रोज-रोज गैस और पेट फूलना सामान्य समझकर न करें नजरअंदाज, इन संकेतों पर डॉक्टर से मिलना जरूरी
नई दिल्ली: पेट में गैस बनना या कभी-कभार पेट फूलना अपने आप में कोई असामान्य बात नहीं है। पाचन के दौरान गैस बनना शरीर की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। खाना खाते समय निगली गई हवा और बड़ी आंत में बिना पूरी तरह पचे कार्बोहाइड्रेट को बैक्टीरिया द्वारा तोड़ने की प्रक्रिया से गैस बनती है। समस्या तब मानी जाती है जब गैस या पेट फूलने की शिकायत बार-बार होने लगे, परेशान करने लगे या रोजमर्रा के काम प्रभावित करने लगे।
यही वह अंतर है जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। हर बार गैस किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होती, लेकिन लगातार बने रहने वाले लक्षणों के पीछे कब्ज, खान-पान की आदत, कुछ खाद्य पदार्थों से असहिष्णुता, इरिटेबल बॉवल सिंड्रोम (IBS) या दूसरी पाचन संबंधी समस्या हो सकती है।
गैस और ब्लोटिंग में क्या अंतर है?
पेट में गैस होना और ब्लोटिंग महसूस होना एक ही बात नहीं है। गैस पाचन तंत्र में मौजूद हवा और दूसरी गैसों से जुड़ी शारीरिक प्रक्रिया है, जबकि ब्लोटिंग में व्यक्ति को पेट भरा हुआ, तना हुआ या फूला हुआ महसूस हो सकता है।
दिलचस्प बात यह है कि पेट फूलने की शिकायत वाले हर व्यक्ति में वास्तव में बहुत अधिक गैस हो, यह जरूरी नहीं है। आंतों की संवेदनशीलता और गैस के सामान्य स्तर को महसूस करने का तरीका भी इसमें भूमिका निभा सकता है।
तेजी से खाना भी बढ़ा सकता है परेशानी
बहुत तेजी से खाना, खाते समय ज्यादा हवा निगलना, च्यूइंग गम चबाना और कार्बोनेटेड ड्रिंक लेना कुछ लोगों में गैस की समस्या बढ़ा सकता है। इसी तरह कुछ खाद्य पदार्थों में मौजूद ऐसे कार्बोहाइड्रेट जिन्हें शरीर पूरी तरह नहीं पचा पाता, बड़ी आंत में पहुंचकर बैक्टीरिया द्वारा टूटते हैं और इस प्रक्रिया में गैस बनती है।
इसलिए हर बार गैस को केवल “पेट कमजोर होने” का संकेत मानना सही नहीं है। कई बार समस्या खाने की मात्रा, खाने के तरीके या किसी खास भोजन के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया से जुड़ी होती है।
कब्ज को भी हल्के में न लें
कब्ज और पेट फूलना अक्सर एक साथ दिखाई दे सकते हैं। जब मल त्याग में परेशानी होती है या मल लंबे समय तक आंत में रहता है, तो पेट में भारीपन और असहजता बढ़ सकती है।
ऐसी स्थिति में पानी की पर्याप्त मात्रा, नियमित शारीरिक गतिविधि और फाइबर का संतुलित सेवन मददगार हो सकता है। लेकिन फाइबर अचानक बहुत ज्यादा बढ़ाने से कुछ लोगों में गैस और ब्लोटिंग बढ़ सकती है, इसलिए इसे धीरे-धीरे बढ़ाना बेहतर माना जाता है।
हर किसी के लिए एक जैसा खाना जिम्मेदार नहीं
कुछ लोगों को दूध या डेयरी उत्पादों में मौजूद लैक्टोज से परेशानी हो सकती है। वहीं कुछ लोगों में दालें, कुछ सब्जियां, ज्यादा फाइबर, फ्रक्टोज या शुगर-फ्री उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले कुछ स्वीटनर गैस बढ़ा सकते हैं।
इसका मतलब यह नहीं कि राजमा, छोले, सब्जियां या दूध हर व्यक्ति के लिए खराब हैं। अगर किसी खास भोजन के बाद लगातार लक्षण आते हैं, तो भोजन और लक्षणों की डायरी बनाकर पैटर्न समझना ज्यादा उपयोगी है। डॉक्टर या डाइटिशियन जरूरत के अनुसार आहार में बदलाव की सलाह दे सकते हैं।
तनाव का असर पेट पर भी पड़ सकता है
पाचन तंत्र और मस्तिष्क के बीच लगातार संपर्क बना रहता है। यही कारण है कि तनाव या चिंता के दौरान कुछ लोगों को पेट में गुड़गुड़ाहट, बार-बार शौच की इच्छा, पेट दर्द या ब्लोटिंग महसूस हो सकती है।
IBS जैसे विकारों में यह संबंध विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। IBS में पेट दर्द के साथ कब्ज, दस्त या दोनों तरह के मल त्याग में बदलाव हो सकते हैं और ब्लोटिंग भी आम लक्षण है।
IBS भी हो सकता है लगातार गैस और ब्लोटिंग की वजह
अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय से पेट दर्द, ब्लोटिंग और कभी कब्ज तो कभी दस्त की शिकायत रहती है, तो डॉक्टर IBS की संभावना पर विचार कर सकते हैं। IBS को केवल “गैस की बीमारी” मानना सही नहीं है। यह आंत और मस्तिष्क के बीच होने वाली जटिल क्रियाओं से जुड़ा विकार है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि IBS का निदान केवल गैस होने के आधार पर नहीं किया जाता। डॉक्टर लक्षणों के पैटर्न, मेडिकल हिस्ट्री और जरूरत के अनुसार जांच के आधार पर दूसरी बीमारियों को बाहर करते हैं।
SIBO में भी हो सकती है ब्लोटिंग
Small Intestinal Bacterial Overgrowth यानी SIBO में छोटी आंत में बैक्टीरिया की संख्या या प्रकार में असामान्य बदलाव हो सकता है। इससे अतिरिक्त गैस, ब्लोटिंग और कुछ मामलों में दस्त या वजन कम होने जैसी समस्या हो सकती है।
हालांकि हर व्यक्ति में गैस होने का मतलब SIBO नहीं है। यह कई दूसरी स्वास्थ्य स्थितियों से जुड़ी हो सकती है, इसलिए केवल लक्षण देखकर खुद से SIBO की दवा लेना उचित नहीं है।
सीलिएक डिजीज को भी समझना जरूरी
कुछ मामलों में लगातार गैस, पेट फूलना और पाचन संबंधी परेशानी सीलिएक डिजीज जैसी स्थिति से भी जुड़ी हो सकती है। यह ग्लूटेन से जुड़ा एक क्रॉनिक इम्यून सिस्टम विकार है, जिसमें छोटी आंत को नुकसान पहुंच सकता है।
इसके लक्षणों में गैस और ब्लोटिंग के अलावा लंबे समय तक दस्त या कब्ज, पेट दर्द, थकान, वजन कम होना और पोषक तत्वों के अवशोषण से जुड़ी समस्याएं शामिल हो सकती हैं।
इसलिए अगर गैस के साथ लगातार थकान, एनीमिया या वजन कम होने जैसी समस्या भी हो तो सिर्फ घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है।
किन संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें?
अगर पेट फूलने या गैस के साथ बिना कोशिश वजन कम होना, मल में खून, काला या तारकोल जैसा मल, लगातार या तेज पेट दर्द, बार-बार उल्टी, लगातार दस्त या कब्ज, बुखार या पेट का लगातार बढ़ता हुआ आकार जैसी समस्या हो तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
खास तौर पर अगर लक्षण अचानक बदल गए हैं या लंबे समय से बने हुए हैं, तो केवल गैस की दवा लेकर उन्हें दबाते रहना सही तरीका नहीं है।
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रोजमर्रा की इन आदतों से मिल सकती है राहत
सबसे पहले खाने की गति पर ध्यान दें। खाना धीरे-धीरे खाएं और अच्छी तरह चबाएं। बहुत ज्यादा मात्रा में एक साथ खाने के बजाय अपनी जरूरत के अनुसार संतुलित भोजन लें।
कार्बोनेटेड ड्रिंक, च्यूइंग गम और ऐसी आदतें कम करें जिनसे ज्यादा हवा निगलने की संभावना रहती है। अगर किसी खास भोजन के बाद बार-बार गैस होती है तो उसकी पहचान करने के लिए फूड डायरी रख सकते हैं।
कब्ज होने पर पर्याप्त पानी, नियमित शारीरिक गतिविधि और धीरे-धीरे बढ़ाया गया फाइबर मदद कर सकता है।
घरेलू नुस्खों में भी रखें सावधानी
सौंफ, अजवाइन या अदरक जैसी चीजें भारतीय खान-पान में लंबे समय से इस्तेमाल होती रही हैं और कुछ लोगों को इनके सेवन से आराम महसूस हो सकता है। लेकिन इन्हें हर व्यक्ति के लिए गैस का प्रमाणित इलाज मानना सही नहीं होगा।
अगर लगातार गैस और ब्लोटिंग हो रही है, तो बार-बार अलग-अलग घरेलू नुस्खे आजमाने के बजाय पहले कारण समझना ज्यादा जरूरी है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर आपकी डाइट, दवाओं, मेडिकल हिस्ट्री और लक्षणों की समीक्षा करके आगे की जांच तय कर सकते हैं।
बात सिर्फ गैस की नहीं, उसके पैटर्न की है
कभी-कभार गैस होना सामान्य है। लेकिन अगर हर दिन पेट फूल रहा है, बार-बार गैस हो रही है या इसके साथ पेट दर्द, कब्ज, दस्त, वजन कम होना या दूसरी परेशानियां जुड़ रही हैं, तो इसे हमेशा सामान्य पाचन प्रक्रिया मानना सही नहीं है।



