UNGA में आतंकवाद के सवाल पर जयशंकर का पलटवार, पाकिस्तानी पत्रकार से कहा- ‘एक आतंकवादी देश मुझसे यह सवाल पूछ रहा है’
न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान भारत-पाकिस्तान के बीच आतंकवाद का मुद्दा एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा में आ गया। 25 सितंबर 2026 को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आतंकवाद को लेकर पाकिस्तानी पत्रकार के सवाल पर तीखी प्रतिक्रिया दी। रिपोर्टों के अनुसार जयशंकर ने कहा कि एक “आतंकवादी देश” उनसे यह सवाल पूछ रहा है। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत लंबे समय से पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देने के आरोप लगाता रहा है, जबकि पाकिस्तान भारत पर लगाए गए इन आरोपों को खारिज करता रहा है।
सवाल आतंकवाद का था, लेकिन जवाब का दायरा बड़ा था
जयशंकर की टिप्पणी को केवल भारत-पाकिस्तान के बीच बयानबाजी के रूप में देखना इस घटनाक्रम की पूरी तस्वीर नहीं देता। UNGA जैसे मंच पर आतंकवाद का सवाल भारत के लिए लंबे समय से सुरक्षा, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही से जुड़ा विषय रहा है।
भारत का आधिकारिक रुख रहा है कि आतंकवाद को किसी भी राजनीतिक उद्देश्य या क्षेत्रीय विवाद से अलग रखकर देखा जाना चाहिए। वहीं पाकिस्तान की ओर से भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत पर आतंकवाद को लेकर आरोप लगाए जाते रहे हैं। उदाहरण के तौर पर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने सितंबर 2026 में भारत पर पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगाए थे। ये आरोप पाकिस्तान का पक्ष हैं और भारत इन्हें स्वीकार नहीं करता।
ऐसे माहौल में जयशंकर का जवाब भारत की उस कूटनीतिक लाइन के अनुरूप दिखाई देता है जिसमें नई दिल्ली आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान की विश्वसनीयता और जवाबदेही पर सवाल उठाती रही है।
UNGA में पाकिस्तान को लेकर सवालों का सिलसिला
इसी दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को भी संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आतंकवाद और लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद को लेकर पत्रकारों के सवालों का सामना करना पड़ा। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने इन सवालों का जवाब नहीं दिया और आगे बढ़ गए।
हालांकि किसी नेता द्वारा पत्रकार के सवाल का जवाब न देने को अपने आप में किसी आरोप की पुष्टि नहीं माना जा सकता। लेकिन यह घटनाक्रम बताता है कि UNGA के दौरान भारत-पाकिस्तान से जुड़े आतंकवाद के सवाल अंतरराष्ट्रीय मीडिया के एजेंडे में भी मौजूद रहे।
आतंकवाद से आगे समुद्री सुरक्षा पर जयशंकर का जोर
जयशंकर के बयान का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू समुद्री सुरक्षा रहा। उन्होंने गल्फ, रेड सी और ब्लैक सी क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया।
यह विषय भारत के लिए केवल विदेश नीति का मामला नहीं है। भारत दुनिया के प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों से जुड़ा हुआ देश है और बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक वैश्विक समुद्री परिवहन क्षेत्र में काम करते हैं। किसी संघर्ष क्षेत्र में जहाजों पर हमला होने का असर केवल संबंधित देश या कंपनी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि बीमा लागत, माल ढुलाई, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक सप्लाई चेन तक पहुंच सकता है।
जयशंकर ने ओमान की खाड़ी में एमवी केप डाओ पर हुए हमले का उल्लेख करते हुए बताया कि इसमें एक भारतीय नाविक की मौत हुई। उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल टैंकर एल गाइया पर हुए हमले का भी संदर्भ दिया, जिसमें एक भारतीय चालक दल के सदस्य के लापता होने की बात कही गई।
इससे भारत का संदेश स्पष्ट होता है कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा को क्षेत्रीय संघर्षों से अलग करके नहीं देखा जा सकता।
आतंकवाद और समुद्री सुरक्षा क्यों जुड़े हैं?
आज आतंकवाद की चुनौती केवल जमीन तक सीमित नहीं है। समुद्री मार्गों पर हमले, ड्रोन और मिसाइल खतरे तथा गैर-राज्य सशस्त्र समूहों की गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए नई सुरक्षा चुनौतियां पैदा कर रही हैं।
रेड सी और अन्य रणनीतिक समुद्री क्षेत्रों में अस्थिरता बढ़ने पर जहाजों को वैकल्पिक लंबे रास्ते अपनाने पड़ सकते हैं। इससे यात्रा का समय और लागत बढ़ सकती है। ऊर्जा और जरूरी वस्तुओं की वैश्विक आपूर्ति पर भी इसका अप्रत्यक्ष असर पड़ सकता है।
भारत के लिए इसका एक अतिरिक्त पहलू है—भारतीय नाविकों की सुरक्षा। इसलिए विदेश नीति में समुद्री सुरक्षा का मुद्दा अब केवल नौसैनिक रणनीति नहीं, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा और आर्थिक हितों से भी जुड़ा विषय बन चुका है।
भारत ने ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के साथ भी उठाया आतंकवाद का मुद्दा
UNGA के दौरान जयशंकर ने दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्री रोनाल्ड लामोला और ब्राजील के विदेश मंत्री मौरो विएरा से भी मुलाकात की। भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका IBSA Dialogue Forum के सदस्य हैं।
इन देशों के बीच आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सहयोग का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि आतंकवाद किसी एक क्षेत्र की समस्या नहीं रह गया है। वित्तपोषण, हथियार, डिजिटल नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय आवाजाही ने सुरक्षा चुनौतियों को सीमा-पार स्वरूप दिया है।
आगे की कूटनीति में इसका क्या असर हो सकता है?
UNGA में जयशंकर की टिप्पणी तत्काल राजनीतिक बहस का हिस्सा जरूर बन सकती है, लेकिन इसका व्यापक महत्व इस बात में है कि भारत आतंकवाद को केवल द्विपक्षीय भारत-पाकिस्तान विवाद के रूप में पेश करने के बजाय इसे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और जवाबदेही के मुद्दे से जोड़ रहा है।
साथ ही समुद्री हमलों का मुद्दा उठाकर भारत ने अपने हितों को व्यापक वैश्विक सुरक्षा विमर्श से जोड़ने की कोशिश की है। आने वाले समय में आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और भारतीय नागरिकों की विदेशों में सुरक्षा जैसे मुद्दे भारत की कूटनीतिक प्राथमिकताओं में महत्वपूर्ण बने रह सकते हैं।



