहे करीब 45 हजार आउटसोर्स कर्मचारी 7 और 8 नवंबर 2026 को कामबंद आंदोलन की तैयारी में हैं। कर्मचारी संगठनों ने लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर यह कदम उठाने की चेतावनी दी है।
सिर्फ वेतन का मामला नहीं, नौकरी की सुरक्षा भी बड़ा मुद्दा
कर्मचारी संगठनों के अनुसार विवाद का केंद्र केवल वेतन या बोनस नहीं है। आउटसोर्स कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में ठेका व्यवस्था समाप्त करना, सीधे बिजली कंपनियों के माध्यम से भुगतान, रिक्त पदों पर नियमितीकरण, न्यूनतम वेतन में सुधार और जोखिम भत्ता जैसी मांगें शामिल हैं।
इसके अलावा नाइट अलाउंस, चिकित्सा अवकाश, बोनस, ग्रेच्युटी, बीमा और दुर्घटना में जान गंवाने वाले कर्मचारियों के परिवारों के लिए आर्थिक सहायता की मांग भी उठाई गई है। कर्मचारी संगठनों ने सेवा अवधि को 62 वर्ष तक करने और कार्यस्थल पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग भी रखी है।
मध्य प्रदेश के बिजली क्षेत्र में आउटसोर्स कर्मचारी केवल सहायक भूमिका तक सीमित नहीं हैं। वितरण व्यवस्था में फॉल्ट सुधार, सब-स्टेशन से जुड़े काम, रखरखाव और उपभोक्ताओं की शिकायतों के निपटारे जैसे कई कार्यों में इनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। ऐसे में बड़ी संख्या में कर्मचारियों के एक साथ काम से हटने पर फील्ड स्तर की सेवाओं पर दबाव बढ़ने की आशंका स्वाभाविक है।
छह बिजली कंपनियों तक पहुंच सकता है असर
प्रस्तावित आंदोलन का दायरा मध्य प्रदेश की बिजली व्यवस्था की छह प्रमुख कंपनियों से जुड़ा है। इनमें पावर मैनेजमेंट, पावर जनरेशन, पावर ट्रांसमिशन तथा पूर्व, मध्य और पश्चिम क्षेत्र की बिजली वितरण कंपनियां शामिल हैं। यही वजह है कि आंदोलन का प्रभाव केवल किसी एक शहर या जिले तक सीमित रहने के बजाय कई हिस्सों में महसूस हो सकता है।
हालांकि, कामबंद आंदोलन की चेतावनी को सीधे प्रदेशव्यापी बिजली आपूर्ति ठप होने के रूप में देखना अभी जल्दबाजी होगी। बिजली व्यवस्था में वैकल्पिक व्यवस्थाएं, उपलब्ध नियमित स्टाफ और प्रबंधन की तैयारी अंतिम स्थिति को प्रभावित कर सकती है। पहले भी बिजली कर्मचारियों के आंदोलनों के दौरान प्रबंधन ने वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए आपूर्ति बनाए रखने की कोशिश की है।
कर्मचारियों ने दिया नोटिस, बातचीत से निकल सकता है रास्ता
कर्मचारी नेताओं के मुताबिक छह बिजली कंपनियों को धारा 22(1) के तहत कामबंद आंदोलन का नोटिस दिया गया है। संगठनों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को प्रबंधन और सरकार के सामने रखते रहे हैं, लेकिन अपेक्षित समाधान नहीं हुआ।
ऐसे में 7-8 नवंबर की तारीख महत्वपूर्ण हो जाती है। दीपावली जैसे समय में बिजली की मांग और फील्ड सेवाओं की जरूरत बढ़ सकती है। इसलिए कर्मचारियों और बिजली प्रबंधन के बीच समय रहते बातचीत और वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करना उपभोक्ताओं के हित में अहम होगा।
आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि आंदोलन से पहले सरकार और बिजली कंपनियों की ओर से कर्मचारियों की मांगों पर क्या पहल होती है। यदि बातचीत से सहमति बनती है तो कामबंद आंदोलन टल सकता है। दूसरी ओर, यदि गतिरोध बना रहता है तो बिजली कंपनियों को फॉल्ट अटेंड करने, रखरखाव और शिकायत निवारण जैसी सेवाओं के लिए अतिरिक्त इंतजाम करने पड़ सकते हैं।



