रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की राज्य सेवा परीक्षा 2025 की मुख्य परीक्षा का परिणाम जारी होने के बाद अभ्यर्थियों में नाराजगी देखने को मिल रही है। रिजल्ट में अपेक्षा से कम अंक मिलने का दावा करते हुए कई अभ्यर्थी रायपुर स्थित आयोग कार्यालय के बाहर जुटे और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। छात्रों ने उत्तर पुस्तिकाओं की रीचेकिंग, मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता और जरूरत पड़ने पर संशोधित परिणाम सूची जारी करने की मांग उठाई है।
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि कुछ उम्मीदवारों को उनके प्रदर्शन की तुलना में काफी कम अंक मिले हैं। ऐसे में उन्हें यह जानने का अधिकार मिलना चाहिए कि उनकी उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किस तरह किया गया और किन प्रश्नों में कितने अंक दिए गए।
CGPSC Mains 2025 रिजल्ट पर क्यों उठे सवाल?
मुख्य परीक्षा का परिणाम सामने आने के बाद कुछ अभ्यर्थियों ने अपने प्राप्त अंकों को लेकर आपत्ति जताई है। छात्रों का कहना है कि परीक्षा में उन्होंने बेहतर प्रदर्शन किया था, लेकिन परिणाम में मिले अंक उनकी उम्मीद के अनुरूप नहीं हैं।
इसी को लेकर अभ्यर्थी आयोग से मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जानकारी देने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि उत्तर पुस्तिकाओं में किसी प्रश्न का मूल्यांकन छूट गया हो, अंकों की गणना में गलती हुई हो या किसी अन्य तकनीकी त्रुटि की संभावना हो, तो उसकी जांच होनी चाहिए।
हालांकि, इन दावों की पुष्टि आयोग की ओर से किसी आधिकारिक जांच या संशोधित परिणाम के जरिए ही हो सकेगी।
रायपुर में CGPSC कार्यालय के बाहर प्रदर्शन
CGPSC Mains 2025 के परिणाम के बाद अभ्यर्थी रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग कार्यालय के बाहर एकत्र हुए। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर नारे लगाए और आयोग प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाने का प्रयास किया।
अभ्यर्थियों का मुख्य जोर उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच और मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता पर है। छात्रों का कहना है कि यदि पूर्ण पुनर्मूल्यांकन का प्रावधान नहीं है, तो कम से कम टोटलिंग, अनचेक उत्तर और अन्य संभावित तकनीकी त्रुटियों की जांच की जानी चाहिए।
अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों की मांगों में मुख्य रूप से निम्न बातें शामिल हैं:
- CGPSC Mains 2025 की उत्तर पुस्तिकाओं की रीचेकिंग कराई जाए।
- अंकों की टोटलिंग और डेटा एंट्री में किसी गलती की जांच हो।
- अनचेक रह गए प्रश्न या पेज की संभावना की जांच की जाए।
- अभ्यर्थियों को मूल्यांकित उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी उपलब्ध कराने पर विचार किया जाए।
- मूल्यांकन प्रक्रिया और नियमों को स्पष्ट किया जाए।
- यदि जांच के बाद अंकों में बदलाव होता है तो संशोधित परिणाम या मेरिट सूची जारी की जाए।
- अभ्यर्थियों के प्रतिनिधियों के साथ आयोग की ओर से बातचीत की जाए।
रीचेकिंग और पुनर्मूल्यांकन में क्या अंतर है?
CGPSC अभ्यर्थियों की मांग को समझने के लिए रीचेकिंग और पुनर्मूल्यांकन के बीच अंतर समझना जरूरी है।
रीचेकिंग में आमतौर पर यह देखा जाता है कि उत्तर पुस्तिका में सभी जरूरी उत्तर जांचे गए हैं या नहीं और दिए गए अंकों की गणना सही है या नहीं।
वहीं पुनर्मूल्यांकन में उत्तरों को दोबारा जांचकर उनके आधार पर नए सिरे से अंक देने की प्रक्रिया शामिल हो सकती है। दोनों प्रक्रियाओं के नियम संबंधित परीक्षा आयोग की व्यवस्था पर निर्भर करते हैं।
इसलिए यह जरूरी है कि CGPSC की ओर से परीक्षा 2025 के लिए लागू नियमों और उपलब्ध आपत्ति प्रक्रिया को ही अंतिम आधार माना जाए।
उत्तर पुस्तिका की कॉपी की मांग
अभ्यर्थियों की एक महत्वपूर्ण मांग अपनी मूल्यांकित उत्तर पुस्तिका की कॉपी या स्कैन कॉपी से जुड़ी है। छात्रों का तर्क है कि यदि उन्हें अपनी कॉपी देखने का अवसर मिलता है तो वे यह समझ सकेंगे कि किस प्रश्न में कितने अंक दिए गए और उनके किन उत्तरों का मूल्यांकन हुआ।
इससे मूल्यांकन को लेकर बनी शंकाओं को दूर करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, उत्तर पुस्तिका उपलब्ध कराने की व्यवस्था परीक्षा आयोग के नियमों और लागू प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
संशोधित परिणाम जारी करने की मांग
अभ्यर्थियों ने यह भी मांग उठाई है कि यदि रीचेकिंग या किसी अन्य जांच के दौरान अंकों में बदलाव सामने आता है तो आयोग को संशोधित परिणाम या मेरिट सूची जारी करनी चाहिए।
छात्रों का कहना है कि किसी भी संभावित गलती का असर उम्मीदवारों की आगे की चयन प्रक्रिया पर पड़ सकता है। इसलिए उनका आग्रह है कि यदि नियमों के तहत कोई त्रुटि सामने आती है तो प्रभावित अभ्यर्थियों को उचित अवसर दिया जाए।
छात्रों ने कहा- परीक्षा रद्द कराने की मांग नहीं
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि उनका उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को बाधित करना या परीक्षा रद्द कराना नहीं है। उनकी मांग मुख्य रूप से मूल्यांकन प्रक्रिया की पारदर्शिता और अपने अंकों को लेकर उठे सवालों का जवाब पाने की है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि आयोग उत्तर पुस्तिकाओं की जांच, टोटलिंग और मूल्यांकन से संबंधित स्थिति स्पष्ट कर देता है तो कई शंकाओं का समाधान हो सकता है।
CGPSC से क्या उम्मीद?
अभ्यर्थियों के प्रदर्शन के बीच अब सभी की नजर आयोग की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर है। यदि CGPSC इस मामले में कोई प्रेस नोट, आदेश या स्पष्टीकरण जारी करता है, तो उससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि रीचेकिंग, उत्तर पुस्तिका निरीक्षण या पुनर्मूल्यांकन को लेकर आयोग की क्या व्यवस्था है।
यदि किसी तकनीकी या टोटलिंग संबंधी गलती की पुष्टि होती है, तो उसके बाद ही संशोधित परिणाम जारी करने की स्थिति बन सकती है। फिलहाल अभ्यर्थियों की मांग और उनके द्वारा उठाई गई आपत्तियों को आयोग की आधिकारिक प्रतिक्रिया के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
अभ्यर्थी आगे क्या कर सकते हैं?
CGPSC Mains 2025 के अभ्यर्थियों को किसी भी कार्रवाई से पहले आयोग की आधिकारिक वेबसाइट और नोटिस को प्राथमिकता देनी चाहिए। उम्मीदवार अपने परिणाम, अंक संबंधी जानकारी और आवेदन से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखें।
यदि आयोग आपत्ति या आवेदन के लिए कोई निर्धारित प्रक्रिया जारी करता है, तो उम्मीदवार तय समय सीमा के भीतर आवेदन कर सकते हैं। किसी भी लिखित शिकायत में तथ्य और दस्तावेजों के आधार पर अपनी बात रखना बेहतर होगा।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे अपुष्ट नोटिस या दावों पर भरोसा करने के बजाय अभ्यर्थियों को CGPSC की आधिकारिक सूचना का इंतजार करना चाहिए।
CGPSC Mains 2025 विवाद पर आगे क्या होगा?
CGPSC Mains 2025 के परिणाम के बाद शुरू हुआ यह प्रदर्शन अब आयोग की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा। अभ्यर्थियों की ओर से रीचेकिंग, उत्तर पुस्तिका की जानकारी और संशोधित सूची की मांग की जा रही है।
अब देखना होगा कि आयोग इन मांगों पर क्या कदम उठाता है और क्या कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या नई व्यवस्था सामने आती है। फिलहाल किसी भी संशोधित परिणाम या पुनर्मूल्यांकन को लेकर अंतिम निर्णय की पुष्टि आयोग की आधिकारिक सूचना के बाद ही मानी जाएगी।



