ईरमघाटी नरसंहार मामले पर CM साय का कांग्रेस पर निशाना, बोले- सबूत थे तो जांच एजेंसी के सामने क्यों नहीं रखे?
NIA और कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाने के बजाय निर्णय का सम्मान करने की नसीहत, 100 से ज्यादा गवाहों के बयान के बाद 10 आरोपियों पर आया फैसला
बिलासपुर। ईरमघाटी नरसंहार मामले को लेकर छत्तीसगढ़ की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रविवार को बिलासपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान इस मामले में कांग्रेस और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यदि तत्कालीन सरकार या कांग्रेस नेताओं के पास मामले से जुड़े कोई ठोस सबूत थे, तो उन्हें जांच एजेंसी के सामने प्रस्तुत किया जाना चाहिए था।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA द्वारा की गई और इसके बाद अदालत में लंबी न्यायिक प्रक्रिया चली। उनका कहना था कि अब जब अदालत अपना फैसला सुना चुकी है, तो फैसले पर सवाल उठाने के बजाय उसे स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी पक्ष के पास कोई महत्वपूर्ण प्रमाण था, तो उसे जांच के दौरान संबंधित एजेंसी के सामने रखना उचित होता।
13 साल तक चली सुनवाई, 100 से अधिक गवाहों के बयान
सीएम साय के मुताबिक, ईरमघाटी मामले की न्यायिक प्रक्रिया लंबे समय तक चली। इस दौरान अदालत में 100 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने मामले में 10 आरोपियों को दोषी ठहराया है। अब दोषियों की सजा को लेकर अगली तारीख पर फैसला होना है।
मुख्यमंत्री ने ईरमघाटी की घटना में जान गंवाने वाले लोगों को याद करते हुए कहा कि यह बेहद दुखद घटना थी और इससे जुड़े परिवारों का दर्द गंभीर है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच और सुनवाई के बाद अदालत ने जो निर्णय दिया है, उसका सम्मान किया जाना चाहिए।
वहीं, कांग्रेस की ओर से मामले और अदालत के फैसले को लेकर अलग-अलग सवाल उठाए जा रहे हैं। इसे लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।



