आज के डिजिटल दौर में लैपटॉप (Laptop) हमारी लाइफस्टाइल का एक अभिन्न अंग बन चुका है। ऑफिस का काम हो या घर पर वेब सीरीज देखना, हमारा ज्यादातर समय स्क्रीन के सामने बीतता है। लेकिन काम खत्म होने के बाद ज्यादातर लोग लैपटॉप की स्क्रीन गिराकर उसे स्लीप मोड (Sleep Mode) में छोड़ देते हैं। कई लोगों का मानना है कि ऐसा करने से लैपटॉप की परफॉर्मेंस पर असर पड़ता है और बैटरी भी जल्दी खराब होती है। लेकिन क्या यह वाकई सच है? आइए इस तकनीकी उलझन को आज हमेशा के लिए सुलझा लेते हैं।
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लैपटॉप को स्लीप मोड के फायदे और खराब होने का सच
आधुनिक लैपटॉप, खासकर MacBooks और नए Windows लैपटॉप इस तरह से डिजाइन किए जाते हैं कि वे स्लीप मोड में न के बराबर बैटरी खर्च करें। अगर आप दिन में कई बार छोटे ब्रेक लेते हैं या अगले दिन सुबह तुरंत अपना काम शुरू करना चाहते हैं, तो लैपटॉप को स्लीप मोड पर रखना बिल्कुल सुरक्षित और स्मार्ट तरीका है। इससे डिवाइस के हार्डवेयर पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता।
शटडाउन करना कब है जरूरी?
इसके अलावा, आपके ऑपरेटिंग सिस्टम (OS) और एंटीवायरस के कई जरूरी अपडेट्स शटडाउन या रीस्टार्ट के दौरान ही इंस्टॉल होते हैं। अगर आप लैपटॉप को कई दिनों (जैसे वीकेंड) तक इस्तेमाल नहीं करने वाले हैं, तो उसे स्लीप मोड पर छोड़ने के बजाय शटडाउन करना चाहिए ताकि बैटरी बिना वजह ड्रेन न हो।
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क्या करना है सही?
सीधे शब्दों में कहें तो रोजाना के नियमित काम के लिए लैपटॉप को स्लीप मोड पर रखना पूरी तरह से सही और व्यावहारिक है। लेकिन, सिस्टम को हैंग होने से बचाने और उसकी परफॉर्मेंस को स्मूथ बनाए रखने के लिए, हफ्ते में कम से कम एक या दो बार लैपटॉप को पूरी तरह शटडाउन या री-स्टार्ट जरूर करें।






