नई दिल्ली, भारत में 12-13 सितंबर 2026 को हो रहे 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के बीच यह सवाल फिर से उठ रहा है कि क्या ब्रिक्स का न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक की बादशाहत को खत्म कर देगा। विशेषज्ञों के अनुसार, NDB अभी IMF और विश्व बैंक की तुलना में काफी छोटा है, लेकिन यह विकासशील देशों को बिना राजनीतिक शर्तों के ऋण देकर एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर उभरा है। भारत को न्यू डेवलपमेंट बैंक से इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास परियोजनाओं के लिए अरबों डॉलर का फायदा मिल रहा है। जून 2026 तक बैंक ने 141 परियोजनाओं के लिए 44 बिलियन डॉलर की फंडिंग मंजूर की है, और भारत इसका दूसरा सबसे बड़ा लाभार्थी देश है।
BRICS: क्या ब्रिक्स का बैंक खत्म करेगा IMF की बादशाहत
ब्रिक्स देशों द्वारा 2014 में स्थापित न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) को IMF और विश्व बैंक के विकल्प के रूप में देखा जाता रहा है। हालांकि, वास्तविकता यह है कि NDB अभी इन संस्थाओं की तुलना में काफी छोटा है।
तुलनात्मक आंकड़े:
NDB की मंजूर फंडिंग (2025 अंत तक): लगभग $42.9 बिलियन
विश्व बैंक वार्षिक फंडिंग: लगभग $100 बिलियन प्रति वर्ष
NDB अधिकृत पूंजी: $100 बिलियन
विश्व बैंक अधिकृत पूंजी: लगभग $327 बिलियन
IMF कोटा आधार: $646 बिलियन
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि NDB अभी IMF और विश्व बैंक की बादशाहत को चुनौती देने की स्थिति में नहीं है, लेकिन यह एक महत्वपूर्ण पूरक संस्था के रूप में काम कर रहा है।
भारत को कितना फायदा?
भारत न्यू डेवलपमेंट बैंक का संस्थापक सदस्य है और इसमें इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। भारत को NDB से कई क्षेत्रों में लाभ मिल रहा है।
भारत को मिलने वाले फायदे:
इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए बड़ी फंडिंग
स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता
सतत विकास परियोजनाओं के लिए ऋण
बिना राजनीतिक शर्तों के ऋण
स्थानीय मुद्रा में ऋण की सुविधा
वित्तीय स्वतंत्रता में वृद्धि
2025 के आखिर में, NDB के एक्टिव पोर्टफोलियो में $35.6 बिलियन की मंजूर फाइनेंसिंग के साथ 115 प्रोजेक्ट थे और भारत इसका दूसरा सबसे बड़ा पाने वाला देश है।
BRICS: क्या ब्रिक्स का बैंक खत्म करेगा IMF की बादशाहत – मुख्य अंतर
NDB और IMF/विश्व बैंक के बीच कई महत्वपूर्ण अंतर हैं जो NDB को एक आकर्षक विकल्प बनाते हैं।
NDB के फायदे:
राजनीतिक शर्तें नहीं: IMF और WB के ऋण के साथ राजनीतिक शर्तें जुड़ी होती हैं, जबकि NDB के ऋण पर ऐसी कोई शर्त नहीं होती
स्थानीय मुद्रा में ऋण: NDB स्थानीय मुद्रा में ऋण देता है, जिससे डॉलर पर निर्भरता कम होती है
तेज मंजूरी प्रक्रिया: ऋण मंजूरी की प्रक्रिया तेज और सरल है
विकासशील देशों पर फोकस: मुख्य फोकस विकासशील देशों की जरूरतों पर है
समान भागीदारी: सभी सदस्य देशों की समान भागीदारी
IMF/विश्व बैंक की सीमाएं:
कड़ी राजनीतिक और आर्थिक शर्तें
अमेरिकी डॉलर में ऋण
लंबी मंजूरी प्रक्रिया
विकसित देशों का प्रभुत्व
कड़ी निगरानी और हस्तक्षेप
भारत में NDB की परियोजनाएं
NDB ने भारत में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को फंड किया है।
प्रमुख परियोजनाएं:
दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ रैपिड ट्रांजिट सिस्टम: मूल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम के लिए फंडिंग
स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाएं: सौर और पवन ऊर्जा प्रोजेक्ट्स
जल आपूर्ति और स्वच्छता: विभिन्न राज्यों में जल आपूर्ति और स्वच्छता परियोजनाएं
हरी परिवहन: इलेक्ट्रिक वाहन और सार्वजनिक परिवहन
शहरी विकास: स्मार्ट सिटी और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर
ये परियोजनाएं भारत के बुनियादी ढांचे के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
BRICS: क्या ब्रिक्स का बैंक खत्म करेगा IMF की बादशाहत – स्थानीय मुद्रा में ऋण
NDB की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि स्थानीय मुद्रा में ऋण देना है। यह ब्रिक्स देशों की अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता को कम करता है।
स्थानीय मुद्रा ऋण के फायदे:
डॉलर जोखिम में कमी: सदस्य देशों को डॉलर में ऋण लेने की जरूरत नहीं
विनिमय दर जोखिम कम: स्थानीय मुद्रा में ऋण से विनिमय दर का जोखिम कम होता है
मुद्रा स्थिरता: स्थानीय मुद्राओं को मजबूती मिलती है
व्यापार को बढ़ावा: स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ता है
राष्ट्रपति डिल्मा रूसिफ के नेतृत्व में, NDB ने अपने स्थानीय मुद्रा ऋण पोर्टफोलियो को लगभग 25% तक बढ़ा दिया है और 2026 तक 30% का लक्ष्य हासिल करने की योजना है।
वैश्विक वित्तीय संरचना में सुधार की मांग
BRICS वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों ने IMF और विश्व बैंक में उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को अधिक प्रतिनिधित्व देने की मांग की है।
सुधार की मांगें:
अधिक प्रतिनिधित्व: IMF और WB में उभरते बाजारों को अधिक वोटिंग पावर
कोटा सुधार: वित्तीय कोटे में सुधार
शासन संरचना: शासन संरचना में सुधार
पारदर्शिता: अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही
विकासशील देशों की आवाज: विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करना
BRICS 2026 के वित्त मंत्रियों ने संयुक्त बयान में कहा कि वे IMF और विश्व बैंक में सुधार का समर्थन करते हैं और NDB की भूमिका को बढ़ाने के पक्ष में हैं।
BRICS: क्या ब्रिक्स का बैंक खत्म करेगा IMF की बादशाहत – आलोचनाएं और चुनौतियां
NDB को लेकर कुछ आलोचनाएं और चुनौतियां भी हैं।
आलोचनाएं:
सीमित फंडिंग: विश्व बैंक की तुलना में फंडिंग बहुत कम है
संचालन में धीमी गति: शुरुआती सालों में संचालन धीमा रहा
चीन का प्रभुत्व: चीन की बैंक पर अधिक प्रभावशाली भूमिका
CRA की सीमाएं: कंटिंजेंट रिजर्व अरेंजमेंट (CRA) अभी पूरी तरह संचालित नहीं है
राजनीतिक मतभेद: सदस्य देशों के बीच राजनीतिक मतभेद
चुनौतियां:
पूंजी जुटाना
परियोजनाओं का चयन और कार्यान्वयन
जोखिम प्रबंधन
पारदर्शिता बनाए रखना
सदस्य देशों के बीच तालमेल
भारत की रणनीतिक महत्व
भारत के लिए NDB रणनीतिक महत्व रखता है। यह भारत को वित्तीय स्वतंत्रता और वैकल्पिक फंडिंग स्रोत प्रदान करता है।
भारत के लिए महत्व:
वैकल्पिक फंडिंग: पारंपरिक संस्थाओं के अलावा अतिरिक्त फंडिंग स्रोत
वित्तीय स्वतंत्रता: पश्चिमी संस्थाओं पर निर्भरता में कमी
इंफ्रास्ट्रक्चर विकास: तेज इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए फंडिंग
क्षेत्रीय सहयोग: अन्य विकासशील देशों के साथ सहयोग
वैश्विक आवाज: वैश्विक वित्तीय संरचना में भारत की आवाज मजबूत होना
हालांकि, कुछ अर्थशास्त्रियों का तर्क है कि भारत को BRICS को नए विश्व व्यवस्था के रूप में देखने के बजाय इसे एक ‘सुरक्षा कवच’ के रूप में देखना चाहिए।
BRICS: क्या ब्रिक्स का बैंक खत्म करेगा IMF की बादशाहत – भविष्य की संभावनाएं
NDB का भविष्य उज्ज्वल है, लेकिन IMF और विश्व बैंक की जगह लेना अभी दूर की बात है।
भविष्य की संभावनाएं:
सदस्यता में विस्तार: गैर-BRICS देशों को सदस्यता
पूंजी में वृद्धि: अधिक पूंजी जुटाना
परियोजनाओं में वृद्धि: अधिक और बड़ी परियोजनाएं
स्थानीय मुद्रा में वृद्धि: स्थानीय मुद्रा में ऋण का अनुपात बढ़ाना
तकनीकी सहयोग: तकनीकी और ज्ञान साझा करना
जून 2026 तक, बैंक ने 141 परियोजनाओं के लिए 44 बिलियन डॉलर की फंडिंग मंजूर की है। बैंक ने अपनी सदस्यता का विस्तार किया है और अब इसमें छह गैर-BRICS सदस्य राज्य हैं और यह सभी UN सदस्य राष्ट्रों के लिए खुला है।
अन्य BRICS देशों को फायदा
NDB से अन्य BRICS देशों को भी महत्वपूर्ण फायदा मिल रहा है।
अन्य देशों में परियोजनाएं:
चीन: ऑफशोर विंड पावर प्लांट (पहले साल में 1 बिलियन kWh कार्बन-मुक्त बिजली)
ब्राजील: पेरनांबुको राज्य में जल आपूर्ति और स्वच्छता सेवाओं का विस्तार (लगभग 2 मिलियन लोगों को फायदा)
दक्षिण अफ्रीका: डरबन पोर्ट का आधुनिकीकरण (अफ्रीकी महाद्वीप का प्रवेश द्वार)
रूस: इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा परियोजनाएं
मिस्र, इथियोपिया, ईरान, UAE: नए सदस्यों के लिए परियोजनाएं
BRICS: क्या ब्रिक्स का बैंक खत्म करेगा IMF की बादशाहत – निष्कर्ष
विशेषज्ञों के अनुसार, NDB अभी IMF और विश्व बैंक की बादशाहत को खत्म नहीं कर सकता, लेकिन यह एक महत्वपूर्ण पूरक संस्था के रूप में काम कर रहा है।
निष्कर्ष:
NDB IMF/WB का विकल्प नहीं, बल्कि पूरक है
विकासशील देशों के लिए महत्वपूर्ण फंडिंग स्रोत
बिना राजनीतिक शर्तों के ऋण
स्थानीय मुद्रा में ऋण की सुविधा
भारत सहित सदस्य देशों को महत्वपूर्ण फायदा
भविष्य में भूमिका और मजबूत होने की संभावना
नागरिकों के लिए सलाह
सामान्य नागरिकों के लिए:
BRICS और NDB के बारे में जानकारी बढ़ाएं
वित्तीय संस्थाओं की भूमिका को समझें
भारत के वैश्विक आर्थिक संबंधों पर नजर रखें
सकारात्मक और आलोचनात्मक दोनों पहलुओं को समझें
निवेशकों के लिए:
NDB द्वारा फंड की गई परियोजनाओं पर नजर रखें
इंफ्रास्ट्रक्चर और स्वच्छ ऊर्जा सेक्टर में अवसर तलाशें
स्थानीय मुद्रा में ऋण के प्रभाव को समझें
दीर्घकालिक निवेश योजना बनाएं
जरूरी नंबर:
वित्त मंत्रालय (भारत): 011-2309-XXXX
RBI हेल्पलाइन: 022-2266-XXXX
NDB संपर्क: ऑनलाइन उपलब्ध
FAQs
1. क्या NDB IMF और विश्व बैंक की जगह ले सकता है?
वर्तमान में NDB की फंडिंग क्षमता IMF और विश्व बैंक की तुलना में काफी कम है, इसलिए यह उनकी जगह नहीं ले सकता, लेकिन एक महत्वपूर्ण पूरक संस्था के रूप में काम कर सकता है।
2. भारत को NDB से कितना फायदा मिल रहा है?
भारत NDB का दूसरा सबसे बड़ा लाभार्थी देश है। 2025 के अंत तक NDB के पोर्टफोलियो में $35.6 बिलियन की फाइनेंसिंग के साथ 115 प्रोजेक्ट थे, जिनमें से कई भारत में हैं।
3. NDB और IMF में मुख्य अंतर क्या है?
NDB के ऋण पर राजनीतिक शर्तें नहीं होतीं, जबकि IMF के ऋण के साथ कड़ी राजनीतिक और आर्थिक शर्तें जुड़ी होती हैं। NDB स्थानीय मुद्रा में ऋण देता है, जबकि IMF मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर में ऋण देता है।
4. भारत में NDB की कौन-कौन सी परियोजनाएं हैं?
भारत में NDB ने दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ रैपिड ट्रांजिट सिस्टम, स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाएं, जल आपूर्ति और स्वच्छता, हरी परिवहन और शहरी विकास जैसी परियोजनाओं को फंड किया है।
5. स्थानीय मुद्रा में ऋण क्यों महत्वपूर्ण है?
स्थानीय मुद्रा में ऋण से सदस्य देशों की अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम होती है, विनिमय दर का जोखिम कम होता है और स्थानीय मुद्राओं को मजबूती मिलती है।
6. NDB की स्थापना कब हुई?
NDB की स्थापना 2014 में फोर्टालेजा घोषणा के माध्यम से हुई थी और इसका मुख्यालय शंघाई, चीन में है।
निष्कर्ष
BRICS का न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) अभी IMF और विश्व बैंक की बादशाहत को खत्म नहीं कर सकता, लेकिन यह विकासशील देशों के लिए एक महत्वपूर्ण पूरक संस्था बनकर उभरा है। भारत को NDB से इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास परियोजनाओं के लिए अरबों डॉलर का फायदा मिल रहा है। बिना राजनीतिक शर्तों के ऋण और स्थानीय मुद्रा में फंडिंग NDB के मुख्य फायदे हैं। जून 2026 तक 141 परियोजनाओं के लिए 44 बिलियन डॉलर की फंडिंग मंजूर की जा चुकी है। भविष्य में NDB की भूमिका और मजबूत होने की संभावना है।



